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विदेशी फंडिंग से जुड़ा FCRA विधेयक जेपीसी को भेजा गया

केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को विधेयक को संयुक्त समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा। विपक्षी दलों ने विधेयक को वापस लिए जाने की मांग की। सत्ता पक्ष ने कहा कि विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। इसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से जेपीसी को भेजे जाने का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया गया।

Written byएजेंसीएजेंसी
Aug 12, 2026, 07:33 pm IST
inभारत
एफसीआरए से विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर कसेगा शिकंजा

एफसीआरए से विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026′ को संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया। संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 सदस्य और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इन्हें लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति नामित करेंगे। समिति को विधेयक की जांच और शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है।

केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को विधेयक को संयुक्त समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव रखा। विपक्षी दलों ने विधेयक को वापस लिए जाने की मांग की। सत्ता पक्ष ने कहा कि विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। इसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से जेपीसी को भेजे जाने का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया गया।

विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इससे अल्पसंख्यक संस्थानों की विदेशी फंडिंग रुक जाएगी। सपा नेता अखिलेश यादव ने इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस विधेयक के विरोध में है। द्रमुक नेता टीआर बालू ने भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए।

दूसरी ओर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने ही विधेयक को जेपीसी में भेजे जाने की मांग रखी थी। उन्होंने कहा कि कोई विषय है तो उसे जेपीसी में रखा जा सकता है। विपक्ष इसका स्वागत करने की जगह विरोध कर रहा है। यह देश को सुरक्षित रखने की बात है। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है। नियम और संवैधानिक व्यवस्था के लिए कानून जरूरी है।

सरकार के पत्र सूचना कार्यालय का कहना है कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) को लेकर कई धारणाएं अधूरी जानकारी पर आधारित हैं। एफसीआरए विदेशी चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाता बल्कि पंजीकरण और पारदर्शिता की शर्तों के साथ इसकी अनुमति देता है। वर्ष 2024-25 में करीब 16,200 पंजीकृत संगठनों को लगभग 22,963 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला। कानून केवल गैर सरकारी या धार्मिक संगठनों तक सीमित नहीं है और धर्म, समुदाय या विचारधारा के आधार पर भेद नहीं करता। पंजीकरण गतिविधियों पर पूर्व अनुमति की व्यवस्था नहीं बनाता। संपत्तियों से जुड़े प्रावधान केवल विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों पर लागू होते हैं। पंजीकरण रद्द होना हमेशा किसी गलती का प्रमाण नहीं होता क्योंकि प्रशासनिक कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं।

 

Topics: एफसीआरएलोकसभानित्यानंद रायसंयुक्त संसदीय समितिFCRA Amendment Bill 2026फसीआरए विधेयक 2026विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियमकिरेन रिजिजू
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