काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकालेश्वर, अयोध्या में राम मंदिर, बाबा केदारनाथ धाम के बाद अब श्री बद्रीनाथ धाम का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस परियोजना के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। बद्रीनाथ मास्टरप्लान डेवलपमेंट पहाड़ों में एक संतुलित, समग्र विकास योजना है जिसका उद्देश्य बद्रीनाथ को धार्मिक, पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टिकोण से एक स्मार्ट, स्वस्थ तीर्थस्थल में बदलना है।
481 करोड़ के बद्रीनाथ मास्टर प्लान में बद्रीनाथ नगरी को एक स्मार्ट आध्यात्मिक सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत मंदिर परिसर के पुनर्गठन, जाम कम करने के उपाय, पर्यावरण संरक्षण, सड़क, पैदल मार्ग और सार्वजनिक उद्यानों का विकास शामिल है।परियोजना के तहत अलकनंदा नदी के किनारे एक नदीफ्रंट और प्लाज़ा का निर्माण, बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है। मास्टरप्लान में भूमि उपयोग और भवन निर्माण नियमों के कड़ाई से पालन, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और भूकंपीय सुरक्षा उपाय भी शामिल किए गए हैं।
इस योजना के तहत स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर अनुभव प्रदायन पर विशेष ध्यान दिया गया है। अगले 50 सालों में तीर्थ यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए परियोजना का भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, जो 85 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मास्टर प्लान में बद्री नगरी के बाजार को व्यवस्थित किया जा रहा है,ताकि श्रद्धालुओं को स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के लिए आकर्षित हो सकें।
इसका एक फायदा और होने जा रहा है कि धाम परिसर तक जाने वाला मार्ग भी चौड़ा हो जाएगा।श्रद्धालुओं के रहने के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा रही है।आने वाले समय में रेल प्रोजेक्ट के कर्ण प्रयाग तक पहुंच जाने उसके बाद द्वितीय फेस में और आगे रेल पहुंचने की संभावनाओं के मद्देनजर यहां यात्री सुविधाओं को बढ़ाया जाना जरूरी हो गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बताते है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जब जब मुलाकात हुई उन्होंने बद्री केदार धाम के विकास के बारे में जरूर चर्चा हुई। पीएमओ लगातार इस प्रोजेक्ट को देखता रहा है साथ ही हमारी सरकार भी इस पर लगातार समीक्षा कर रही है।वे स्वयं वहां जाकर कार्यप्रगति देखते है। मुख्यसचिव और गढ़वाल आयुक्त भी समय समय पर वहां जाकर कितना काम हो गया उसकी गुणवत्ता क्या है,कितना काम रह गया इस बारे में स्थानीय लोगों की क्या राय है इस पर बराबर संवाद किया जा रहा है।
















