रथ यात्रा 2026 : श्रीमंदिर के सिंहद्वार पर भगवान जगन्नाथ के स्वागत को तैयार तीन दिव्य रथ, भक्ति के सागर में डूबा पुरी
August 5, 2026
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रथ यात्रा 2026 : श्रीमंदिर के सिंहद्वार पर भगवान जगन्नाथ के स्वागत को तैयार तीन दिव्य रथ, भक्ति के सागर में डूबा पुरी

यह महान पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम है, जिसमें देश-विदेश से लाखों भक्त भाग लेते हैं।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Jul 16, 2026, 09:13 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: विश्वविख्यात भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा गुरुवार, 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर धूमधाम से शुरू हो गई है। इस शुभ दिन पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा तथा भगवान सुदर्शन अपनी वार्षिक पवित्र यात्रा पर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। यह महान पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम है, जिसमें देश-विदेश से लाखों भक्त भाग लेते हैं।

लगातार हो रही हल्की बारिश के बावजूद पुरी के प्रसिद्ध बड़ा दांड (ग्रैंड रोड) पर हजारों श्रद्धालु पहले ही एकत्र हो चुके हैं। वे भगवान के दर्शन के लिए अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं। श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार (लायन गेट) पर तीनों भव्य और विशाल रथ पूरी तरह सुसज्जित होकर तैयार खड़े हैं। ये रथ पारंपरिक पाहंडी यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसमें देवताओं को मंदिर से बाहर लाकर रथों पर विराजमान किया जाता है।

भक्ति के सागर में डूबा पुरी
पुरी नगरी इस समय पूर्णतः भक्ति और आध्यात्मिकता में डूबी हुई है। चारों ओर “जय जगन्नाथ” के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और उत्साहपूर्ण हो गया है। यह वह समय होता है जब वर्ष में एक बार भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहनों के साथ मंदिर के गर्भगृह में स्थित रत्न सिंहासन को छोड़कर बाहर आते हैं और रथों पर आरूढ़ होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

बड़ा दांड श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी भक्त यहां पहुंचे हैं। सभी श्रद्धालुओं की निगाहें उस ऐतिहासिक और भावुक क्षण पर टिकी हैं जब भगवानों को पारंपरिक पाहंडी प्रक्रिया के तहत श्रीमंदिर से बाहर लाया जाएगा और उन्हें उनके-अपने रथों पर विराजमान किया जाएगा।

रथ यात्रा से पहले अंतिम तैयारियां पूरी
रथ यात्रा से एक दिन पूर्व, बुधवार को श्री जगन्नाथ मंदिर में सभी पारंपरिक और धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न कर लिए गए। मंगलवार को आयोजित नबजौबन दर्शन के बाद एक महत्वपूर्ण परंपरा के तहत तीनों रथों को रथखला (जहां रथों का निर्माण होता है) से सिंहद्वार तक लाया गया।

मंदिर की परंपरा के अनुसार दिन की शुरुआत भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन की नियमित पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद गोपाल बल्लभ और सकाल धूप जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके उपरांत सेवायतों द्वारा ‘आज्ञामाला’ (भगवान की अनुमति का प्रतीक पवित्र माला) को देवताओं से लेकर तीनों रथों तक एक विशेष शोभायात्रा के माध्यम से पहुंचाया गया। इस परंपरा को ‘आज्ञामाला बीजे’ कहा जाता है, जो इस बात का संकेत है कि भगवान ने रथ यात्रा के प्रारंभ की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। आज्ञामाला बीजे के बाद तीनों रथों को रथखला से खींचकर श्रीमंदिर के सिंहद्वार के सामने स्थापित किया गया। इन सभी प्राचीन और परंपरागत अनुष्ठानों के पूर्ण होने के साथ ही रथ यात्रा की सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।

रथ यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, रथ यात्रा के दिन सुबह लगभग 9:00 बजे से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। सबसे पहले भोग मंडप में मॉर्निंग धूप (प्रातःकालीन भोग) अर्पित किया जाएगा। इसके बाद रथों का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। सुबह 9:15 बजे मंगलार्पण अनुष्ठान संपन्न होगा, जिसके पश्चात 9:30 बजे से बहुप्रतीक्षित ‘पाहंडी बीजे’ यात्रा प्रारंभ होगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को पारंपरिक ढंग से झूमते हुए मंदिर से बाहर लाकर उनके-अपने रथों पर स्थापित किया जाएगा। यह दृश्य अत्यंत भावनात्मक और भक्तिभाव से परिपूर्ण होता है, जिसमें ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और “जय जगन्नाथ” के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।

पहंडी के बाद प्रतिनिधि देवताओं—मदनमोहन, भगवान राम और भगवान कृष्ण—को भी पारंपरिक शोभायात्रा के तहत निकाला जाएगा, जो सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच रथ यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान ‘छेरा पहाड़ा’ संपन्न किया जाएगा। इस अनुष्ठान में पुरी के गजपति महाराजा स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों के मंच को साफ करते हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और राजा भी स्वयं को भगवान का सेवक मानते हैं। छेरा पहंरा के बाद रथों को यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार किया जाएगा। रथों में रस्सियां बांधी जाएंगी, घोड़ों को जोड़ा जाएगा और सारथियों को उनके स्थान पर नियुक्त किया जाएगा। शाम 4:00 बजे से तीनों रथों को खींचने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इसी के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर आरंभ होगी, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है।

प्रशासन की ओर से कड़े इंतजाम
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि रथ यात्रा को लेकर सभी तैयारियां सुचारू रूप से और समयानुसार चल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पाहंडी बीजे निर्धारित समय के अनुसार सुबह 9:00 से 9:30 बजे के बीच प्रारंभ हो जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि रथों पर किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को चढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही रथों पर मोबाइल फोन ले जाने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने यह भी बताया कि रथों पर होने वाली सभी गतिविधियों की वीडियोग्राफी की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
रथ यात्रा के दौरान वीआईपी और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने सुगम दर्शन, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक सेवाओं की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की है। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनुशासन बनाए रखें और इस पवित्र पर्व में शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से भाग लें। रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्वितीय अवसर है, जिसमें भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर उन्हें दर्शन देते हैं। पुरी एक बार फिर इस भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

रथ यात्रा 2026 के लिए व्यापक सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी
विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 2026 के मद्देनज़र ओडिशा सरकार और प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा, प्रबंधन और सुविधा व्यवस्थाएं लागू की हैं, ताकि लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन सुरक्षित, सुचारु और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक बन सके। इस वर्ष विशेष रूप से आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली पर जोर दिया गया है।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम और स्मार्ट निगरानी रथ यात्रा की तैयारियों की निगरानी कर रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सौमेंद्र प्रियदर्शी ने जानकारी दी कि इस वर्ष लगभग 13,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे पुरी शहर पर नजर रखने के लिए 450 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो हर गतिविधि की निगरानी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया, “एक एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है, जहां से पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, पुरी पुलिस का चैटबॉट और मोबाइल एप भी आम जनता के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिससे लोगों को त्वरित जानकारी और सहायता मिल सके।”

जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए शहर के 65 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाए गए हैं, जहां आवश्यक सूचनाएं और निर्देश प्रदर्शित किए जाएंगे। भुवनेश्वर स्मार्ट सिटी प्रशासन के साथ भी समन्वय किया गया है, ताकि वहां मौजूद लोगों तक भी सभी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई जा सके।

रेलवे और तटीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान
रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। विशेष रूप से रथ यात्रा के समापन के बाद प्लेटफॉर्म पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।
इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है। एडीजी प्रियदर्शी ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना के साथ समन्वय कर पुरी तट पर लगातार निगरानी के लिए गश्ती जहाज तैनात किए गए हैं, जो पूरे रथ यात्रा अवधि के दौरान सक्रिय रहेंगे।

भारी बारिश से निपटने की तैयारी
मौसम को देखते हुए प्रशासन ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में डीवाटरिंग पंप लगाए गए हैं और कई स्थानों से पानी की निकासी पहले ही कर दी गई है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण पुरी में लगातार भारी वर्षा हो रही है और भारतीय मौसम विभाग ने रथ यात्रा के दिन भी भारी बारिश की संभावना जताई है।

सरकार की व्यापक तैयारियां: मुख्य सचिव अनु गर्ग
ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने रथ यात्रा 2026 के सफल आयोजन के लिए व्यापक और सुनियोजित तैयारियां की हैं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार ओडिशा के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसर है और सरकार ने महाप्रभु तथा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास किया है।
उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी स्वयं तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, जबकि कानून मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।

यातायात, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
इस वर्ष यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। अतिरिक्त पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की गई है और पिछले वर्षों में आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे पुरी शहर में लगभग 1,200 अस्थायी शौचालय स्थापित किए गए हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पानी निकालने के पंप भी लगाए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अस्पताल, आपातकालीन चिकित्सा केंद्र और हीट रिलीफ रूम स्थापित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान की जा सके।

सूचना प्रणाली और नियंत्रण व्यवस्था
पिछले छह से सात महीनों से चल रही तैयारियों के तहत पूरे शहर में मार्गदर्शन हेतु साइनबोर्ड और सूचना पट्ट लगाए गए हैं। एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पूरे आयोजन की निगरानी की जाएगी, जिसमें सीसीटीवी नेटवर्क और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल होगी। भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए हैं। प्रशासन को विश्वास है कि सभी श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन का अनुभव मिलेगा।

डिजिटल पहल ‘समर्पण’ का शुभारंभ
रथ यात्रा से पूर्व एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के तहत ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ‘समर्पण’ नामक ऑनलाइन हुंडी प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। यह प्लेटफॉर्म दुनिया भर के श्रद्धालुओं को श्री जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से दान करने की सुविधा प्रदान करता है। यह प्रणाली ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर (ओसीएसी) और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के संयुक्त प्रयास से विकसित की गई है और इसे मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘समर्पण’ एक पवित्र डिजिटल सेतु है, जो विश्वभर के श्रद्धालुओं को महाप्रभु जगन्नाथ से जोड़ता है। यह न केवल तकनीकी नवाचार है, बल्कि भक्तों और भगवान के बीच आध्यात्मिक संबंध को और मजबूत करने का माध्यम भी है।

दान प्रक्रिया और सुविधाएं
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रद्धालु मोबाइल एप या वेब पोर्टल के जरिए कहीं से भी दान कर सकते हैं। उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर आधारित ओटीपी के जरिए लॉगिन कर सकते हैं और यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड तथा व्हाट्सएप पेमेंट जैसे विभिन्न विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं। सफल लेन-देन के बाद डिजिटल रसीद तुरंत डाउनलोड की जा सकती है। दान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है—श्रद्धालु 1 रुपये से भी दान कर सकते हैं। साथ ही, मंदिर के मरम्मत एवं नवीनीकरण फंड या कॉर्पस फंड में योगदान करने पर आयकर लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।

अतिरिक्त डिजिटल सेवाएं
‘समर्पण’ ऐप केवल दान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक डिजिटल सेवा मंच के रूप में भी कार्य करेगा। इसमें मंदिर की दैनिक पूजा, अनुष्ठान, समय-सारिणी और महत्वपूर्ण घोषणाओं की जानकारी उपलब्ध होगी। इसके अलावा, श्रद्धालु पुरी स्थित मंदिर प्रबंधित भक्त निवासों में ऑनलाइन आवास बुकिंग भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल पारदर्शी, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे आध्यात्मिक सेवाएं अधिक सुलभ और सरल बनेंगी।

Topics: Jagannath Rath YatraRath Yatra 2026Odisharath yatra
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