जनता के पैसों से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे नेहरू, सरदार पटेल ने किया था विरोध: राजनाथ सिंह
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जनता के पैसों से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे नेहरू, सरदार पटेल ने किया था विरोध: राजनाथ सिंह

नेहरू ने पटेल की मृत्यु के बाद उनका स्मारक बनाने के लिए जनता की ओर से एकत्रित धन का उपयोग कुओं और सड़कों का निर्माण करने के लिए बेतुका सुझाव दिया था।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Dec 3, 2025, 01:53 pm IST
inभारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जनता के पैसों (सार्वजनिक धन) से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनकी इस योजना को सफल नहीं होने दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेहरू ने पटेल की मृत्यु के बाद उनका स्मारक बनाने के लिए आम लोगों की ओर से एकत्रित धन का उपयोग कुओं और सड़कों का निर्माण करने के लिए बेतुका सुझाव दिया था। केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार (2 दिसंबर) को सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में वडोदरा के निकट साधली गांव में आयोजित ‘एकता मार्च’ के तहत एक सभा को संबोधित करते हुए ये दावे किए।

सरदार पटेल ने पब्लिक फंड से बाबरी मस्जिद नहीं बनने दी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए पटेल को एक सच्चा उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति बताया, जिन्होंने कभी भी तुष्टीकरण में विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा, “जवाहरलाल नेहरू पब्लिक फंड से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे। अगर किसी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, तो वह गुजराती मां के बेटे सरदार वल्लभभाई पटेल थे। उन्होंने पब्लिक फंड से बाबरी मस्जिद नहीं बनने दी।”

सोमनाथ मंदिर के कार्य पर सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया

उन्होंने कहा कि जब नेहरू ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को पुनर्स्थापित करने का मुद्दा उठाया, तो पटेल ने स्पष्ट किया कि मंदिर एक अलग मामला है क्योंकि इसके सौंदर्यीकरण के लिए आम लोगों द्वारा 30 लाख रुपये दान किए गए थे। सिंह ने आगे कहा, “एक ट्रस्ट बनाया गया था और सोमनाथ मंदिर के कार्य पर सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया। इसी तरह, सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए एक भी रुपया नहीं दिया। पूरा खर्च देश की जनता ने उठाया। इसे ही असली धर्मनिरपेक्षता कहते हैं।”

कुछ राजनीतिक ताकतों ने पटेल की विरासत मिटाने की कोशिश की

राजनाथ सिंह ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू 1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष तब बने जब महात्मा गांधी की सलाह पर सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने दावा किया, “1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव होना था। कांग्रेस कमेटी के अधिकांश सदस्यों ने वल्लभभाई पटेल के नाम का प्रस्ताव रखा, लेकिन जब गांधीजी ने पटेल से अनुरोध किया कि वे नेहरू को अध्यक्ष बनने दें और अपना नामांकन वापस ले लें, तब पटेल ने तुरंत अपना नाम वापस ले लिया।” सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने पटेल की विरासत को मिटाने की कोशिश की थी। सरदार पटेल प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन उन्हें कभी किसी पद की लालसा नहीं की। नेहरू के साथ वैचारिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने उनके साथ काम किया। उन्होंने आगे यह भी कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका ने पटेल को इतिहास के पन्नों में एक चमकते सितारे के रूप में फिर से स्थापित किया।”

Topics: जवाहरलाल नेहरूRajnath Singhराजनाथ सिंहबाबरी मस्जिदBabri MasjidRajnath Singh claims Jawaharlal NehruNehru build Babri Masjid
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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