दिल्ली दंगों में मारे गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के परिवार का कहना है कि उनके बेटे को सिर्फ हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया। उनके कुछ मुस्लिम दोस्त भी हत्यारों के साथ शामिल हो गए। लगभग छह साल बाद कोर्ट ने इस मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया है। फैसले से परिवार को कुछ राहत मिली है, लेकिन उनका दर्द अब भी उतना ही ताजा है।
अंकित शर्मा 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में मारे गए थे। उस समय पूरे इलाके में सांप्रदायिक हिंसा फैली हुई थी, जिसमें कुल 53 लोगों की मौत हुई। अंकित का परिवार अब खजूरी खास के अपने पैतृक घर में नहीं रहता। सुरक्षा की चिंता और पुरानी यादों के बोझ के कारण वे दंगों के तुरंत बाद ही वहां से चले गए थे।
अंकित शर्मा के साथ क्या हुआ था
25 फरवरी 2020 को अंकित घर का सामान लेने के लिए निकले थे। उसके बाद वे लापता हो गए। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने उन्हें अगवा कर लिया, उनकी हत्या कर दी और शव को नाले में फेंक दिया। अगली सुबह उनका शव नाले से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि अंकित को 52 बार चाकू से गोदा गया था। परिवार के लिए ये सब सुनना और याद करना बहुत मुश्किल रहा।
परिवार का आरोप
अंकित के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि उनके भाई को हिंदू होने के कारण ही मारा गया। अंकुर ने एक इंटरव्यू में बताया, “मेरा भाई देश के लिए बलिदान दिया है। उसकी हत्या के सभी आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए।” अंकुर आगे कहते हैं कि हर गली पार करते समय, हर नाला देखते समय पुरानी घटना याद आ जाती थी। दिल बहुत भारी हो जाता था। इसलिए परिवार ने उस जगह से निकलकर किराए के मकान में रहना शुरू कर दिया।
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अंकित का स्वभाव
परिवार के अनुसार अंकित मिलनसार इंसान थे। वे हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों से अच्छे संबंध रखते थे। उनके मन में किसी के प्रति भेदभाव नहीं था। लेकिन जब हमला हुआ तो उनके कुछ मुस्लिम दोस्त भी हत्यारों के साथ हो गए। ये बात परिवार को और भी ज्यादा दुखी करती है।
परिवार की हालत
अंकित की मौत का परिवार पर गहरा असर पड़ा है। उनके माता-पिता हाई ब्लड प्रेशर से परेशान हैं। जब भी दंगों या इस मामले की चर्चा होती है, वे तनाव में आ जाते हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें पूरा न्याय तब मिलेगा जब सभी दोषियों को फांसी या सबसे ज्यादा सजा दी जाएगी।
सोमवार को कोर्ट ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नजीम, कासिम और समीर खान को दोषी करार दिया। ये फैसला जज प्रवीण सिंह की अदालत ने सुनाया। अंकित की मौत के छह साल बाद भी परिवार के जख्म नहीं भरे हैं। वे रोजाना पुरानी यादों से जूझते हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

















