ऑपरेशन के-2: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की नई साजिश, पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश
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होम भारत पंजाब

ऑपरेशन के-2: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की नई साजिश, पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश

ऑपरेशन सिंदूर से घायल पाकिस्तान अब छद्मयुद्ध के जरिए पंजाब में हथियार-ड्रग्स तस्करी और खालिस्तानी आंदोलन को जिंदा करने की साजिश रच रहा है। आईएसआई-बीकेआई का नेटवर्क सक्रिय, जैश की महिला ब्रिगेड का गठन। भारत की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ीं।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Nov 3, 2025, 02:27 pm IST
in पंजाब
Pakistan Shahbaz Sharif Indus water treaty

शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

ऑपरेशन के-2: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से पिटे पाकिस्तान की हालत उस घायल कमजोर सांप की तरह होती दिख रही है जो पलटवार तो करना चाहता है परन्तु उसकी इतनी क्षमता नहीं है। लेकिन दुष्ट अपनी दुष्टता से बाज नहीं आता दिख रहा और वह फिर से ऑपरेशन के-2 को पुनर्जीवित कर भारत में छद्मयुद्ध तेज करने के प्रयास में दिख रहा है। ज्ञात रहे कि पाकिस्तान ऑपरेशन के-2 के नाम पर लम्बे समय से पंजाब में खालिस्तानी व कश्मीर में जिहादी आतंक फैलाता आ रहा है और वर्तमान की घटनाएं इशारा करती हैं कि ‘ना’पाक पाकिस्तान फिर से वही तैयारी कर रहा है।

पंजाब में बढ़ी सामरिक हलचल

पंजाब आज फिर से सामरिक हलचल का केंद्र बनता हुआ दिख रहा है। पंजाब सरकार ने पिछले कुछ समय से ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ चलाया हुआ है। इस अभियान के तहत अब तक गिरफ्तार किए गए नशा तस्करों की संख्या 34,511 तक पहुंच गई है। लाखों-करोड़ों रुपए के नशे पकड़े गए हैं। नशों की तस्करी के साथ-साथ पड़ोसी पाकिस्तान ड्रोन द्वारा हथियारों की तस्करी को भी बढ़ावा दे रहा है। सीमा सुरक्षा बल और पंजाब पुलिस द्वारा पकड़े गए हथियारों संबंधी समाचार दर्शाते हैं कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई आपरेशन सिंदूर के बाद अब भारत से सीधे युद्ध के बजाय छद्मयुद्ध के जरिए पंजाब में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही है।

अपने इस उद्देश्य के लिए कुख्यात गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने गैंगस्टरों, नशा तस्करों और आतंकियों का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया है। इनके सहयोग से आईएसआई ने पंजाब में हथियारों की तस्करी बढ़ा दी है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीमा पार से हो रही हथियारों की तस्करी में इस वर्ष पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल अब तक 362 हथियार बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें आरपीजी, एके 47 राइफलें, ग्रेनेड और इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी ) शामिल हैं। इनमें से एक तिहाई बरामदगियां ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई हैं।

ड्रेन से हथियारों की तस्करी

पिछले वर्ष के दौरान कुल 81 हथियार की बरामद किए गए थे। इसकी पुष्टि पुलिस अधिकारियों ने भी की है। उनके मुताबिक हथियारों की तस्करी में ड्रोन मददगार बन रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अब तक 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें कई तस्कर ऐसे हैं जो ड्रोन के जरिए भेजे गए हथियारों को इकट्ठा करते समय पकड़े गए। वहीं कुछ गिरफ्तार लोग ऐसे हैं जिन पर आतंकियों से सीधे संपर्क का संदेह है। सीमावर्ती जिलों अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और बटाला में तस्करी की गतिविधियां सबसे अधिक हैं।

2022 से लेकर अब तक ज्यादातर बरामदगियां इन्हीं इलाकों में हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये क्षेत्र आईएसआई समर्थित नेटवर्क के लिए सबसे संवेदनशील प्रवेश बिंदु बन गए हैं। आईएसआई इंटरनेट मीडिया के जरिए अलगाववादी प्रचार और पैसे के लालच से युवाओं को तस्करी या हिंसक गतिविधियों की ओर धकेलने में लगी है।

पाक का सीमावर्ती राज्य को लेकर षड्यंत्र

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब व सीमावर्ती राज्यों में आतंक फैलाने के लिए अब पाकिस्तान स्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के साथ मिलकर नापाक साजिश रच रही है। यह पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को फिर से जिंदा करने की कोशिश में है। कई आतंकी संगठन खालिस्तान आंदोलन का हिस्सा हैं। इनमें बीकेआइ, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, खालिस्तान लिबरेशन आर्मी, खालिस्तान टाइगर फोर्स आदि शामिल हैं। बीकेआई ने पाक, कनाडा, पंजाब, जर्मनी व ब्रिटेन में सभी संसाधनों को सक्रिय कर लिया है।

खालिस्तानियों का भर्ती अभियान

खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, पंजाब पुलिस ड्रग तस्करी व ड्रोन गतिविधियों पर लगाम लगाने में व्यस्त है, मगर चिंता की बात यह है कि बड़े पैमान पर भर्ती अभियान शुरू होने वाला है। आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश करते हुए आईएसआई को लगा कि सभी 41 संगठनों को एक छत्रछाया में काम करना चाहिए। इसलिए उसने बीकेआई को एकीकृत आतंकी नेटवर्क की कमान सौंपी है, बाकी उसके अधीन काम करेंगे। हाल के दिनों में बीकेआई ने आईएसआई की मदद से पंजाब में अपने ड्रोन अभियानों को बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य पंजाब में ड्रग्स व गोला-बारूद की तस्करी करना है। ड्रग्स के कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आंदोलन के लिए धन जुटाने के लिए किया जाता है।

अधिकारियों का मानना है कि यूं तो भर्ती अभियान की कवायद लंबे समय से चल रही है। लेकिन, अब इसे गतिरोध भी देखना पड़ रहा है क्योंकि पंजाब में बहुत कम लोग इस विचारधारा से जुड़ते हैं। यहां तक कि पुराने कार्यकर्ता भी 1980 के दशक में देखी गई हिंसा से तंग आ चुके हैं और उन्होंने बच्चों को इस आंदोलन के जाल में न फंसने की सलाह दी है। पाकिस्तान भारत से सीधे किए युद्धों में हार का सामना कर चुका है और उसको ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के बाद स्पष्ट हो गया है कि वह भविष्य में भी भारत के साथ सीधे युद्ध में जीत नहीं सकता। पाकिस्तान अपनी इस हार और अपमान का बदला नशा व हथियारों की तस्करी द्वारा व आतंकी गतिविधियों को बढ़ाकर पंजाब को तबाह करने के लिए दिन-रात एक कर रहा है।

पश्चिमी देशों में खालिस्तानियों को संगठित करने का प्रयास

एक अन्य समाचार अनुसार अमेरिका में बैठे खालिस्तान समर्थकों ने भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई। आशंका है कि यूरोप, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका से आतंकी साजिश रची जा सकती हैं। खालिस्तानी चरमपंथियों ने इस बैठक का नाम मानवीय सहायता बैठक रखा था। बैठक में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन से खालिस्तान समर्थक जुटे और चरमपंथ के समर्थन में सहायता जुटाने की योजनाएं बनाई।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, वाशिंगटन में अलग-अलग देशों से 78 चरमपंथी शामिल हुए। इनमें से कुछ ऐसे लोग भी थे जो बीते कुछ समय पहले ही पंजाब से विभिन्न देशों में लौटे थे। इस बैठक में यह भी तय हुआ कि अगले कुछ महीने तक यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, यूके और उत्तरी अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से भारत के खिलाफ बड़ी साजिश भी रची जाएंगी। उपरोक्त तत्यों से स्पष्ट है कि पंजाब व देश विरोधी ताकतें आज भी सक्रिय है और पंजाब उनके निशाने पर है।

जैश के महिला प्रकोष्ठ का गठन 

पिछले दिनों भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वहां के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा ‘जमात-उल-मोमिनात नाम से अपनी पहली महिला ब्रिगेड के गठन की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद इसने अब तूफात अल-मोमिनात नाम से एक ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया है। इसका उद्देश्य धन जुटाना और अधिक से अधिक महिलाओं की भर्ती करना है। इस कोर्स में दाखिला लेने वाली हर महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये का चंदा भी लिया जा रहा है और उनसे एक आनलाइन सूचना फार्म भी भरवाया जा रहा है। इस महिला ब्रिगेड का नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर करेगी, जिसका पति यूसुफ अजहर सात मई को आपरेशन सिंदूर में मारा गया था, जब भारतीय सेना ने मरकज सुभान अल्लाह स्थित जैश के मुख्यालय पर हमला किया था।

सूत्रों के अनुसार, संगठन को मजबूत करने और ज्यादा महिलाओं की भर्ती के लिए जैश आतंकियों (जिनमें मसूद अजहर और उसके कमांडरों के रिश्तेदार भी शामिल हैं) के परिवारों की महिला सदस्य जिहादी कोर्स में दाखिला लेने वाली महिलाओं को जिहाद, धर्म और इस्लाम के नजरिये से उनके कर्तव्यों का पाठ पढ़ाएंगी। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, ऑनलाइन लाइव व्याख्यानों के जरिये भर्ती अभियान आठ नवंबर से शुरू होने वाला है। सूत्रों अनुसार मसूद अजहर की दो बहनें सादिया और समायरा आनलाइन मीटिंग प्लेटफार्म के जरिये रोजाना 40 मिनट तक महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मोमिनात में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के हवाई हमलों जैश, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के मुख्यालय नष्ट कर दिए गए थे। तब से ये संगठन भारतीय हमले से बचने के लिए रणनीतिक रूप से अपने ठिकानों को पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में स्थानांतरित कर रहे हैं। इन आतंकी संगठनों के सरगना तब से प्रोपेगेंडा वीडियो भी बना रहे हैं और ठिकानों तथा कैडर को फिर से मजबूत करने के लिए चंदा देने की अपील कर रहे हैं। आईएसआईएस, बोको हराम, हमास और लिट्टे जैसे आतंकी संगठनों का महिलाओं को आत्मघाती हमलावरों के रूप में इस्तेमाल करने का इतिहास रहा है, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठन ऐसा करने से अब तक बचते रहे हैं।

लेकिन, अब सूत्रों का मानना है कि जैश-ए-मोहम्मद का ताजा कदम भविष्य के आतंकी अभियानों में महिला आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षित करने और उनका इस्तेमाल करने के उसके इरादे का संकेत देता है। जैश ने पाकिस्तान में 313 नए मरकज बनाने के लिए 3.91 अरब रुपये इकट्ठा करने के लिए ईजीपैसा के जरिये एक आनलाइन धन उगाही अभियान भी शुरू किया है।’ इस बात की पूरी आशंका है कि इस संगठन का उपयोग पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी हिंसा बढ़ाने के लिए कर सकता है।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रचार का प्रभाव

सोशल मीडिया पर भी देखने को मिल रहा है कि संदिग्ध एकाउंट्स पर पाकिस्तान को पंजाब हितैषी दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, और दोनों ओर के पंजाब की संस्कृति का वास्ता दे कर एकता की बातें की जा रही हैं। मुगलों द्वारा जिहाद के नाम पर पंजाबियों विशेषकर सिखों पर किए गए अत्याचारों को राजनीतिक बताया जा रहा है। विदेश में बैठे खालिस्तानी तत्व पूरी तरह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अधीन हैं और वे सिखों का नाम ले कर पाकिस्तान की ही भाषा बोलते हैं। इस तरह के माध्यम से पाकिस्तान पंजाब में खालिस्तान व कश्मीर में जिहादी आतंकवाद को मिला कर मृतप्राय: ऑपरेशन के-2 में झाडफ़ूंक कर प्राण प्रतिष्ठा करने का प्रयास कर रहा दिखता है।
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