कुरुक्षेत्र में स्थापित ‘पाञ्चजन्य’ शंख जानिये किसने बनाया, क्या है खासियत
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कुरुक्षेत्र का ‘पाञ्चजन्य’ शंख किसने बनाया, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, जानिये क्या है खासियत

यह स्मारक न केवल ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारतीय सभ्यता और इसकी निरंतर प्रगति का भी प्रतीक है, जो देश की गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले गया है।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Nov 28, 2025, 09:31 pm IST
inहरियाणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के दौरान 25 नवंबर को भगवान कृष्ण के पवित्र शंख पर आधारित ‘पाञ्चजन्य’ स्मारक का उद्घाटन किया। तब से यह शंख भक्तों और विजिटर्स के बीच खासा चर्चा में है। ‘पाञ्चजन्य’ स्मारक में इस शंख का निर्माण दुनिया की सबसे ऊंची भगवान शंकर और रामजी की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत ने किया है। उन्होंने इसे अपने करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक कलाओं में से एक बताया है।

उन्होंने कहा, “एक शिल्पकार की दृष्टि से व्याख्या करूं तो गुरुग्राम की जिस शिल्पशाला में हमने ‘पाञ्चजन्य’ शंख को तैयार किया, उसकी समस्त प्रक्रियाओं की परीक्षा भी इस परियोजना के दौरान अच्छे से हो गई। यह परियोजना मेरे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रेरक रही। लगभग 6.2 टन वजनी इस धातु शिल्प के निर्माण में डिजाइनिंग, 3-डी मॉडलिंग, कास्टिंग, असेंबलिंग और फिनिशिंग सहित कई जटिल चरण थे। इसका निर्माण मेरे लिए सपने का पूरा होने जैसा था। इसमें तकनीकी चुनौतियां भी आईं, लेकिन देव कृपा से उनका समाधान भी निकला।”

श्रीकृष्ण की विराट सत्ता का प्रतीकात्मक रूप

युवाओं को हमेशा इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने वाले मूर्तिकार के शब्दों में, “एक प्रकार से यह कार्य मेरी शिल्प साधना की कसौटी भी रहा, जिससे मेरे अंदर का कलाकार, सर्जक, विचारक थोड़ी और ऊर्जा पा सका, थोड़ा और परिपक्व हो सका। इस स्मारक की सबसे बड़ी विशेषता है- आभामंडल, जो विशेष रूप से ग्लोब के चारों ओर डिजाइन किया है। यह आभामंडल केवल एक सजावटी नहीं, बल्कि दिव्य प्रकाश, ऊर्जा प्रवाह और श्रीकृष्ण की विराट सत्ता का प्रतीकात्मक रूप है। एलईडी लाइटिंग से सुसज्जित यह आभामंडल रात के समय स्मारक को दिव्य तेज प्रदान करता है। जब रोशनी प्रस्फुटित होती है, तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे ‘पाञ्चजन्य’ शंख स्वयं धर्मयुद्ध का शंखनाद करने के लिए पुन: प्रकाशित हो गया हो।

स्मारक का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

नरेश कुमावत ने आगे यह भी कहा कि इस दिव्य ‘पाञ्चजन्य’ स्मारक का साकार होना भारत की संस्कृति, आधुनिक तकनीक, कलाकारों की प्रतिबद्धता और कुशल प्रशासन के संयोजन का श्रेष्ठ उदाहरण है। इस परियोजना की अवधारणा से लेकर प्रधानमंत्री द्वारा भव्य लोकार्पण तक की पूरी प्रक्रिया समर्पण, टीमवर्क, उत्कृष्ट कला-दृष्टि और प्रभावी नेतृत्व का सशक्त प्रमाण है। यह स्मारक न केवल ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारतीय सभ्यता और इसकी निरंतर प्रगति का प्रतीक भी है, जो देश की गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले गया है।

Topics: श्रीकृष्ण शंखप्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावतहरियाणाकुरुक्षेत्रपाञ्चजन्य विशेषPanchajanya conchनरेश कुमावतपाञ्चजन्य स्मारकPanchajanya conch shell installed in KurukshetraNaresh Kumar Kumawat
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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