ऑपरेशन विजय: 36 घंटे का वह सैन्य एक्शन जिसने गोवा को दिलाई आजादी
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ऑपरेशन विजय: 36 घंटे का वह सैन्य एक्शन जिसने गोवा को दिलाई आजादी

गोवा पर पुर्तगाल का कब्जा 16वीं शताब्दी में शुरू हुआ। साल 1498 में वास्को डी गामा भारत आया और समुद्री मार्ग से भारत पहुंचा। इसके बाद पुर्तगालियों ने धीरे-धीरे भारत के तटीय क्षेत्रों में अपने व्यापारिक और राजनीतिक किले बनाया।

Written byMahak SinghMahak Singh
Dec 17, 2025, 09:10 am IST
inभारत
Goa Liberation Day 2025

Goa Liberation Day

भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, लेकिन देश की संपूर्णता अभी पूरी तरह नहीं हुई थी। उस समय देश के कुछ हिस्सों पर विदेशी शक्ति का शासन अभी भी जारी था। इनमें सबसे प्रमुख गोवा था, जो 450 सालों तक पुर्तगालियों के अधीन रहा। गोवा, दमन, दीव और नागर हवेली जैसे छोटे उपनिवेश पुर्तगाल की उपनिवेश नीति का हिस्सा थे। भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण था कि वह गोवा को अपने अधिकार में लाए, क्योंकि पुर्तगाल उस समय NATO का सदस्य था ।

गोवा पर पुर्तगाल का कब्जा और शासन

गोवा पर पुर्तगाल का कब्जा 16वीं शताब्दी में शुरू हुआ। साल 1498 में वास्को डी गामा भारत आया और समुद्री मार्ग से भारत पहुंचा। इसके बाद पुर्तगालियों ने धीरे-धीरे भारत के तटीय क्षेत्रों में अपने व्यापारिक और राजनीतिक किले बनाया। 1510 तक उसने गोवा पर कब्जा कर लिया और इसे अपने मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया। पुर्तगालियों ने अपने शासन में गोवा को एक मजबूत सामरिक और व्यापारिक केन्द्र के रूप में स्थापित किया। समय के साथ उनके नियंत्रण वाले क्षेत्र घटते गए, लेकिन गोवा, दमन, दीव और नागर हवेली उनके अधीन बने रहे।

गोवा मुक्ति की शुरुआत

जब भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ तब अंग्रेजों ने देश छोड़ दिया, लेकिन पुर्तगाल ने गोवा को स्वतंत्र भारत के हिस्से में शामिल नहीं किया। भारत ने गोवा को अपने अधिकार में लेने की कोशिश की। 1950 और 1955 के दशक में भारत ने पुर्तगाल पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए, ताकि वे अपने उपनिवेशों को भारत को सौंपने के लिए बाध्य हों। लेकिन ये प्रयास पर्याप्त नहीं थे। चुनौती और निर्णायक मोड़ तब आया जब 1961 में पुर्तगालियों ने मछुआरों पर गोलियां चलाई, जिसमें एक मछुआरे की मौत हो गई। यह घटना देशभर में गुस्से और आक्रोश का कारण बनी। जनता और सरकार ने मिलकर तय किया कि अब गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त करना ही होगा।

यह भी पढ़ें- क्या आप जानते हैं, 1961 में भारत ने कैसे वापस लिया गोवा?

ऑपरेशन विजय और पुर्तगाली शासन का अंत

इसी निर्णय के तहत 17 दिसंबर 1961 को ऑपरेशन विजय की शुरुआत हुई। इस अभियान में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लगभग 30,000 सैनिक शामिल थे। भारतीय सेना ने रणनीति के तहत पुर्तगालियों के मुख्य मार्गों पर नियंत्रण स्थापित किया। पुर्तगालियों ने वास्को के पास बने पुल को धमाके से उड़ा दिया लेकिन भारतीय सैनिकों ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। भारतीय वायु सेना ने पुर्तगालियों के ठिकानों पर बमबारी की और थल सेना लगातार आगे बढ़ती रही। भारतीय नौसेना ने समुद्री मार्ग से समर्थन प्रदान किया। पुर्तगालियों ने महसूस किया कि भारतीय सैनिकों के सामने टिक पाना असंभव है। अंततः 19 दिसंबर 1961 को पुर्तगाली गवर्नर मेन्यू वासलो डे सिल्वा ने औपचारिक रूप से समर्पण पत्र पर हस्ताक्षर किए। रात लगभग साढ़े आठ बजे इस समर्पण के साथ ही गोवा में 450 सालों से चले आ रहे पुर्तगाली शासन का अंत हो गया। इस समर्पण के बाद गोवा, दमन और दीव भारत का हिस्सा बन गए। भारत ने इन्हें धीरे-धीरे अपने प्रशासन और कानून व्यवस्था में समाहित किया। गोवा को 30 मई 1987 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और यह भारत का 25वां राज्य बना।’

यह भी पढ़ें- भारत की आजादी के 14 साल बाद गोवा को मिली मुक्ति, यह कहानी हर भारतीय को जाननी चाहिए

Topics: Goa merger with IndiaGoa Portuguese ruleऑपरेशन विजयपुर्तगाली शासन का अंतगोवा मुक्ति दिवसगोवा पर पुर्तगाल का कब्जाGoa Liberation Dayभारत और पुर्तगाल संघर्षOperation Vijay 1961गोवा मुक्ति 1961Operation Vijayभारतीय सेना ऑपरेशन विजयHistory of GoaGoa Liberation Day 2025RSSगोवा मुक्ति आंदोलनGoa Liberation War
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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