अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करते रहे हैं। वह रूसी तेल को लेकर लगातार झूठ फैला रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। ये दावा उन्होंने व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। लेकिन उनके इस झूठ पर दिल्ली से तुरंत जवाब आ गया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा कि ये बात गलत है। नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच हाल ही में कोई फोन कॉल नहीं हुई। भारत अपना ऊर्जा व्यापार राष्ट्रीय हितों के आधार पर चला रहा है, और रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।
ट्रंप का झूठ
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिल्कुल साफ कहा, “भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा।” ये बात उन्होंने ज़ेलेंस्की के साथ खड़े होकर कही, जो यूक्रेन-रूस जंग के बीच अमेरिका का समर्थन मांगने आए थे। ट्रंप का ये बयान इसलिए अहम था क्योंकि पश्चिमी देशों ने रूस पर यूक्रेन आक्रमण के बाद सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे। ट्रंप ने ये भी जोड़ा कि भारत जैसे देश अब रूसी तेल से दूर हो रहे हैं। लेकिन कॉन्फ्रेंस में हल्का-फुल्का पल भी था। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की की जैकेट की तारीफ करते हुए कहा, “तुम्हारी जैकेट बहुत खूबसूरत लग रही है। स्टाइलिश है, उम्मीद है लोग नोटिस करेंगे।”
MEA ने ट्रंप के झूठ का किया पर्दाफाश
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रंप के दावे पर तुरंत रिएक्ट किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई बातचीत या फोन कॉल नहीं हुई। मुझे कल की कोई बातचीत के बारे में जानकारी नहीं है।” जायसवाल ने ये भी साफ किया कि दोनों नेताओं की आखिरी आधिकारिक बातचीत 9 अक्टूबर को हुई थी। ये कॉल बहुत छोटी और सकारात्मक थी। इसमें मोदी ने ट्रंप को गाजा शांति योजना की सफलता पर बधाई दी। दोनों ने व्यापार वार्ताओं की प्रगति पर भी चर्चा की और भविष्य में संपर्क में रहने पर सहमति जताई। MEA ने कहा कि ट्रंप का दावा पूरी तरह गलत है, और भारत अपनी ऊर्जा नीतियां राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के हिसाब से तय करता है।
विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर वाली कॉल को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड किया है। इसमें मोदी ने ट्रंप की गाजा शांति योजना की तारीफ की, जो मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने का प्रयास था। दोनों नेताओं ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौतों पर भी बात की। ट्रंप ने कहा था कि व्यापार सौदे जल्द फाइनल होंगे, और मोदी ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। लेकिन रूसी तेल का कोई जिक्र नहीं हुआ। ये कॉल महज 10-15 मिनट की थी, और उसके बाद कोई संपर्क नहीं। जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में ये डिटेल्स शेयर कीं ताकि अफवाहें रुकें। भारत का स्टैंड साफ है–ऊर्जा आयात में रूस महत्वपूर्ण पार्टनर है।
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भारत-रूस तेल व्यापार का बैकग्राउंड
भारत का रूस से तेल खरीदना कोई नई बात नहीं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर तेल निर्यात पर पाबंदी लगा दी। लेकिन भारत ने इसे नजरअंदाज किया। वजह? राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और रूस से सस्ता तेल मिलना फायदेमंद है। 2022 से अब तक भारत ने रूस से अरबों डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। MEA ने कई बार कहा कि ये खरीद वैध हैं, क्योंकि भारत ने G7 देशों के साथ मिलकर रूस को अलग-थलग करने से इनकार किया। बल्कि, भारत ने शांति वार्ता की अपील की। ट्रंप का दावा इसी संदर्भ में आया, जो अमेरिकी दबाव का हिस्सा लगता है। लेकिन दिल्ली हिली नहीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सलाहकार ने भी ट्रंप के दावे पर हंसी उड़ाई, कहा कि “हमारे सहयोगी मायने रखते हैं।”

















