कड़कड़डूमा न्यायालय ने गत 31 जुलाई, 2026 को आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में छह नामजद आरोपियों को बरी कर दिया गया। पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे। इसमें कुछ घाव बेहद गंभीर थे। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में कहा कि हत्या बेहद क्रूर ढंग से की गई है। यह हत्या का दुर्लभतम यानी ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला है, लेकिन न्यायालय ने इसे नहीं माना। हालांकि यह जरूर कहा कि यह नृशंस हत्याकांड केवल एक साधारण अपराध नहीं था, बल्कि सांप्रदायिक घृणा का एक खौफनाक उदाहरण था।
दंगाइयों की हैवानियत
अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा न्यायालय ने निर्णय सुनाते समय अपराध के कारण और उसकी क्रूरता पर बेहद तीखी टिप्पणी की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने अपने 36 पृष्ठ के निर्णय में स्पष्ट लिखा कि खून की प्यासी अनगिनत दंगाइयों की भीड़ ने अंकित शर्मा को महज हिंदू होने के चलते उन्हें अपना शिकार बनाया। उनकी हैवानियत अंकित की जान लेने के बाद भी शांत नहीं हुई। शव को जानवरों की तरह बांधकर घसीटा गया और नाले में फेंक दिया गया।
ताहिर हुसैन उस उन्मादी भीड़ का हिस्सा था, जो नफरत की भावना के साथ 25 फरवरी, 2020 को चांदबाग पुलिया पर इकट्ठा हुई थी। हत्या के बाद उनके शव को चांदबाग पुलिया के पास गहरे नाले में फेंक दिया गया। उनका 26 फरवरी 2020 को दिल्ली के चांद बाग (खजूरी खास) इलाके के नाले से बरामद किया गया था। उनकी कलाई पर बंधे काले धागे से शव की पहचान की गई। अंकित के पिता रवींद्र कुमार ने शव की पहचान की थी।
परिवार का पलायन
अंकित शर्मा की हत्या के बाद उनका पूरा परिवार दिल्ली से पलायन कर गया। इन दिनों ये लोग गाजियाबाद में रहते हैं। 22 साल की उम्र में नौकरी शुरू करने वाले अंकित अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। वे पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके आस-पास के लोगों से दोस्ताना संबंध थे। न्यायालय के के फैसले के बाद अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर ने कहा कि अभियुक्तों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। इससे लोगों का न्याय में भरोसा और मजबूत होगा।
माैके पर पहुंचा था न्यायालय
न्यायालय के निर्णय में वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ अभियोजन पक्ष के 91 गवाहों के बयान बेहद अहम साबित हुए। मौके पर खुद गया था न्यायालय कड़कड़डूमा न्यायालय ने अंकित शर्मा हत्याकांड के मामले में स्वयं घटनास्थल का मुआयना (स्पॉट विजिट) करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय अपराध की वीभत्सता और घटनाक्रम को बारीकी से समझने के लिए लिया गया था।11 मई, 2026 को निचली अदालत ने चांदबाग पुलिया और आसपास के पूरे इलाके का व्यक्तिगत रूप से दौरा कर वास्तविकता का जायजा लिया था। इसी जमीनी निरीक्षण के दौरान न्यायालय ने पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए साक्ष्यों में दिखाए गए स्थानों और वास्तविक भूगोल का बारीकी से मिला। ऐसे तमाम साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने ताहिर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह लेख ‘पाञ्चजन्य’ की रिपोर्ट पर आधारित है, जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों (फरवरी 2020) के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा न्यायालय द्वारा पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित अन्य दोषियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा पर केंद्रित है।
















