संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस बार का सत्र काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार कई नए विधेयक (बिल) पेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा होगी। सरकार का कहना है कि इन कानूनों के जरिए न्याय व्यवस्था, कर प्रणाली, छोटे उद्योगों और प्रशासनिक व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।
मॉनसून सत्र में सरकार पांच नए बिल पेश करेगी
सरकार इस सत्र में पांच नए विधेयक पेश कर सकती है। इनमें इनकम टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला संशोधन विधेयक शामिल हैं। ये दोनों विधेयक पहले लाए गए अध्यादेशों की जगह लेंगे। इसके अलावा जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में बदलाव, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम कानून में संशोधन और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक भी पेश किए जाएंगे। इन नए विधेयकों के अलावा सरकार दो लंबित विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाएगी। इनमें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 शामिल हैं। शिक्षा से जुड़ा यह विधेयक पहले संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जा चुका है और अब इसे आगे बढ़ाने की तैयारी है।
मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई है। इस बैठक का उद्देश्य सभी दलों को सरकार के विधायी कार्यक्रम की जानकारी देना और संसद का कामकाज शांतिपूर्ण तरीके से चलाने के लिए सहयोग मांगना है। हालांकि, विपक्ष भी इस सत्र में कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल NEET-UG पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मुद्दों, विदेश नीति और कुछ प्रस्तावित कानूनों पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, विदेशी अंशदान कानून में प्रस्तावित बदलाव, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े किसी भी नए कदम का विरोध करेगी। सत्र से पहले संसद की राजनीति में भी कई बदलाव देखने को मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बागी सांसद नई पार्टी NCPI में शामिल होकर एनडीए सरकार का समर्थन कर चुके हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) और आम आदमी पार्टी के कुछ सांसद भी दूसरे दलों में शामिल हो गए हैं। इन घटनाओं ने संसद का राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया है।

















