RSS के 100 साल: संघ पर प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 100 अद्भुत बातें
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RSS के 100 साल: संघ पर प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 100 अद्भुत बातें

संघ के 100 वर्ष पर संघ को लेकर पीएम मोदी के उद्बोधन की100 बातें जानिए...

Written byMahak SinghMahak Singh
Oct 1, 2025, 06:38 pm IST
in संघ @100

विजयादशमी के दिन (2 अक्तूबर 2025) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश करेगा। संघ की100 वर्षों की यह यात्रा प्रेरणा, तप और त्याग से भरी रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में संघ शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित समारोह में संघ को राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की अद्भुत मिसाल बताया। उन्होंने अनगिनत बातें कहीं। संघ के 100 वर्ष पर संघ को लेकर पीएम मोदी के उद्बोधन की100 बातें जानिए…

  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा त्याग, निःस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की अद्भुत मिसाल है।
  2. RSS के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।
  3. संघ के शताब्दी समारोह में विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के जारी कर बहुत गौरवान्वित हूं।
  4. नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रम में स्वयंसेवकों की संकल्प शक्ति ने नई ऊर्जा से भर दिया।
  5. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हजारो वर्षो से चली आ रही उस परम्परा का पुनस्थार्पन था जिसमे राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है।
  6. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवमयी यात्रा की स्मृति में आज जारी हुए विशेष डाक टिकट और भारत माता की तस्वीर वाले सिक्के समाज और देशसेवा में जुटे स्वयंसवकों की अथक और अनवरत यात्रा का प्रतीक हैं।
  7. संघ की हर धारा और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले इसके हर संगठन का उद्देश्य और भाव एक ही है- राष्ट्र प्रथम।
  8. संघ के बारे में इसलिए कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग जुड़कर असामान्य और अभूतपूर्व कार्य करते हैं।
  9. आजादी के आंदोलन में संघ का योगदान बहुत प्रेरित करने वाला रहा है।
  10. परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी को कई बार जेल भी जाना पड़ा।
  11. स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना, ये हर स्वयंसेवक की पहचान है।
  12. बड़ी से बड़ी चुनौतियों के बीच देशवासियों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।
  13. संघ ने सेवा भारती से लेकर वनवासी कल्याण आश्रम जैसे अपने अलग-अलग संगठनों के माध्यम से दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में भी अतुलनीय कार्य किए हैं।
  14. हमारे आदिवासी भाई-बहनों के सशक्तिकरण में संघ ने अहम भूमिका निभाई है।
  15. महात्मा गांधी जी ने संघ में समता और समरसता की खुलकर सराहना की थी। सर्वसमावेशी समाज के संकल्प को संघ आज भी निरंतर नई शक्ति दे रहा है।
  16. संघ के ये ‘पंच परिवर्तन’ विकसित भारत के निर्माण का आधार बनेंगे।
  17. 2047 का भारत तत्वज्ञान और विज्ञान के साथ सेवा और समरसता से गढ़ा हुआ वैभवशाली भारत होगा।
  18. यही संघ की दृष्टि है, यही हम सभी स्वयंसेवकों की साधना है और यही हमारा संकल्प है।
  19. संघ के स्वयंसेवक अनवरत रूप से देश की सेवा में जुटे हैं , समाज को सशक्त कर रहे हैं।
  20. 1963 में RSS के स्वयंसेवक भी 26 जनवरी की परेड में शामिल हुए थे। उन्होंने बहुत आन-बान-शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था।
  21. अपने कदम के बाद ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विराट उद्देश्य लेकर चला। ये उद्देश्य रहा- राष्ट्र निर्माण।
  22. संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की अहम से वयं की यात्रा शुरू होती है।
  23. संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण की यञवेदी है।
  24. विजयादशमी का महापर्व है, अन्याय पर न्याय की जीत, असत्य पर सत्य की जीत।
  25. अंधकार पर प्रकाश की जीत, विजयादशमी भारतीय संस्कृति के इस विचार और विश्वास का कालजयी उद्घोष है।
  26. ऐसे महान पर्व पर सौ वर्ष पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कोई संयोग नहीं था।
  27. यह हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा का पुनरोत्थान था।
  28. जिसमें राष्ट्र चेतना समय समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए नए अवतारों में प्रकट होती है
  29. इस युग में संघ उसी अनादि चेतना का पुण्य अवतार है।
  30. यह हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने को मिल रहा है।
  31. मैं इस अवसर पर राष्ट्र सेवा के संकल्प को समर्पित कोटि कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं।
  32. संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श परम पूज्य हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
  33. भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है।
  34. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड की कितनी अहमियत होती है।
  35. 1963 में आरएसएस के स्वयंसेवक भी उस परेड में शामिल हुए थे।
  36. उस परेड में स्वयंसेवकों ने आन बान शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था।
  37. संघ के स्वयंसेवक जो अनवरत रूप से देश की सेवा में जुटे हैं, समाज को सशक्त कर रहे हैं, इसकी झलक भी स्मारक डाक टिकट में है।
  38. जिन रास्तों में नदी बहती है, उसके किनारे बसे गांवों को सुजलां-सुफलां बनाती है। ठीक इसी तरह, संघ ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है।
  39. PM मोदी ने आगे कहा कि संघ का गठन तभी से ही एक विराट उद्देश्य के साथ हुआ- राष्ट्र निर्माण और इसके लिए संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की पद्धति अपनाई।
  40. संघ का हमेशा लक्ष्य रहा है- एक भारत, श्रेष्ठ भारत।
  41. संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया, स्वाभिमान जगाया।
  42. संघ देशभक्ति और सेवा का पर्याय है।
  43. स्वयं कष्ट सहना और दूसरों का कष्ट दूर करना ही प्रत्येक स्वयंसेवक की पहचान है।
  44. यह अविरल तप का फल है, यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है।
  45. संघ के अलग अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं।
  46. समाज जीवन के कई क्षेत्रों में संघ निरंतर कार्य कर रहा है।
  47. संघ की अनेक धाराएं बनीं, लेकिन उनमें विरोधाभास नहीं हुआ।
  48. हर संगठन का भाव एक ही है- राष्ट्र प्रथम।
  49. अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विराट उद्देश्य लेकर चला और यह उद्देश्य रहा- राष्ट्र निर्माण।
  50. इसके लिए जो कार्य पद्धति चुनी वह थी नित्य नियमित चलने वाली- शाखा।
  51. हेडगेवार जी व्यक्ति निर्माण में निरंतर जुटे रहे।
  52. जैसे कुम्हार ईंट पकाता है तो जमीन की सामान्य मिट्टी से शुरू करता है, खुद तपता है और मिट्टी को भी तपाता है, उसी तरह डॉक्टर साहब बिल्कुल सामान्य लोगों को चुनते थे और उन्हें गढ़ते थे।
  53. संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर अभूतपूर्व काम करते हैं।
  54. व्यक्ति निर्माण की सुंदर प्रक्रिया आज भी संघ की शाखा में देखते हैं।
  55. संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी हैं।
  56. संघ के पंच परिवर्तन- स्वबोध, सामाजिक समरसता, कुटुंम्ब प्रबोधन, नागरिक शिष्टाचार, पर्यावरण।
  57. देश के सामने आने वाली चुनौतियों पर विजय पाने के लिए प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणा हैं।
  58. यह हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसे महान अवसर का साक्षी बनने का अवसर मिल रहा है।
  59. इस युग में संघ राष्ट्रीय चेतना का पुण्य अवतार है।
  60. समाज की अनेक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद संघ आज भी एक विशाल वटवृक्ष की तरह अडिग खड़ा है।
  61. संघ की राह में हमेशा बाधाएँ रही, आज़ादी के बाद भी इसे रोकने की कोशिशें होती रहीं।
  62. संघ भारत माता के विराट स्वप्न से जुड़ा हुआ है।
  63. संघ का आदर्श संस्कृति की जड़ों को मजबूत करना है।
  64. संघ समाज में विकास और स्वाभिमान के लिए प्रयासरत है।
  65. संघ का उद्देश्य हर हृदय में लोक सेवा की ज्योति प्रज्वलित करना है।
  66. इन शाखाओं में व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है।
  67. स्वयंसेवकों के मन राष्ट्र सेवा का भाव और साहस दिन प्रतिदिन पनपता रहता है।
  68. उनके लिए त्याग और समर्पण सहज हो जाता है।
  69. श्रेय के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो जाती है।
  70. सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्य का संस्कार मिलता है।
  71. राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट स्पर्श और शाखा जैसी सरल जीवंत कार्य पद्धति, यही संघ की 100 वर्षों की यात्रा का आधार बनी।
  72. इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ से लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा।
  73. संघ जबसे अस्तित्व में आया, संघ के लिए देश की प्राथमिकता उसकी अपनी प्राथमिकता रही।
  74. जिस कालखंड में देश के लिए चुनौती आई, संघ ने उसमें अपने को झोंका।
  75. स्वतंत्रता सेनानियों को संघ संरक्षण देता था।
  76. स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघ काम करता था।
  77. 1942 में जब तिमूर में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन हुआ, उसमें कई स्वयंसेवकों को अंग्रेजों के भीषण अत्याचार का सामना करना पड़ा।
  78. आजादी के बाद भी हैदराबाद में निजाम के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन तक संघ ने कितने बलिदान दिए लेकिन भाव एक ही रहा- राष्ट्र प्रथम।
  79. राष्ट्र साधना की इस यात्रा में संघ के खिलाफ साजिशें भी हुईं।
  80. आजादी के बाद भी संघ को कुचलने का प्रयास किया गया।
  81. परमपूज्य गुरुजी को झूठे केस में फंसाया गया।
  82. जब पूज्य गुरुजी जेल से बाहर आए तो उन्होंने सहज रूप से कहा कि कभी कभी जीभ दांतों के नीचे आकर दब जाती है, कुचल जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है।
  83. जिन्हें जेल में इतनी यातनाएं दी गईं, उसके बाद भी उनके मन में दुर्भावना नहीं थी।
  84. चाहे संघ पर प्रतिबंध लगे, चाहे षड्यंत्र हुए, झूठे मुकदमे हुए, स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया, क्योंकि वे जानते हैं कि हम समाज से अलग नहीं हैं।
  85. प्रत्येक स्वयंसेवक का लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में अमिट विश्वास है।
  86. संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता नहीं दिखाई।
  87. संघ का मकसद है लोगों में संस्कृति की समझ, नियम-कायदा, मदद और समाज की जिम्मेदारी बढ़ाना।
  88. विभाजन के दर्द ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया। इस कठिन समय में स्वयंसेवक सबसे आगे खड़े रहे। उन्होंने न केवल राहत प्रदान की, बल्कि राष्ट्र की भावना को भी मजबूत किया।
  89. 1956 में अंजार भूकंप में भी स्वयंसेवक मदद करने में जुटे हुए थे।
  90. RSS ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार में विश्वास रखता है।
  91. 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान RSS ने देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  92. संघ से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं को सामूहिक रूप से “संघ परिवार” कहा जाता है।
  93. इस परिवार का प्रभाव समाज, शिक्षा, संस्कृति, सेवा और राजनीति के कई क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
  94. संघ के स्वयंसेवक संवैधानिक मूल्यों में आस्था रखते हुए समाज के प्रति समर्पित और स्थिर रहते हैं।
  95. संघ ने एक सिद्धांत – ‘राष्ट्र प्रथम’ और एक लक्ष्य – ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के मार्गदर्शन में अनगिनत बलिदान दिए हैं।
  96. आरएसएस के एक शताब्दी के कार्य की नींव राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य, व्यक्तिगत विकास के स्पष्ट मार्ग और शाखा के जीवंत अभ्यास पर टिकी हुई है।
  97. आरएसएस के स्वयंसेवक राष्ट्र की सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं।
  98. आरएसएस की स्थापना राष्ट्रीय जागरूकता की स्थायी भावना को प्रतिबिंबित करती है, जो हर युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए उभरी है।
  99. अपनी स्थापना के बाद से ही आरएसएस ने राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है।
  100. चुनौतियों के बावजूद RSS मजबूती से खड़ा है और राष्ट्र की अथक सेवा कर रहा है।

 

Topics: RSS centenary celebrationsDemographic change bigger threatPM Modiराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघRashtriya Swayamsevak SanghInfiltrationVijayadashamiSocial harmonyNarendra Modiपाञ्चजन्य विशेषRSS100 years of RSS
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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