संस्कृत ज्ञान लेने वाराणसी पहुंचा रूसी प्रतिनिधिमंडल, कहा- 'भारत को जानने के लिए देववाणी संस्कृत को समझना होगा''
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संस्कृत ज्ञान लेने वाराणसी पहुंचा रूसी प्रतिनिधिमंडल, कहा- ‘भारत को जानने के लिए देववाणी संस्कृत को समझना होगा”

रूसी प्रतिनिधिमंडल, जो रूस के काल्मिकिया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. बतिर एलिस्टेव के नेतृत्व में था, ने वाराणसी के सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रमण विद्या संकाय का दौरा किया।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Dec 9, 2025, 07:44 pm IST
in भारत, उत्तर प्रदेश

वाराणसी (हि.स.) । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पिछले सप्ताह भारत के आधिकारिक दौरे पर आया प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को शैक्षणिक यात्रा पर वाराणसी पहुंचा। रूसी दल ने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रमण विद्या संकाय के कार्यक्रम में भागीदारी की। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत और अभिनन्दन किया।

रूस में स्थित काल्मिक यूनिवर्सिटी के कुलपति का स्वागत

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रूस में स्थित काल्मिक यूनिवर्सिटी, काल्मिकिया, एलिस्टा के कुलपति प्रो. बतिर एलिस्टेव ने भी परिसर में आने पर खुशी जताई।

उन्होंने कहा कि यहां आकर भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में सनातन धर्म संस्कृति को जानने की उत्सुकता की पूर्ति हुई। दुनियां के प्राचीन शहर काशी में स्थित इस प्राचीन शैक्षणिक संस्था में सुखद अनुभव हुआ। यदि भारत को जानना है तो देववाणी संस्कृत के अन्दर निहित ज्ञानराशि को समझना होगा। यहीं भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं भारतीयता का संपूर्ण सार है।

कुलपति प्रो. शर्मा का संदेश

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि आज विश्व में दो विद्वत शक्ति (भारत व रूस) मिलकर मानवता एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने तथा विश्व को मानवता के पथ पर ले चलने के लिए वचनबद्ध हैं। रूस, भारत के साथ सात दशक से निरन्तर नि:स्वार्थ भाव से सहोदर भ्राता के रूप में मैत्री परम्परा को आगे बढ़ाते हुए अहर्निश खड़ा हैं।

प्रो. शर्मा ने कहा कि रूसी प्रतिनिधिमंडल की शैक्षणिक यात्रा दो संस्कृतियों का स्पंदन है। जहां उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा और सनातन धर्म संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह संस्था भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थापित है। यह भारत की आत्मा का साक्षात्कार है। जो भारतीय संस्कृति और ज्ञान परम्परा को विश्वभर में प्रसारित किया जा रहा है।

संकायाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद का वक्तव्य

श्रमण विद्या संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद ने कहा कि आज रूसी प्रतिनिधिमंडल ने पाली एवं संस्कृत के परस्पर गूढ़ रहस्यों के साथ दोनों देश की संस्कृतियों को समझा।

Topics: Sanatan DharmaIndian knowledge traditionRussian Delegation IndiaVaranasi Sanskrit UniversitySamprapti Vidya FacultyProf. Bihari Lal SharmaProf. Batir ElistevCultural Exchange India RussiaSanskrit StudiesInternational Academic Visit
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