कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक और बड़ा संगठनात्मक झटका सामने आया है। राज्य के पूर्व मंत्री और सात बार के वरिष्ठ विधायक मानस भुइयां ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना आधिकारिक इस्तीफा पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को भेज दिया है।
इस्तीफे में उन्होंने पार्टी की वर्तमान दिशा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मानस भुइयां का जाना तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक संकट को और गहरा कर सकता है।
“व्यक्तिगत आरोप नहीं, वैचारिक मतभेदों के कारण लिया फैसला”
मानस भुइयां ने अपने त्यागपत्र में किसी व्यक्तिगत नेता या नेतृत्व पर सीधा आरोप लगाने से परहेज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह बड़ा फैसला पूरी तरह से वैचारिक और सैद्धांतिक कारणों से लिया गया है।
रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए वरिष्ठ नेता ने अपनी भावी योजनाओं और इस्तीफे के कारणों को स्पष्ट किया:
“जिन राजनीतिक मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों के कारण मैंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था, पार्टी अब धीरे-धीरे उन मूल विचारों से दूर होती जा रही है। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं राजनीति से संन्यास नहीं ले रहा हूँ। मैं सार्वजनिक जीवन में पहले की तरह ही पूरी तरह सक्रिय बना रहूँगा।”
हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे उनके अगले राजनैतिक कदम या किसी अन्य दल में शामिल होने के विषय में पूछा, तो उन्होंने अपनी रणनीति को गुप्त रखते हुए फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।
ऐसा रहा है मानस भुइयां का लंबा राजनीतिक सफर
मानस भुइयां पश्चिम बंगाल की राजनीति के बेहद मँझे हुए और कद्दावर चेहरों में गिने जाते हैं। उनके राजनीतिक सफरनामे के मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
- क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: उन्होंने पश्चिम बंगाल के अविभाजित जेएन क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया है और क्षेत्र की जनता के बीच उनकी गहरी पैठ है।
- कांग्रेस में शीर्ष पद: तृणमूल में आने से पहले वे लंबे समय तक कांग्रेस में रहे। इस दौरान वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (State President) और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) जैसे अति-महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे।
- 2016 में थामा था TMC का दामन: वर्ष 2016 के राजनैतिक घटनाक्रमों के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
- संगठन और सरकार में भूमिका: टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी संगठन को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनकी वरिष्ठता को देखते हुए बाद में उन्हें राज्य मंत्रिमंडल (Cabinet) में भी शामिल किया गया था।
चुनाव में हार के बाद TMC में गहराया आंतरिक संकट!
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानस भुइयां जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता का इस मोड़ पर पार्टी छोड़ना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।
उनका यह इस्तीफा ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस लगातार गंभीर आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझ रही है। पिछले कुछ समय से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं, जमीनी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच पनप रहे तीव्र असंतोष की खबरें लगातार गलियारों में तैर रही हैं। मानस भुइयां के इस्तीफे ने तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति और भावी राजनीतिक जमीन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।











