पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने गुंडा दमन एक्ट लागू कर दिया है। इस कानून के लागू होने से संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगेगी। इस कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अगर सरकारी सम्पति को नुकसान करता है तो उसकी संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान है। इसके अलावा पुलिस को अधिकार होगा कि वह बिना मुकदमा के आरोपी को 12 महीने की हिरासत में रख सकता है। यह कानून मुख्य रूप से जबरन वसूली, अवैध खनन, भूमाफिया, साइबर अपराध, दंगे और खासतौर पर पैसों की धोखाधड़ी जैसे जो संगठित अपराध को रोकने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।
अब असामाजिक तत्वों की खैर नहीं
इस कानून से पश्चिम बंगाल ली सरकार असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई के ही दंगा हिंसा पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ प्रहार करेगी। असामाजिक तत्वों के द्वारा सरकारी नुकसान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के तहत संपत्ति कुर्क हो सकती है। इस कानून के तहत खतरनाक अपराधी को जिला बदर करने का भी प्रावधान है।
इस कानून के तहत जबरन वसूली,अवैध खनन और मानक तस्करी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान हैं। कोई व्यक्ति ऐसे गुंडों को शरण देता है या मदद करता हैं उनको तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
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जीरो FIR राज्य में सख्ती से लागू
दरअसल बंगाल में जीरो एफआईआर अब सख्ती लागू किया जा रहा है। कोई भी पीड़ित किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। थाना बहाना नहीं बना सकते हैं कि उनके क्षेत्र का मामला नहीं है। सबसे पहले जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद अपराध क्षेत्र से संबंधित थाना को पूरी जानकारी भेजी जाएगी। ऐसे में जो क्षेत्र अधिकार के चक्कर में पीड़ित क्षेत्र विवाद भटकते रहते थे कि आखिर शिकायत कहाँ दर्ज़ करवाए। इसके साथ ही जो दोनों थानों के जो थाना प्रभारी को मामले की जानकारी दी जाएगी।
शिकायतकर्ता को मिलेगी FIR की कॉपी
शिकायतकर्ता को एफआईआर से जुड़ा हुआ अपडेट मिलेगा कि उनकी शिकायत की जो कार्रवाई है, कहां तक पहुंची है। पीड़ित व्यक्ति को जांच की प्रगति से पूरा अवगत कराया जाएगा। नए थाने के थाना प्रभारी का नंबर भी पीड़ित को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे कि वह अपने मामले से जुड़ी हुई सारी नई जानकारी थाना प्रभारी से प्राप्त कर सकता है। सरकार के इस कदम के जरिए सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि पीड़ित जो थानों के चक्कर लोग काटते थे वो कम हो जाएगा। इस कानून का ये भी एक बड़ा मकसद है। जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच में देरी होने पर अधिकारी को जवाब देना होगा। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर तुरंत जांच करना भी इस कानून का मकसद हैं ।











