बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबन्धन में शामिल राजद, कॉंग्रेस और वीआईपी के नेता ही 11 सीट पर एक- दूसरे के विरोध में खड़े हैं। इससे राजग को फायदा हो सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन तार- तार हो गया है। इस बार भले ही आर- पार की लड़ाई का ढोल पीटा जा रहा हो , लेकिन महागठबंधन में स्वार्थ चरम पर है। मजबूरी में कांग्रेस ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है। लेकिन महागठबंधन के दल 11 सीटों पर आपस में ही भिड़ रहे हैं।
सीट 243 और 255 पर चुनाव लड़ रहा महागठबंधन
बिहार में महागठबंधन पर कटाक्ष करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और पाटलिपुत्र के सांसद रवि शंकर प्रसाद ने पूछा कि ये कैसा लचर गठबंधन है कि एक ओर तो राहुल गांधी की तस्वीर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं थी और दूसरी ओर बिहार में सीटें तो 243 हैं जबकि महागठबंधन 255 पर चुनाव लड़ रहा है।
कांग्रेस की सबसे घनघोर बेइज्जती
सबसे अधिक बेइज्जती कांग्रेस की हो रही है। महागठबंधन के नाम पर कांग्रेस को बार-बार समझौता करना पड़ रहा है। उसकी ना सिर्फ सीटें कम हो गई बल्कि महागठबंधन के पत्रकार वार्ता से राहुल गांधी की तस्वीर भी गायब हो गई। गत चुनाव में 70 सीटों पर लड़नेवाली कांग्रेस को इस बार सिर्फ 61 सीटों पर संतोष करना पड़ा। कहने को भले 61 सीटें हैं लेकिन इसमें 10 सीटों पर उसे महागठबंधन के प्रत्याशियों से भी जूझना है। पहले तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की सीट पर भी राजद ने अपना प्रत्याशी उतार दिया था, लेकिन गुरुवार को यह मामला सुलझ गया।
महागठबंधन में सीटों का विवाद थम नहीं रहा
महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों का विवाद अभी तक नहीं सुलझ सका है। घटक दल अभी 11 सीटों पर चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं। कांग्रेस राजद के साथ 5 सीटों पर भिड़ेगी। वहीं कांग्रेस को भाकपा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) से चार सीटों पर और गठबंधन में नया शामिल दल वीआईपी से एक सीट पर मुकाबला करना होगा। कांग्रेस को कहलगांव, वैशाली, नरकटियागंज, सिकंदरा और सुल्तानगंज में राजद प्रत्याशियों से भी लड़ना होगा। वहीं कांग्रेस का मुकाबला भाकपा से बछवारा, राजापाकर(सु), बिहारशरीफ और करगहर में होगा। वहीं बेलदौर से कांग्रेस के प्रत्याशी मिथिलेश निषाद को गठबंधन में शामिल नए दल वीआईपी के प्रत्याशी तनीषा चौहान से जूझना होगा।
अलग-थलग पड़ी कांग्रेस
कांग्रेस गठबंधन में अलग-थलग पड़ गई है। लालू यादव ने समन्वय के नाम पर अपनी सारी बातें मनवा ली है। कांग्रेस ने नवादा के वारसलीगंज और वैशाली के लालगंज सीट से अपने उम्मीदवार का नामांकन वापस करा दिया। जबकि राजद ने ऐसी किसी भी सीट पर अपने उम्मीदवार का नाम वापस नहीं कराया, जहां दोनों पार्टियां आपस में भिड़ रही हों। एक प्रकार से राजद ने कांग्रेस से अपनी सारी बातें मनवा ली। सीट की संख्या कम करा दी, तेजस्वी यादव को गठबंधन की ओर से भावी मुख्यमंत्री घोषित करवा दिया और तो और फेंडली फाइट वाली दो सीटों पर उम्मीदवार भी वापस करा दिया। एक प्रकार से कांग्रेस जिस गोद से निकलना चाह रही थी, अंततः वहीं पहुंच गई।

















