बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रचंड जीत के बाद 20 नवंबर को नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही नई सरकार के 27 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। भाजपा की ओर से एक बार फिर सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। नए मंत्रिमंडल में भाजपा से 14, जदयू से नौ, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं।
भाजपा के डॉ. दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, नितिन नवीन, रामकृपाल यादव, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र रोशन, श्रेयसी सिंह, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद और डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। जदयू से विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी, विजेंद्र यादव, अशोक चौधरी, सुनील कुमार और जमा खान मंत्री बनाए गए हैं।
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली। दीपक प्रकाश अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। नियमानुसार उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा।
मंत्रिमंडल में सामाजिक और जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है। भाजपा ने रामकृपाल यादव को मंत्री बनाकर उन्हें ‘पुरस्कार’ दिया है। बता दें कि रामकृपाल कभी लालू यादव के विश्वस्त हुआ करते थे। बाद में भाजपा में शामिल हुए और सांसद बने। 2024 में वे संसदीय चुनाव हार गए थे।
इस बार उन्हें यादव-बहुल दानापुर क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा गया था। उन्हें हराने के लिए लालू यादव बीमार होते हुए भी दानापुर पहुंचे थे और लोगों से राजद प्रत्याशी रीतलाल राय को जिताने की अपील की थी। लेकिन वहां के मतदाताओं ने उनकी अपील को ठुकरा कर रामकृपाल को समर्थन दिया।
नए मंत्रिमंडल में तीन महिलाओं को जगह मिली है। यह कुल मंत्रियों की संख्या का 11 प्रतिशत है। महिला मंत्रियों में रमा निषाद, श्रेयसी सिंह और लेशी सिंह शामिल हैं। रमा निषाद और श्रेयसी सिंह भाजपा की विधायक हैं और पहली बार मंत्री बनी हैं। लेशी सिंह जदयू की विधायक हैं और उन्होंने चौथी बार चुनाव जीता है। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने इस समारोह को और भव्य बना दिया।
जब उन्होंने मंच से गमछा घुमाकर लोगों का अभिवादन किया, तो लोगों ने भी गमछा घुमाकर उनका अभिवादन किया। शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा सहित अनेक भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
इस बार राजग को जितनी बड़ी जीत मिली है, उसके सामने उम्मीदों का उतना ही बड़ा पहाड़ खड़ा है। सबसे बड़ी चुनौती है रोजगार का सृजन करना। बिहार में रोजगार का अर्थ है सरकारी नौकरी। ऐसे में नई सरकार को जल्दी से जल्दी से सरकारी नौकरी की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को और दुरुस्त करने की आवश्यकता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में भी तेजी से कार्य करने की जरूरत है। नई सरकार को ऐसा बिहार बनाना होगा, जहां बाहरी निवेशक भी बेहिचक पूंजी लगाएं और अपना काम कर सकें। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से नई सरकार बिहार के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करेगी।

















