गुरुग्राम में कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो के दौरान चर्चित ‘370 रुपए की बिरयानी’ टिप्पणी का हवाला देते हुए एक जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार डिजिटल कंटेंट के लिए एक नियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) बनाने की मांग की गई है।
वकील विशाल तिवारी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हाल के समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी सूचनाएं तेजी से वायरल हो रही हैं। उदाहरण के तौर पर उस फर्जी दावे का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि भारत के कई न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्री करदाताओं के पैसे से लंदन में बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल हुए थे। याचिका के अनुसार, मौजूदा कानूनी व्यवस्था अधिकांश मामलों में तब सक्रिय होती है, जब गलत सूचना व्यापक रूप से फैल चुकी होती है।
फैक्ट-चेक या आधिकारिक स्पष्टीकरण आने तक लाखों लोग उस भ्रामक सामग्री को देख, साझा और उस पर भरोसा कर चुके होते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मनोरंजन या व्यंग्य के नाम पर प्रसारित सामग्री, एल्गोरिदम के कारण व्यापक सामाजिक प्रभाव डाल सकती है। इसलिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्रकाशनों पर भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने तथा स्पष्ट नियामक व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।
















