वेटिकन सिटी में 500 वर्ष पुराने पुस्तकालय में अब मुस्लिमों की नमाज के लिए भी अलग से कमरा होगा। वेटिकन ऐपस्टालिक लाइब्रेरी में आने वाले मुस्लिम स्कालर्स ने यह मांग लाइब्रेरी के कर्मचारियों से की थी कि उन्हें नमाज पढ़ने के लिए एक कालीन सहित एक कमरा चाहिए। और कर्मियों ने उनकी इस मांग को मान लिया। इस निर्णय को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के भीतर नाराजगी का गुबार फूट पड़ा है। यह लाइब्रेरी लगभग पाँच सौ साल पुरानी है और यह कैथोलीक चर्च की बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र मानी जाती है।
लाइब्रेरी में 20 लाख से अधिक पुस्तकें
इस लाइब्रेरी में लगभग 80,000 मैनुस्क्रिप्ट, और लगभग बीस लाख से अधिक पुस्तकें हैं। जीबी न्यूज के अनुसार लाइब्रेरी के वाइस परफेक्ट, गियाकोमो कार्डिनल ने इटली के आउटलेट ला रीपब्लिका से बात करते हुए कहा कि “मुस्लिम स्कालर्स ने हमसे नमाज पढ़ने के लिए कालीन के साथ एक कमरे की मांग की थी और हमने उन्हें वह दे दिया। हमारे पास अविश्वसनीय प्राचीन कुरआन हैं।“ उन्होंने आगे कहा कि “हम एक वैश्विक लाइब्रेरी हैं, जिसमें अरबी, यहूदी और एथोपियाई कलेक्शन हैं और साथ ही चीन के भी कुछ संकलन हैं। और कई साल पहले हमें यह भी पता चला था कि हमारे पास जापान से बाहर सबसे प्राचीन जापानी पुस्तकें हैं।“
ईसाई पहचान के प्रतीक वेटिकन में मुस्लिमों की नमाज
इसके साथ ही यहाँ पर हजारों सिक्के, मेडल आदि भी हैं। परंतु यह भी सत्य है कि वेटिकन की पहचान अभी तक रिलीजियस आधार पर ही है। वेटिकन ईसाई पहचान का प्रतीक है। लोगों का कहना है कि कैसे वेटिकन में मुस्लिमों के लिए नमाज का कमरा बनाया जा सकता है, जबकि इस्लामिक शहर मक्का और मदीना अपने तमाम खुलेपन के बाद भी अपनी मजहबी पहचान के प्रति कट्टर हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि क्या यह कदम, जिसे इन्टर-फैथ रीस्पेक्ट के रूप में उठाया जा रहा है और साथ ही इस प्रयास के रूप में उठाया जा रहा है कि यह लाइब्रेरी नॉलेज का वैश्विक केंद्र है, जहां पर हर मतपंथ की पुस्तकें उपलब्ध हैं, वह वेटिकन की रिलीजयस पहचान पर अतिक्रमण नहीं करेगा?
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लोगों का सवाल-क्या मक्का में ईसाइयों के लिए चैपल खोलेंगे मुसलमान
इस विषय में लोगों का यह भी कहना है कि क्या मक्का में ईसाइयों के लिए चैपल खोला जाएगा? लोग इसे लेकर पोप पर भी निशाना साध रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि “ग्लोबलिस्ट/एंटी कैथोलिक पोप लियो ने यह घोषणा की है कि वेटिकन में इसकी लाइब्रेरी में मुस्लिमों के लिए नमाज के लिए एक कमरा दीया है। तो यहीं पर क्यों रुकना? क्यों नहीं पूरे सैन्ट बसलिका को मस्जिद में बदल देते?”
What???
The globalist/anti-Catholic Pope Leo just announced that the Vatican opened a Muslim prayer room inside its library. I say, why stop there. Why not go dhimmi all the way and turn the entire St. Peter's basilica into a mosque? pic.twitter.com/GaKYB6tRXd— AJ Steel Show (@ajsteelshow) October 15, 2025
कुछ लोग इसलिए गुस्सा हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आखिर जब इस्लाम को मानने वाले लोग कैथोलिक ईसाइयों का कत्लेआम कई देशों में कर रहे हैं, तो ऐसे में वेटिकन में मुस्लिमों के नमाज के लिए कमरा कैसे दिया जा सकता है?
ईसाइयों के जीनोसाइड के लिए जिम्मेदार मजहब को वेटिकन में जगह क्यों ?
एक यूजर ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि वह मजहब जो पूरे मिडल ईस्ट में ईसाइयों के जेनसाइड के लिए जिम्मेदार है, तो उसे हम लोग वेटिकन में कैसे बुला सकते हैं? उसने लिखा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है, क्योंकि मुस्लिम जब किसी भी ईसाई स्थान पर कब्जा करते हैं, तो वह खुलकर जश्न मनाते हैं। यह उनके मजहब में सबसे बड़ी इज्जत मानी जाती है और वे ऐसा करने के बाद चर्च पर कब्जा करते हैं। वे ईसाइयों को अपने से नीचा मानते हैं और हम उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं?
लोगों का गुस्सा इसी बात को लेकर है कि कैथोलिक्स की जो हत्याएं हो रही हैं, उन पर बात करने के स्थान पर वेटिकन में मुस्लिमों के लिए नमाज के लिए कमरा बन रहा है। लोगों का कहना है कि ईसाई महिलाओं को सेक्स स्लैव बनाया जा रहा है और वेटिकन उन्हें नमाज पढ़ने के लिए कमरा दे रहा है?
एक यूजर ने लिखा कि एक प्रतिबद्ध कैथोलिक होने के नाते मैं, वेटिकन द्वारा किये गए इस विश्वासघात पर गुस्सा हूँ, जो उन्होनें मुस्लिमों के लिए वेटिकन में नमाज के लिए कमरा बनाकर किया है।
सोशल मीडिया पर वेटिकन के इस कदम को लेकर बहुत गुस्सा है, क्षोभ है और दुख भी है। लोगों का कहना है कि ईसाइयों के कत्लेआम और उन पर मुस्लिमों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों पर बात करने के स्थान पर ऐसा क्यों किया जा रहा है?
किसी ने पूछा कि क्या ऐसा ही अनुरोध मक्का में किया जा सकता है?
















