चुनाव आयोग (EC) की ओर से चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे चरण में वोटर लिस्ट की जांच का काम जारी है। इस दौरान ओडिशा, उत्तराखंड और दादरा एवं नगर हवेली-दमन और दीव में 84 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम “अन्य” कारणों से हटाए गए हैं। यह नई कैटेगरी पहले चरण में नहीं थी, इसलिए इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
SIR में 84 हजार वोटर बाहर
चुनाव आयोग ने 14 मई को SIR के तीसरे चरण की घोषणा की थी। इसके तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं और उनसे गणना फॉर्म भरवाते हैं। अब तक जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार, ओडिशा, उत्तराखंड और दादरा एवं नगर हवेली-दमन और दीव में कुल मिलाकर करीब 32 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें अधिकांश लोगों को मृत, स्थानांतरित, लंबे समय से अनुपस्थित या एक से अधिक जगह पर पंजीकृत पाया गया। लेकिन 84 हजार से ज्यादा नाम “अन्य” कारणों से हटाए गए, जिससे नई चर्चा शुरू हो गई।
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, “अन्य” कैटेगरी में उन लोगों को रखा गया है जिन्होंने सत्यापन फॉर्म भरने या उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बताया कि तीसरे चरण में BLO ऐप में यह नया विकल्प जोड़ा गया है। उत्तराखंड में करीब 69 हजार, ओडिशा में 14 हजार और दादरा एवं नगर हवेली-दमन और दीव में 1,100 से अधिक मतदाताओं के नाम इसी श्रेणी में हटाए गए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि “अन्य” कैटेगरी को आधिकारिक रूप से कब जोड़ा गया और इसमें किन-किन परिस्थितियों को शामिल किया गया है। इसी वजह से कई लोग अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम नहीं होती। जिन मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे एक महीने के क्लेम और ऑब्जेक्शन की अवधि में जरूरी दस्तावेज देकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। इसके बाद सभी दावों और आपत्तियों की जांच कर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

















