पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूं कबीर ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह मुर्शिदाबाद जिले में 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम से एक मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। इस बयान के सामने आते ही राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ गया है और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी क्रम में राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सरकार से कहा है कि इस पूरे मामले पर कड़ी नजर रखी जाए और किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद को रोकने के लिए पहले से ही आवश्यक कदम उठाए जाएं। राज्यपाल का कहना है कि माहौल को खराब करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जरूरत पड़े तो प्रशासन एहतियाती तौर पर लोगों को हिरासत में भी ले सकता है।
राज्यपाल के कार्यालय की ओर से यह भी बताया गया कि वह इस घटना को लेकर काफी चिंतित हैं। उनके अनुसार, जब एक सार्वजनिक प्रतिनिधि किसी विवादित नाम के साथ ऐसा कार्यक्रम घोषित करता है, तो यह समाज में तनाव पैदा कर सकता है। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि स्थिति को बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित किया जाए।
क्यों बढ़ा विवाद- कबीर ने पिछले महीने यह घोषणा की थी कि वह अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर ही मस्जिद का निर्माण करना चाहते हैं। यह घोषणा इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि 6 दिसंबर 1992 ही वह दिन है, जब कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी थी। हालाँकि विधायक कबीर टीएमसी से हैं लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने खुद को इस बयान से दूर कर लिया है। पार्टी ने कहा है कि यह कबीर का व्यक्तिगत फैसला है और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं। वहीं, भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर टीएमसी पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो रही है।

















