VHP की दो दिवसीय बैठक : मंदिर नियंत्रण और बढ़ते कन्वर्जन पर हुआ विचार, दिल्ली ब्लास्ट पर संतों ने व्यक्त की चिंता
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VHP की दो दिवसीय बैठक : मंदिर नियंत्रण और बढ़ते कन्वर्जन पर हुआ विचार, दिल्ली ब्लास्ट पर संतों ने व्यक्त की चिंता

दिल्ली के पंजाबी बाग में VHP केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल बैठक में संतों ने जिहादी मानसिकता, कट्टरपंथ और बंगाल में चरमपंथी रेटोरिक के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की मांग की।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Dec 10, 2025, 05:38 pm IST
inभारत, दिल्ली

नई दिल्ली । देश की राजधानी इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में स्थित बाबा नत्था सिंह वाटिका में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की द्विदिवसीय बैठक हुई। बैठक के आरंभ में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी ने हिंदू समाज के समक्ष वर्तमान चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों के मार्ग दर्शन का आग्रह किया।

VHP केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल बैठक में देश भर से आये हुए हिन्दू समाज के विभिन्न पंथों के 225 वरिष्ठ संतों ने भाग लिया। बैठक में हिंदू मंदिरों का राज्य नियंत्रण, धार्मिक मतांतरण में वृद्धि, और विकासशील कट्टरपंथ और हिंसा पर गहन चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता और उद्घाटन सत्र

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने की। VHP अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मार्गदर्शन के मुख्य बिंदु प्रस्तुत किए, जिसमें हिंदू मंदिरों से सरकारी नियंत्रण समाप्त करना और धार्मिक स्वतंत्रता कानूनों का समान रूप से पालन शामिल था।

धार्मिक अल्पसंख्यक को परिभाषित किया जाए

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि भारत के संविधान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं। यह आश्चर्य की बात है कि संविधान में धार्मिक अल्पसंख्यक की कोई परिभाषा नही दी गई है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 में केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी धर्म को अल्पसंख्यक घोषित कर दे।

उन्होंने कहा- केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल का सुनिश्चित मत है कि धार्मिक अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित किया जाए। इसमें यह भी विचार करना होगा कि क्या कोई धर्म ऐसा है जिसके मतावलम्बियों को धर्म के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव सहन करना पड़ा हो। इस बात की भी पड़ताल होनी चाहिए कि क्या किसी धर्म के अनुयायी बाकी समाज से किसी भी क्षेत्र में पिछड़ गए है।

उन्होंने कहा- यह तो मानना पड़ेगा कि भारत में किसी भी काल में मुस्लिम और ईसाई मत को मानने वाले लोगों को धर्म के आधार पर कभी कोई उत्पीड़न या भेदभाव सहन नही करना पड़ा। वह बाकी समाज से पीछे नही है। 2011 की जनगणना के अनुसार मुसलमानों की आबादी 14% से ज्यादा थी, यह कहा जा रहा है कि अभी यह आबादी 18 से 20% तक हो गयी है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हमारा संविधान धर्म के आधार पर किसी भी भेदभाव को अस्वीकार करता है।

क्या ऐसे में भारत में धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक बनाये रखना उचित होगा?

आलोक कुमार ने आगे बताया कि केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल का मनना है कि इस विषय पर बहस होनी चाहिए जिससे हम एक योग्य निर्णय पर पहुंच सकें।

जिहाद की जड़ें गरीबी में नही, कट्टर धर्मान्धता में है

विहिप अध्यक्ष ने बताया कि केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में चर्चा हुई कि हाल में लालकिले पर हुए बम विस्फोट की जांच में हमलावर गरीब या पिछड़े नही थे। बल्कि पढे-लिखे, उच्च आयवर्ग के और सामाजिक रूप से सुप्रतिष्ठित लोग पाए गए। यह भी पाया गया कि एक विश्वविद्यालय में जिहादियों की भर्ती, उनमें आधुनिक माध्यमों से कट्टरता भरना और आतंकवादी कार्यवाहियों के प्रशिक्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पर विश्व से आतंकवादियों को धन उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने कहा- जिहादी मानसिकता केवल कानून और व्यवस्था का विषय नही है। इस्लाम का एक वर्ग जिहाद करना अपना मजहबी कर्तव्य मानता है और इसमे धोखा, लूट, अपहरण और नृशंस हत्याओं को स्वीकार करता है। लोकतंत्र और वैचारिक आजादी के इस युग में जिहाद की ऐसी मानसकिता को कोई स्थान नही है। विश्व में शांति बनाये रखने के लिए ऐसी जिहादी प्रवृति का वैचारिक, सामाजिक एवम कानूनी स्तर पर कठोर प्रतिरोध अनिवार्य है।

न्यायालयों पर दवाब बनाने की निंदा

विहिप अध्यक्ष ने कहा कि तमिलनाडु उच्च न्यायालय के जज श्री जी आर स्वामीनाथन पर हिन्दू हित का निर्णय देने पर डीएमके और शिवसेना उद्धव गुट के सहयोग से उन्हें हटाने के लिए संसद में महाभियोग लाने के प्रस्ताव की चर्चा हुई। जबकि किसी न्यायाधीश के निर्णय के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। पर महाभियोग लाना तो न्यायपालिका पर अनुचित दवाब बनाने का प्रयत्न है। इसकी निंदा की जानी चाहिए।

लाल किला बम ब्लास्ट पर व्यक्त की चिंता

बता दें कि केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में बंगाल से पधारे पूज्य संतों ने राज्य में हिंदू समाज की स्थिति और जिहादियों के बढ़ते अत्याचार, धमकियों और आक्रमणों पर चिंता व्यक्त की। अखिल भारतीय संत समिति के महा मंत्री पू. श्री जितेन्द्रानंद सरस्वती जी ने दिल्ली में आतंकी हमले और आतंकियों के अड्डे अल फलाह विश्वविद्यालय जैसों के कुकृत्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए देश को आतंकीयों और उनके पैरोकारों से मुक्त कराने का आग्रह किया।

उन्होंने मंदिरों के सरकारी कुप्रबंधन और भगवान् की संपत्ति पर कथित सेक्युलर सरकारों द्वारा डाले जा रहे डाके का विवरण देते हुए मंदिरों को सरकारी अधिग्रहण से मुक्त कराने पर भी जोर दिया।

प्रमुख मुद्दे : धार्मिक मतांतरण और कट्टरपंथ

बैठक में बढ़ते धार्मिक कन्वर्जन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर चर्चा हुई। संतों ने जिहादी मानसिकता, कट्टरपंथ और हिंसा के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की और बंगाल में चरमपंथी रेटोरिक के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

सामाजिक पहल और सांस्कृतिक संस्थानों को सुदृढ़ करना

बैठक में सीमा क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं, नशामुक्ति पहल, और गुरुकुल, गुरु परंपरा, आश्रम और सांस्कृतिक संस्थानों को मजबूत करना जैसे विषयों पर जोर दिया गया। संतों ने कहा कि यह सभी कदम सनातन समाज को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

जनगणना में हिंदू पहचान सुनिश्चित करना

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी जनगणना में सभी हिंदुओं को ‘हिंदू’ के रूप में अंकित किया जाए, ताकि हिंदू पहचान और सांस्कृतिक अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।

सुरक्षा और कानून

संतों ने कठोर आतंकवाद विरोधी कानून लागू करने की आवश्यकता बताई, जिससे हिंदू समाज की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और बढ़ते धार्मिक उग्रवाद को रोका जा सके।

Topics: Delhi Newsalok kumarreligious conversionVHP MeetingHindu Temple AutonomyHindu SecurityJagadguru VasudevanandaSanatan Society
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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