बांग्लादेश पुलिस ने इस्लामिक कट्टरपंथी शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में बड़ा दावा किया है कि हत्यारे भारत भाग गए हैं। लेकिन भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बीएसएफ बांग्लादेश पुलिस के दावे को “बेबुनियाद और भ्रामक” बताया है।
हत्या की घटना
कट्टरपंथी और भारत विरोधी शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश में एक चर्चित युवा नेता था। वो इंकिलाब मंच का प्रवक्ता था, जो कि पिछले साल जुलाई में शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन में शामिल था। हादी भारत और अवामी लीग का विरोधी था। वह तो फरवरी में प्रस्तावित संसदीय चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। लेकिन 12 दिसंबर 2025 को ढाका के बीजॉयनगर इलाके में दिनदहाड़े हादी पर हमला हुआ। मास्क पहने हमलावरों ने उस पर गोली चलाई, जिसमें सिर में गंभीर चोट आई। उसे तुरंत सिंगापुर ले जाया गया बेहतर इलाज के लिए, लेकिन 18 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद बांग्लादेश में क्या हुआ
हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका और दूसरे शहरों में भारी गुस्सा फैल गया। इस्लामिक कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर हिंसा हुई—प्रोथम आलो और द डेली स्टार जैसे अखबारों के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। छायानट और उदिची शिल्पी गोश्ठी जैसी सांस्कृतिक संस्थाओं पर भी हमले हुए। मयमंसिंह में एक हिंदू फैक्टरी वर्कर दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और जला दिया। पूरे देश में तनाव बढ़ गया।
बांग्लादेश पुलिस का दावा
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 28 दिसंबर को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हत्या के दो मुख्य संदिग्ध—फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख (या कुछ रिपोर्टों में अलमगीर शेख)—बांग्लादेश छोड़कर भारत भाग गए हैं। उनका कहना था कि ये दोनों मयमंसिंह जिले के हलुआघाट सेक्टर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके मेघालय के गारो हिल्स इलाके में घुस गए। उन्होंने बताया कि स्थानीय कुछ साथियों की मदद से ये लोग सीमा पार कर गए। वहां उन्हें टैक्सी से तुरा (पश्चिम गारो हिल्स का मुख्यालय) ले जाया गया। पुलिस को “अनौपचारिक सूत्रों” से जानकारी मिली कि इन दोनों को मदद करने वाले दो लोग—पुरति और सामी—भारतीय पक्ष में पकड़े गए हैं। डीएमपी अधिकारी ने आगे कहा कि बांग्लादेश सरकार भारत से संपर्क में है। दोनों देशों के बीच औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों से बात चल रही है ताकि इन फरार लोगों को गिरफ्तार करके प्रत्यर्पण किया जा सके। पुलिस ने उम्मीद जताई कि भारत पूरा सहयोग करेगा।
बीएसएफ और मेघालय पुलिस का जवाब
बीएसएफ (मेघालय फ्रंटियर) के इंस्पेक्टर जनरल ओ.पी. ओपाध्याय ने बांग्लादेश पुलिस के दावे को “बेबुनियाद और भ्रामक” बताया। उन्होंने साफ कहा, “हलुआघाट सेक्टर से किसी भी व्यक्ति के मेघालय में घुसने का कोई सबूत नहीं है। बीएसएफ ने न तो ऐसा कोई मामला पकड़ा और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट मिली।” मेघालय पुलिस ने भी यही बात दोहराई कि गारो हिल्स में संदिग्धों की मौजूदगी की कोई खुफिया जानकारी या इनपुट नहीं है। कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी गई। दोनों एजेंसियां कहती हैं कि सीमा पर अलर्ट है, खासकर बांग्लादेश में चल रही अशांति को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है।

















