भारत सौर ऊर्जा के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बनकर उभर रहा है। पहले हमारी बिजली ज्यादातर कोयला और पुरानी ऊर्जा पर निर्भर थी। अब धीरे-धीरे सब बदल रहा है। सूरज की रोशनी अब देश की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा शक्ति बनती जा रही है। सौर ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, सरकार के मजबूत लक्ष्य हैं और दुनिया में हमारी अच्छी खासी जगह बन गई है।
सौर ऊर्जा क्या है?
सौर ऊर्जा सूरज की रोशनी से मिलती है। सोलर पैनलों पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो उनके अंदर लगे फोटोवोल्टिक सेल इस रोशनी को सीधे बिजली में बदल देते हैं। यह बिजली घरों, दफ्तरों, फैक्टरियों और खेतों में इस्तेमाल होती है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, हवा साफ रहती है और पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचता है।
बिजली में सौर ऊर्जा का योगदान
पिछले दस साल में सौर ऊर्जा ने भारत की कुल बिजली क्षमता को लगभग दोगुना करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब सौर ऊर्जा पवन, जलविद्युत और बायोमास को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा नवीकरणीय स्रोत बन चुकी है।
- देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावाट से ज्यादा है।
- अक्टूबर 2025 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों की क्षमता 259 गीगावाट से ज्यादा हो गई, जो कुल का 50% से अधिक है। इसमें सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा हिस्सा है।
- 31 जनवरी 2026 तक सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 1,40,602 मेगावाट पहुंच गई, जो कुल बिजली क्षमता का करीब 27% है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 34,955 मेगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी गई – यह किसी भी दूसरे स्रोत से ज्यादा थी।
- पवन, सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों की कुल क्षमता 2,12,025 मेगावाट थी, जिसमें सौर अकेले 1,40,602 मेगावाट था।
भारत ने क्या लक्ष्य रखे हैं?
नवंबर 2021 में ग्लासगो COP-26 सम्मेलन में भारत ने ‘पंचामृत’ लक्ष्य घोषित किए। ये स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में रोडमैप हैं:
- 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता बनाना।
- 2030 तक कुल बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।
- 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी।
- 2005 के मुकाबले अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45% कमी।
- 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना।
50% गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी का लक्ष्य हमने करीब पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है। 500 गीगावाट का लक्ष्य अभी बाकी है।
इसे भी पढ़ें: खालिस्तानी आतंकवाद से लड़ने वाले पुलिसकर्मियों का अपमान क्यों? सतलुज फिल्म और सच्चाई
सौर क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई?
2014 में सौर क्षमता सिर्फ 3 गीगावाट थी। अक्टूबर 2025 तक यह 129.92 गीगावाट हो गई – यानी लगभग 40 गुना बढ़ोतरी।
- जमीन पर बड़े संयंत्र: 98.72 गीगावाट
- ग्रिड से जुड़े रूफटॉप: 22.42 गीगावाट
- हाइब्रिड परियोजनाएं: 3.32 गीगावाट
- ऑफ-ग्रिड सिस्टम: 5.45 गीगावाट
सरकार की मुख्य योजनाएं राष्ट्रीय सौर मिशन (2010 से): बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन बढ़ाने का मुख्य कार्यक्रम। जमीन, रूफटॉप, हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड सब इसमें शामिल हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (फरवरी 2024): एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगाना, हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली। बजट 75,021 करोड़ रुपये। दिसंबर 2025 तक 23.9 लाख घरों में सिस्टम लगे, करीब 7 गीगावाट जुड़ा और 13,464 करोड़ सब्सिडी दी गई।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना: 24,000 करोड़ रुपये की योजना। घरेलू सोलर मॉड्यूल बनाने को बढ़ावा, आयात कम करना। 48,337 मेगावाट विनिर्माण क्षमता मंजूर, 52,900 करोड़ निवेश और 44,400 रोजगार बने।
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM): किसानों को बिजली उत्पादक बनाना। स्टैंडअलोन सोलर पंप, ग्रिड पंपों का सोलरकरण। अक्टूबर 2025 तक 9 लाख से ज्यादा स्टैंडअलोन पंप, 10,535 ग्रिड पंप सोलर किए गए। योजना मार्च 2026 तक बढ़ाई गई।
सौर पार्क योजना: बड़े पार्क बनाना जहां सब सुविधाएं एक जगह हों। 13 राज्यों में 55 पार्क मंजूर (39,973 मेगावाट), 14,922 मेगावाट स्थापित। योजना 2029 तक बढ़ाई गई।
कौन सा राज्य आगे?
राजस्थान सबसे आगे है – 22,860.73 मेगावाट क्षमता। यहां साल में 325 दिन से ज्यादा धूप रहती है। गुजरात और मध्य प्रदेश भी बड़े हब हैं। राजस्थान का भड़ला सोलर पार्क (2.2 गीगावाट) दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा है।
सौर बिजली सस्ती हुई
नीलामियों की वजह से कई जगहों पर सौर बिजली 2.50 रुपये प्रति यूनिट से भी कम हो गई है। कई बार यह कोयले वाली बिजली से सस्ती पड़ती है।
दुनिया में भारत कहां खड़ा है?
IRENA 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत सौर ऊर्जा क्षमता में तीसरे और कुल नवीकरणीय ऊर्जा में चौथे स्थान पर है। 2025 में चीन सबसे आगे रहा – 1,175 TWh सौर बिजली। उसके बाद अमेरिका, भारत, जापान और जर्मनी। ये पांच देश दुनिया की 70% सौर बिजली बनाते हैं। दुनिया का कुल उत्पादन 2,778 TWh पहुंचा, जो 2024 से 30% ज्यादा है।
भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का संस्थापक है, मुख्यालय गुरुग्राम में। अक्टूबर 2025 में दिल्ली में आठवीं महासभा हुई जिसमें 125+ देश शामिल हुए। ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ जैसी पहल भी आगे बढ़ रही है।

















