मणिपुर में एक रिंग रोड का मामला काफी चर्चा में है, जहां सड़क को उग्रवादियों के नाम पर रखा गया है और इसे बिना किसी सरकारी इजाजत के बनाया जा रहा था। ये रोड जंगली और पहाड़ी इलाकों से गुजरती है, और अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
रोड का नाम और विवादइस रिंग रोड के कुछ हिस्सों को स्थानीय लोग ‘जर्मन रोड’ या ‘टाइगर रोड’ कहते हैं। ये नाम कुकी उग्रवादियों के उपनामों से जुड़े हैं। मैतेई समुदाय के संगठन COCOMI ने NGT में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि ऐसे नाम रखना कानून का उल्लंघन है और इससे उग्रवाद को बढ़ावा मिलता दिखता है। सोशल मीडिया पर इस सड़क के गेट की तस्वीरें वायरल हुईं, जहां ‘टाइगर रोड’ लिखा हुआ था। ये रोड मणिपुर की आधिकारिक सरकारी रिंग रोड (जो एशियाई विकास बैंक की मदद से इम्फाल में बनी है) से अलग है।
बिना अनुमति के निर्माण
ये रिंग रोड छह जिलों से होकर गुजरती है—चुराचांदपुर, कांगपोकपी, नोनी, उखरूल और दो अन्य। ये इलाके ज्यादातर जंगल और पहाड़ी हैं। कुकी समुदाय के लोग इसे बना रहे थे। निर्माण मणिपुर में जातीय तनाव और संकट के दौरान शुरू हुआ। कोई पर्यावरणीय मंजूरी, भू-वैज्ञानिक जांच या सरकारी अनुमति नहीं ली गई थी। याचिकाकर्ताओं ने सैटेलाइट इमेजरी का हवाला दिया कि जंगलों में बिना क्लियरेंस के काम चल रहा है।
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NGT में याचिका और आदेश
COCOMI के संयोजक खुरैजम अथौबा सिंह ने NGT की कोलकाता बेंच में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि इस रोड से अवैध ड्रग्स, तस्करी, छोटे हथियार, गोला-बारूद और बिना कागजात वाले लोगों की आवाजाही आसान हो रही है। NGT ने 23 दिसंबर 2025 को आदेश दिया कि इस रोड पर कोई भी काम तुरंत बंद हो। मुख्य सचिव को छह जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देने को कहा गया कि रोक का पालन सख्ती से हो। अगर नियम तोड़े गए तो उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
उग्रवादियों के नाम पर सड़क से लोग परेशान
मणिपुर में लंबे समय से जातीय तनाव चल रहा है, खासकर मैतेई और कुकी समुदायों के बीच। इस दौरान कई जगहों पर ऐसी सड़कें बनीं, जिन पर सवाल उठे। एक स्थानीय व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि उग्रवादियों के नाम पर सड़कें बनना लोगों को परेशान करता है, क्योंकि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं होती। NGT ने पहले भी मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी—अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में कई बार समय बढ़ाया गया। अब NGT ने साफ कहा कि पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा पहले है।
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ये पूरा मामला सोशल मीडिया से शुरू हुआ, जहां उद्घाटन की तस्वीरें और MLA की मौजूदगी वाली फोटो वायरल हुईं। अभी तक रोड की लंबाई, चौड़ाई या लागत जैसी डिटेल्स सामने नहीं आई हैं। NGT का फोकस पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर है, और वो चाहता है कि बिना जांच के कोई निर्माण न हो।

















