'धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला सोची समझी साजिश' : SIT ने शिकायतकर्ता समेत 6 एक्टिविस्ट को बनाया आरोपी
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‘धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला सोची समझी साजिश’ : SIT ने शिकायतकर्ता समेत 6 एक्टिविस्ट को बनाया आरोपी

3900 पन्नों की एसआईटी रिपोर्ट केस के सभी पहलुओं की जांच के बाद कोर्ट में जमा की गई, जिसमें मुख्य आरोपी-गवाह (पूर्व सफाई कर्मचारी) चिन्नैया के बदले हुए बयान भी शामिल हैं।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Dec 11, 2025, 03:10 pm IST
inभारत, कर्नाटक
Dharmasthala Despute

प्रतीकात्मक तस्वीर

कर्नाटक के धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन को क्लीन चिट देते हुए ​पूरे मामले को एक सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने क​​हा कि यह पूरा मामला धर्मस्थल विरोधी कार्यकर्ताओं ने गढ़ा था। विशेष जांच दल ने बेलतंगडी कोर्ट में अपनी शिकायत रिपोर्ट सौंप दी है।

एसआईटी ने अदालत से जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा है। इस मामले में शिकायतकर्ता-गवाह समेत छह लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिसमें चिन्नैया, महेश शेट्टी टिमरोडी, गिरीश मट्टननावर, जयंत, विट्ठल गौड़ा और सुजाता भट्ट शामिल हैं। जांच में पाया गया कि आरोपियों को झूठे बयान देने के लिए पैसे दिए गए, उन पर दबाव डाला गया और उन्हें ट्रेनिंग दी गई। एसआईटी ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है। विशेष जांच दल के मुताबिक, टिमरोडी के घर पर साजिश की मीटिंग हुई थी। जांच में वीडियो क्लिप, बैंक ट्रांजैक्शन के सबूत, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और गवाहों के बयान मिले हैं।

3900 पन्नों की शिकायत रिपोर्ट कोर्ट में जमा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3900 पन्नों की एसआईटी रिपोर्ट केस के सभी पहलुओं की जांच के बाद बेलतंगडी कोर्ट में जमा की गई, जिसमें मुख्य आरोपी और गवाह सफाई कर्मचारी चिन्नैया के बदले हुए बयान भी शामिल हैं। आरोप है कि धर्मस्थल को निशाना बनाने के लिए सामूहिक कब्रों की झूठी कहानी गढ़ी गई। इस बीच, बीजेपी नेता बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा है कि यह पूरी साजिश अर्बन नक्सलियों और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी लोगों ने रची थी। उन्होंने आगे कहा कि बुरुडे गैंग, जिसने धर्मस्थल पर आरोप लगाए थे, अब एसआईटी की चार्जशीट में उसका नाम आ रहा है। इससे पहले इस वर्ष अगस्त में विजयेंद्र ने इसे धर्मस्थल मंदिर और उसकी आस्था पर साजिश करार दिया था।

कब शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक गुमनाम शिकायतकर्ता (पूर्व सफाईकर्मी) ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराते हुए दावा किया कि उसे साल 1995 से 2014 तक महिलाओं और नाबालिगों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 211(ए) के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद एसआईटी की ओर से चिन्हित स्थलों पर इस वर्ष 29 जुलाई से खुदाई का कार्य शुरू किया गया था। शिकायतकर्ता ने पहले धर्मस्थल स्नान घाट के पास और जंगल के अंदर 13 संभावित दफन स्थलों की पहचान की थी। हालांकि, जैसे-जैसे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच बढ़ी तो उन्हें इस कहानी को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया था कि उत्खनन में सहायता के लिए उन्होंने जीपीआर या पर्वतीय रडार प्रणालियों का उपयोग भी किया था। इसके बावजूद उनके हाथ कोई सुराग नहीं लगा। फिर एसआईटी ने 23 अगस्त 2025 को झूठी गवाही देने के आरोप में मुखबिर को गिरफ्तार कर लिया और मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि उस व्यक्ति ने अपना जुर्म कबूल किया कि टिमरोडी और दूसरे एक्टिविस्टों ने उसे झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया था।

एसआईटी पर परेशान करने का आरोप

बताया जाता है कि जैसे ही जांच एक्टिविस्टों पर फोकस हुई, वे तुरंत पूरे मामले को खारिज करवाने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट चले गए। उनका तर्क है कि पुलिस ने शुरू से ही एक टेक्निकल गलती की है। उनका दावा है कि पुलिस ने मामला दर्ज करने से पहले मजिस्ट्रेट से सही इजाजत नहीं ली, जो उनके अनुसार इस तरह के संज्ञेय अपराध के लिए जरूरी था। उन्होंने यह भी शिकायत की कि एसआईटी द्वारा उन्हें परेशान किया। जांच में यह भी सामने आया है कि ये वही आरोपी एक्टिविस्ट हैं, जिन्होंने पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कैंपेन किया था। एसआईटी ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी है। अगर उन्हें इसकी मंजूरी मिल जाती है, तो उनकी गिरफ्तारियां किसी भी समय हो सकती हैं। वहीं, बेलतंगडी की एडिशनल सिविल कोर्ट ने धर्मस्थल मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा सौंपी गई शिकायत रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के आदेश के लिए 26 दिसंबर की तारीख तय की है।

Topics: SITkarnatakaDharmasthala Mass Burial CaseKarnataka Dharmasthala Mass Burialधर्मस्थल सामूहिक दफन मामलाकांग्रेसकर्नाटक
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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