भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस्राएल और हमास के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के प्राथमिक चरण का स्वागत किया है। मोदी ने उम्मीद व्यक्त की है कि इससे ‘स्थायी शांति का रास्ता साफ होगा’। प्रधानमंत्री मोदी ने आज सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर संभावित गाजा शांति योजना पर सोशल मीडिया के माध्यम से उक्त टिप्पणी की। अपने ट्वीट में मोदी ने इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।
अपनी एक्स पोस्ट में मोदी ने लिखा, ‘हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के प्रारंभिक चरण पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं। यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व को भी दर्शाता है।” गाजा में स्थिरता आने की उम्मीद व्यक्त करते हुए, मोदी ने आगे कहा कि बंधकों की रिहाई और बढ़ी हुई मानवीय सहायता उन्हें राहत प्रदान करेगी और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी।

भारत ने कहा है कि वह गाज़ा में शांति बहाल करने और मानवीय संकट का समाधान करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी राजनयिक प्रयासों का समर्थन करता है। मोदी का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह घोषणा करने के कुछ ही घंटों के अंदर आया है जिसमें ट्रंप ने कहा था कि इस्राएल और हमास, दोनों बंधकों की रिहाई और कुछ मात्रा में सैन्य वापसी के लिए अमेरिका और कतर की मध्यस्थता वाले समझौते पर राजी हो गए हैं।
दरअसल भारत का उक्त बयान इसकी पारंपरिक विदेश नीति की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें वह मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश में लगा रहा है। भारत ऐतिहासिक रूप से फिलस्तीनी स्वायत्तता और अधिकारों का समर्थन करता रहा है, वहीं हाल के वर्षों में उसने इस्राएल के साथ भी गहरे सामरिक और तकनीकी संबंध बनाए हैं। ऐसे में, भारत का यह कहना कि वह ‘शांति बहाली और मानवीय संकट के समाधान’ की दिशा में उठाए गए सभी कदमों का समर्थन करता है, यह एक संतुलित और कूटनीतिक स्थिति ही कही जाएगी।

उल्लेखनीय है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रस्तावित एक समझौते के तहत, इस्राएल और हमास गाजा में संघर्ष रोकने और फिलहाल कुछ बंधकों और कैदियों को रिहा करने पर सहमत हुए हैं। यह समझौता दो साल से चल रहे विनाशकारी युद्ध में पिछले कुछ महीनों में सबसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
लेकिन कुछ रक्षा विशेषज्ञों को आशंका है कि हमास कुछ दिन भले शांत रहे, लेकिन वह इस्राएल विरोधी हिंसा का बर्ताव करना शायद ही छोड़े। अगर वह ऐसा करता है तो उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो जाएगा, जो उसके लड़ाके बिल्कुल नहीं चाहेंगे।

















