दिल्ली और लखनऊ में हाल ही में हुई आगजनी की घटनाओं ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। इन हादसों में कई लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि अब सिर्फ बिल्डरों या भवन मालिकों पर कार्रवाई करना काफी नहीं है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी इन इलाकों की निगरानी करने की थी, उन्हें भी जवाब देना होगा।
अधिकारियों की लापरवाही पर कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान नगर निकायों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि पहले भी कई बार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। यही लापरवाही आज बड़े हादसों की वजह बन रही है। कोर्ट ने खास तौर पर दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और सरोजिनी नगर में अवैध निर्माण का मामला उठाया। अदालत ने कहा कि पहले केवल नोटिस जारी किए गए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब इन इलाकों का सर्वे कराने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जिसमें आईआईटी के प्रोफेसर और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के अलीगंज इलाके का भी सर्वे कराने का आदेश दिया है। 22 जून को यहां एक तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें ज्यादातर छात्र थे, जो कोचिंग की तैयारी के लिए लखनऊ आए थे। शुरुआती जांच में भवन की सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां सामने आई थीं। इसके अलावा कोर्ट ने गुरुग्राम की उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई, जिनमें बताया गया कि वहां की अधिकांश इमारतें अग्नि सुरक्षा जांच में फेल हो गईं। अदालत ने दिल्ली, गुरुग्राम और लखनऊ के नगर निकायों के प्रमुख अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर जवाब देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाए और अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो ऐसे दर्दनाक हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। अदालत का यह सख्त रुख देशभर के अधिकारियों के लिए एक बड़ा संदेश है कि लापरवाही अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।















