भुवनेश्वर: ओडिशा पूर्वी भारत में एक प्रमुख फार्मास्युटिकल हब के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। गुणवत्ता युक्त दवाओं और उन्नत मेडिकल डिवाइस के उत्पादन पर केंद्रित रणनीति के तहत राज्य सरकार फार्मा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बात मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित ओडिशा फार्मा समिट–2025 को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रगतिशील नीतियों, सुदृढ़ अवसंरचना और कुशल मानव संसाधन के माध्यम से फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित कर रही है।
उन्होंने रेखांकित किया कि ओडिशा निरंतर निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। समिट के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में कुल 45 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका कुल निवेश मूल्य ₹6,263 करोड़ है। इन निवेशों से राज्य में लगभग 38,406 रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इनमें 32 एमओयू फार्मास्युटिकल क्षेत्र, 12 एमओयू मेडिकल डिवाइस क्षेत्र, जबकि एक एमओयू एक लैंडमार्क औद्योगिक पार्क परियोजना से संबंधित है।
CM ने कहा- हमारा लक्ष्य ओडिशा को फार्मास्युटिकल विनिर्माण का अग्रणी केंद्र बनाना है
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ओडिशा फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज़ नीति–2025 का औपचारिक शुभारंभ किया और खुर्दा जिले में समर्पित फार्मा पार्क तथा मेडिकल डिवाइस पार्क की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि नई नीति देश की सर्वश्रेष्ठ नीतियों में शामिल है, जिसे अनुसंधान, पूंजी निवेश, अवसंरचना विकास और फार्मा वैल्यू चेन के सभी चरणों में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों की पहली पसंद बनने के लिए हर आवश्यक प्रयास कर रही है। उन्होंने राज्य के पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि आज ओडिशा देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल है जहां पूंजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। हमारा औद्योगिक इकोसिस्टम अत्यंत अनुकूल है और हमारा लक्ष्य ओडिशा को फार्मास्युटिकल विनिर्माण का अग्रणी केंद्र बनाना है ।

राज्य ने अपने संसाधनों को अधिक जन-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए
औद्योगिक विविधीकरण पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धातु, खनिज और रसायन उद्योग भले ही ओडिशा की औद्योगिक वृद्धि की रीढ़ रहे हों, लेकिन राज्य ने अपने संसाधनों को अधिक जन-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। बीते डेढ़ वर्ष में राज्य में रसायन, पेट्रोकेमिकल, हरित ऊर्जा, फिनटेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, वस्त्र और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय निवेश हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के इस समिट के साथ ओडिशा के फार्मा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।
ओडिशा पूर्वी भारत का विनिर्माण केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक परिदृश्य में ओडिशा की विशिष्ट पहचान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में ओडिशा का फार्मा क्षेत्र गुणवत्ता और लागत-प्रतिस्पर्धा के मामले में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा और मेड-टेक विनिर्माण में राज्य की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगा।
फार्मा उद्योग को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में उद्योगों के लिए अत्यंत अनुकूल माहौल उपलब्ध है। राज्य के पास प्रचुर खनिज संसाधन, तीन प्रमुख बंदरगाह, दो वाणिज्यिक हवाई अड्डे, 575 किलोमीटर लंबा समुद्र तट, सशक्त रेल एवं सड़क संपर्क, अधिशेष विद्युत आपूर्ति, पर्याप्त जल संसाधन और प्रशिक्षित कार्यबल मौजूद है। ओडिशा पूर्वी भारत का विनिर्माण केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा कि ओडिशा फार्मा समिट–2025 राज्य की विकासोन्मुख औद्योगिकीकरण रणनीति का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील नीतियों, समर्पित औद्योगिक पार्कों और कुशल मानव संसाधन के माध्यम से ओडिशा फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्माताओं के लिए सक्षम वातावरण तैयार कर रहा है। इस अवसर पर महाकालपाड़ा विधायक दुर्गा प्रसन्न नायक, मुख्य सचिव मनोज आहूजा और विकास आयुक्त अनु गर्ग सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव (उद्योग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) हेमंत शर्मा ने स्वागत भाषण दिया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त-सह-सचिव अश्वती एस. ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

















