आज विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संघ की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी, जिसका उद्देश्य भारत को संगठित, सशक्त और संस्कारित बनाना था।
इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी दी गई विचारधारा और योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक पवित्र, विशाल वट वृक्ष की तरह है जो भारतीय जनता को एक साथ जोड़ता है और उन्हें गौरव, वैभव तथा प्रगति की ओर मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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डॉ. रामनाथ कोविंद ने यह भी बताया कि नागपुर से जुड़े दो महान व्यक्तित्व- डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर ने उनके जीवन को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संघ की तुलना दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले संस्थान से की और इसे समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने वाला संगठन बताया। उनका कहना था कि संघ निरंतर किसानों, छात्रों, वैज्ञानिकों, कलाकारों, वनवासियों और नगरवासियों तक कार्य करते हुए समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास कर रहा है। विजयादशमी का यह दिन संघ के लिए ‘शतक-पूर्ण-उत्सव’ का प्रतीक भी है। यह दिन न केवल आरएसएस की स्थापना की याद दिलाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि संगठन सदैव भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सेवा के मार्ग पर अग्रसर है। इस अवसर पर व्यक्त किए गए विचार और आदर्श भारतीय समाज में एकता, संगठन और नैतिक मूल्य स्थापित करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक एकता को मजबूत करने में सदैव अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।

















