भारत के द्वारा पाकिस्तानी आतंकियों को खत्म करने के लिए चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करते हुए उन्हें शांति के नोबल देने की बात करने वाला पाकिस्तान अब पलट गया है। कारण है कि अब इस्लाम की बात बीच में आ गई है। अब गाजा में चल रहे तनाव को सुलझाने के लिए ट्रंप के 20-सूत्रीय प्लान पर पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने साफ कह दिया कि ये हमारा प्लान नहीं है। उन्होंने संसद में बोलते हुए कहा कि इसमें मुस्लिम देशों के मूल मसौदे में बिना पूछे बदलाव कर दिए गए हैं। इससे पाकिस्तान दुनिया का पहला बड़ा देश बन गया जो इस प्रस्ताव से आधिकारिक तौर पर किनारा कर रहा है। हालांकि हमास ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
पाकिस्तान का साफ इनकार: ‘ये हमारा ड्राफ्ट नहीं’
इशाक डार ने कहा, “ये अमेरिका का घोषित प्लान है, लेकिन ये वो मसौदा नहीं जो हम मुस्लिम देशों ने मिलकर बनाया था। इसमें जो संशोधन हुए हैं, वो हमारी मर्जी से नहीं।” ये बयान पाकिस्तान की संसद में आया, जहां डार ने जोर देकर कहा कि उनका देश इस दस्तावेज को अपना नहीं मानता। ये सुनकर कई लोग हैरान हैं, क्योंकि ट्रंप का ये प्लान गाजा में शांति लाने का दावा करता है, लेकिन पाकिस्तान को लगता है कि इसमें अमेरिकी और इजरायली झुकाव ज्यादा है।
मुनीर की मंजूरी से फैसला
अंदर की खबर ये है कि ये सख्त रुख पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर की हरी झंडी से लिया गया। सेना नहीं चाहती कि ये प्लान अमेरिका या इजरायल के हितों को जायज ठहराने वाला लगे। सूत्रों के हवाले से लाइव हिन्दुस्तान रिपोर्ट करता है कि पाकिस्तानी आर्मी ने साफ कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम एकता को कमजोर नहीं होने देगा। ये फैसला घरेलू सियासत को ध्यान में रखकर लिया गया, जहां ट्रंप जैसे नामों की तारीफ करने वाले अब उल्टा दबाव में फंस गए हैं।
कट्टरपंथी और प्रो-पैलेस्टाइन ग्रुप्स का असर
पाकिस्तान में जो हो रहा है, वो साफ दिखा रहा है कि सड़क पर की राजनीति कितनी तीखी है। कट्टरपंथी गुट और पैलेस्टाइन समर्थक लॉबी किसी भी ऐसी योजना के खिलाफ हैं जिसमें हमास को हथियार छुड़ाने या इजरायल को थोड़ी सी भी मान्यता मिले। जानकार कहते हैं कि ये सब जनता के बीच संदेश देने के लिए है – कि इस्लामाबाद ने अमेरिकी दबाव के आगे सिर नहीं झुकाया। न्यूज-18 की एक रिपोर्ट में खुफिया सोर्स ने इसे ‘फेस-सेविंग’ बताया, यानी इमेज बचाने का तरीका। पाकिस्तान ये भी दिखाना चाहता है कि वो मुस्लिम दुनिया से अलग थलग नहीं पड़ रहा, न ही फिलिस्तीन का मुद्दा बेच रहा।
पर्दे के पीछे क्या चल रहा?
भले ही सामने से पाकिस्तान प्लान को ठुकरा रहा हो, लेकिन बैकग्राउंड में अमेरिका और अरब देशों के साथ बातचीत जारी है। सूत्रों का मानना है कि ये कूटनीतिक ड्रामा गाजा की जंग को और लंबा खींच सकता है।

















