पाञ्चजन्य द्वारा आयोजित ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र के क्षेत्रीय संघचालक पूर्णेन्दु जी ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल उत्साहजनक है बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय भी है।
पूर्णेन्दु जी ने कहा कि लंबे समय तक बस्तर आतंक और भय का पर्याय बनकर रह गया था, लेकिन आज वहां परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। यह परिवर्तन का समय है, और इसी समय समाज को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी। बस्तर के लोगों ने हिंसा और अशांति के कारण जो बहुमूल्य समय खोया है, उसकी पूर्ति के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। विकास की इस यात्रा को निरंतर गति देने के लिए समाज का सहयोग अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कोई भी परिवर्तन तभी स्थायी होता है जब लोग स्वयं उसमें सहभागी बनते हैं।
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उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठजन और विशिष्ट अतिथियों- रामदत्त जी, अरविंद नेताम जी एवं अन्य वक्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अनुभव बस्तर के भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। पूर्णेन्दु जी ने कहा कि समाज में चल रहे बदलावों को समझना, उन्हें आत्मसात करना और भविष्य की योजनाएँ बनाकर उन्हें जमीन पर लागू करना ही वास्तविक सफलता है। इस यात्रा में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है, और हम सभी को बस्तर की नई दिशा तय करने में सक्रिय रूप से सहभागी होना चाहिए। उन्होंने ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ में शामिल सभी लोगों का अभिनंदन किया और आशा व्यक्त की कि यह संवाद बस्तर के उज्ज्वल, आत्मनिर्भर और शांतिपूर्ण भविष्य की आधारशिला साबित होगा।
















