पाकिस्तानी ड्रामा यूं तो बहुत खुलेपन की बातें करते हैं और वे एक ऐसे पाकिस्तान की छवि पेश करते हैं, जहां कोई भेदभाव नहीं है। जहां तरक्की की बयार है और केवल आजाद ख्याल के लोग ही रहते हैं। दरअसल वे पाकिस्तान की एक झूठी तस्वीर पेश करते हैं, जिसे वे केवल भारत और अन्य देशों के गैर-मुस्लिम दर्शकों के लिए ही बनाते हैं। यह एक ऐसा छलावा है, जिसके चलते वे पाकिस्तानी युवकों की एक रोमांटिक छवि बनाते हैं, जिसके चलते लव जिहाद जैसी घटनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होती है।
जो दिखता है, वह है नहीं, ऐसा ही कुछ एक पाकिस्तानी ड्रामा ज़ब्त के एक एपिसोड के साथ हुआ और अब पाकिस्तान की वही छवि सामने आई है, जो वह वास्तव में है। जो वह श्रीलंका के एक व्यक्ति के साथ करता है- बेअदबी पर लिंचिंग!
क्यों हो रहा हंगामा?
ज़ब्त के एपिसोड 20 में हीरोइन सारा एजाज गुस्से में हैं और वे गुस्से में अपना सारा सामान फेंकती हैं। इसी गुस्से में वह एक किताब को गिराती है। वह किताब इस्लामिक स्टडीज़ की है और जिसे लेकर लोगों का कहना है कि उस पर मस्जिद अल हरम की तस्वीर थी। जबकि कुछ का कहना है कि इसमें कलमा लिखा था। इसको लेकर विवाद हो गया और कट्टरपंथियों ने बेअदबी का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर सीरियल के खिलाफ पोस्ट लिखी गईं और साथ ही सारा एजाज पर भी लोगों ने गुस्सा निकाला। सारा को धमकियां मिलने लगीं।
हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इसमें सारा की गलती नहीं है, बल्कि यह तो प्रोडक्शन की गलती है। यह निर्देशक की गलती है, फिर इसमें सारा को क्यों निशाना बनाना।
परंतु सारा निशाना बनती रहीं और हंगामा इतना बढ़ा कि उस एपिसोड को यूट्यूब से हटाना पड़ा और उसकी जगह पर उसका संपादित एपिसोड अपलोड किया गया। लोगों का कहना था कि चूंकि अब जब मामला हल हो चुका है, तो आगे बढ़ना चाहिए या फिर जैसा कि इस पर प्रतिबंध की बातें हो रही हैं, प्रतिबंध करना चाहिए? यह ड्रामा Geo tv पर आता है, मगर इस पर पहले भी मजहब के अपमान का आरोप लग चुका है और इस ड्रामा के बाद एक बार फिर से बेअदबी के आरोप बढ़ गए।
सारा एजाज ने मांगी माफी
सारा एजाज ने माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि वे दिल से माफी मांगती हैं। वह एक मुसलमान हैं, इसलिए मजहबी टेक्स्ट का अपमान नहीं कर सकतीं। सारा ने यह भी कहा कि वे किसी भी दूसरे धार्मिक ग्रंथ का भी अपमान नहीं कर सकती हैं।
लोगों का कहना है कि इतने रीटेक होते हैं, इतने लोग होते हैं, तो क्या किसी ने देखा नहीं! और लगातार ही सारा को लेकर आलोचना हो रही है। इस दृश्य के आलोचकों का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया है। क्योंकि दर्जनों लोगों की मौजूदगी में ड्रामा की रिकॉर्डिंग होती है। पूरी टीम वहाँ पर थी। geo समूह को रंगे हाथों पकड़ा गया है। अब इस मामले को माफी या मुआवजे के साथ खत्म नहीं किया जा सकता है। इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
पहले के ड्रामा को लेकर विवाद
इससे पहले मेरे हमसफ़र ड्रामा में दादी की मौत के दृश्य पर विवाद हुआ था और वह भी मजहबी कारण से था। उसमें मातम मनाने वाले लोग सफेद कपड़ों में थे। जिसे लेकर यह विवाद हुआ था कि यह सब हिन्दू दर्शकों के लिए है। चूंकि मुसलमानों में मातम में काले कपड़े पहने जाते हैं, और ड्रामा के निर्देशक ने मातम में हिंदुओं वाले सफेद कपड़े पहना दिए। इसके साथ ही शेर ड्रामा में गैर सैयद महिला और गैर सैयद पुरुष की शादी दिखाई गई थी और इस पर विवाद हुआ था।
हिंदुओं को लेकर नकारात्मकता
एक और महत्वपूर्ण बात पाकिस्तानी ड्रामों की रहती है कि उनमें हिंदुओं का प्रतिनिधित्व शून्य है। यदि कोई हिन्दू चरित्र दिखाया भी जाता है तो पाकिस्तानी नागरिक खिल्ली उड़ाते हैं। ऐसा ही एक वाकया मेहरपोश ड्रामा के साथ हुआ था। उसमें एक हिन्दू चरित्र दिखाया गया था। उस पर लोगों की प्रतिक्रिया थी कि “हिन्दू इसमें क्या कर रहा है? क्या यहां पर स्टार प्लस देख रहे हैं?”
ड्रामा के माध्यम से पाकिस्तान अपनी सॉफ्ट छवि बनाना चाहता है, मगर पाकिस्तानी ड्रामा भी असली पाकिस्तान नहीं दिखाते हैं। वे नकली दिखाते हैं, जो पाकिस्तान है ही नहीं! पाकिस्तान की अवाम की मानसिकता तब दिखती है, जब या तो मेहरपोश में हिन्दू दिखाते हैं या फिर जब्त में एक किताब को गलती से गिराना!

















