RSS राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय, खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुःख हरना स्वयंसेवक की पहचान : पीएम मोदी
October 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

RSS राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय, खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुःख हरना स्वयंसेवक की पहचान : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSS शताब्दी समारोह में संबोधित किया, स्मारक सिक्का व डाक टिकट जारी, राष्ट्र निर्माण और सेवा की भावना पर जोर दिया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Oct 1, 2025, 04:12 pm IST
inभारत, संघ @100

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने नवरात्रि की सभी नागरिकों को शुभकामनाएँ दीं और उल्लेख किया कि आज महा नवमी है, जो देवी सिद्धिदात्री का दिन है। उन्होंने कहा कि कल विजयदशमी का भव्य पर्व है, जो भारतीय संस्कृति की शाश्वत उद्घोषणा का प्रतीक है—अन्याय पर न्याय की विजय, असत्य पर सत्य की विजय और अंधकार पर प्रकाश की विजय। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सौ वर्ष पूर्व हुई थी और यह कोई संयोग नहीं था। उन्होंने कहा कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा की पुनर्स्थापना थी, जिसमें राष्ट्रीय चेतना हर युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए रूपों में प्रकट होती है। इस युग में, उन्होंने कहा, संघ उस शाश्वत राष्ट्रीय चेतना का एक पुण्य अवतार है।

प्रधानमंत्री ने स्वयंसेवकों और संस्थापक को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह एक सौभाग्य की बात है कि वे आरएसएस के शताब्दी वर्ष के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र सेवा के संकल्प में जुटे असंख्य स्वयंसेवकों को शुभकामनाएँ दीं और संघ के संस्थापक व पूज्य आदर्श डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि संघ की गौरवशाली 100 वर्षों की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए भारत सरकार ने एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया है। 100 रुपये का यह सिक्का एक ओर राष्ट्रीय प्रतीक और दूसरी ओर वरद मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि को दर्शाता है, जिसे स्वयंसेवक सलामी दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संभवतः यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है जब भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित की गई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिक्के पर संघ का मार्गदर्शक सूत्र वाक्य अंकित है: “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम।”

स्मारक डाक टिकट का ऐतिहासिक महत्व

प्रधानमंत्री ने आज जारी किए गए स्मारक डाक टिकट के महत्व को रेखांकित किया और उसकी गहरी ऐतिहासिक प्रासंगिकता को बताया। उन्होंने 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि 1963 में आरएसएस स्वयंसेवकों ने परेड में भाग लिया था और गर्व के साथ देशभक्ति की धुनों पर कदमताल किया था। उन्होंने कहा कि यह डाक टिकट उस ऐतिहासिक पल की स्मृति को दर्शाता है।

स्वयंसेवकों की निष्ठा और सेवा

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह स्मारक डाक टिकट आरएसएस स्वयंसेवकों की अटूट निष्ठा को भी दर्शाता है, जो निरंतर राष्ट्र सेवा और समाज सशक्तिकरण में लगे रहते हैं।” उन्होंने इन स्मारक सिक्कों और डाक टिकटों के विमोचन पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

संघ की भूमिका नदी के समान

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार महान नदियाँ अपने किनारों पर मानव सभ्यताओं का पोषण करती हैं, उसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने असंख्य जीवनों को पोषित और समृद्ध किया है। उन्होंने नदी की उस भूमिका की तुलना संघ से की, जो जिस भूमि, गाँव और क्षेत्र से गुजरती है, उसे आशीर्वाद देती है। इसी तरह संघ ने भारतीय समाज के हर क्षेत्र और राष्ट्र के हर भाग को छुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघ की अविरल निष्ठा और सशक्त राष्ट्रीय प्रवाह का परिणाम है।

विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र सेवा

उन्होंने कहा कि जिस तरह नदी अनेक धाराओं में बंटकर अलग-अलग क्षेत्रों का पोषण करती है, संघ की यात्रा भी वैसी ही है। इसकी विभिन्न संबद्ध संस्थाएँ जीवन के सभी क्षेत्रों में—शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण, कला-विज्ञान और श्रम क्षेत्र—में राष्ट्र सेवा कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संघ के इन अनेक विस्तारों के बावजूद उनमें कभी विभाजन नहीं हुआ। “हर धारा, हर संगठन चाहे अलग क्षेत्र में काम करता हो, पर सबका एक ही उद्देश्य और भावना है: राष्ट्र प्रथम।”

व्यक्ति निर्माण और शाखाओं का महत्व

प्रधानमंत्री ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना से ही एक महान लक्ष्य—राष्ट्र निर्माण—का संकल्प लिया है।” इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए संघ ने राष्ट्रीय विकास की नींव के रूप में व्यक्ति निर्माण का मार्ग चुना। इस पथ पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए संघ ने एक अनुशासित कार्यप्रणाली अपनाई—दैनिक और नियमित शाखाओं का आयोजन।

डॉ. हेडगेवार की सोच और पद्धति

प्रधानमंत्री ने कहा, “पूज्य डॉ. हेडगेवार समझते थे कि राष्ट्र तभी सशक्त होगा जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक होगा; भारत तभी उन्नत होगा जब हर नागरिक राष्ट्र के लिए जीना सीखेगा।” उन्होंने बताया कि यही कारण था कि डॉ. हेडगेवार व्यक्ति निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध रहे और उन्होंने एक अनोखी पद्धति अपनाई। प्रधानमंत्री ने डॉ. हेडगेवार का मार्गदर्शक सिद्धांत उद्धृत किया: “लोगों को जैसे हैं वैसे स्वीकार करो, और उन्हें वैसा बनाओ जैसा उन्हें होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार की जनता से जुड़ने की शैली एक कुम्हार जैसी थी—साधारण मिट्टी से शुरुआत करना, उसे मेहनत से गढ़ना, पकाना और अंततः उन्हीं ईंटों से भव्य इमारत का निर्माण करना। इसी तरह उन्होंने सामान्य व्यक्तियों को चुना, उन्हें प्रशिक्षित किया, दृष्टि दी और राष्ट्र के लिए समर्पित स्वयंसेवक बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि संघ के बारे में कहा जाता है—साधारण लोग मिलकर असाधारण और अभूतपूर्व कार्य करते हैं।

शाखाएँ: ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा

प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति निर्माण की यह महान प्रक्रिया आज भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में जीवंत है। उन्होंने शाखा मैदान को प्रेरणा का पावन स्थल बताया, जहाँ से स्वयंसेवक अपनी यात्रा “मैं” से “हम” की ओर बढ़ाता है, जो सामूहिक भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शाखाएँ चरित्र निर्माण के वे यज्ञस्थल हैं, जहाँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि शाखाओं में राष्ट्र सेवा का भाव और साहस पल्लवित होता है, त्याग और समर्पण स्वभाव बन जाते हैं, व्यक्तिगत श्रेय की लालसा मिट जाती है और स्वयंसेवक सामूहिक निर्णय और टीमवर्क के मूल्य आत्मसात करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर वक्तव्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षीय यात्रा तीन आधार स्तंभों पर टिकी रही है—राष्ट्र निर्माण का महान दृष्टिकोण, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट मार्ग और शाखाओं के रूप में सरल किंतु गतिशील कार्य पद्धति। उन्होंने कहा कि इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा है, जो समर्पण, सेवा और राष्ट्रीय उत्कृष्टता की अटूट साधना के माध्यम से विविध क्षेत्रों में राष्ट्र को आगे बढ़ा रहे हैं।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और स्वतंत्रता के बाद की भूमिका

उन्होंने कहा कि स्थापना से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी प्राथमिकताओं को राष्ट्र की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा है और हर युग में देश की प्रमुख चुनौतियों का सामना किया है। स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पूज्य डॉ. हेडगेवार और कई अन्य कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और कई बार जेल भी गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि संघ ने अनेक स्वतंत्रता सेनानियों का सहयोग किया और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। उन्होंने 1942 के चिमूर आंदोलन का उदाहरण दिया, जहाँ अनेक स्वयंसेवकों ने ब्रिटिश अत्याचार झेले। स्वतंत्रता के बाद भी, उन्होंने कहा, संघ ने हैदराबाद में निज़ाम के अत्याचार का विरोध किया और गोवा व दमन-दीव की आज़ादी में योगदान दिया। इस पूरी यात्रा में मार्गदर्शक भावना हमेशा “राष्ट्र प्रथम” रही और अटल लक्ष्य रहा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”

संघ पर साज़िशें और गुरुजी का संतस्वरूप मार्गदर्शन

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी सेवा यात्रा के दौरान अनेक हमलों और साज़िशों का सामना किया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद भी संघ को दबाने के प्रयास हुए और पूज्य गुरुजी को झूठे आरोपों में जेल भेजा गया। लेकिन रिहाई के बाद गुरुजी ने बड़ी शांति से कहा था—“कभी-कभी जीभ दाँतों के बीच आकर दब जाती है और कट जाती है। लेकिन हम दाँत नहीं तोड़ते, क्योंकि दाँत और जीभ दोनों हमारे ही हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कड़ी यातना और उत्पीड़न सहने के बावजूद गुरुजी के मन में कोई कटुता या द्वेष नहीं था। उनका संतस्वरूप व्यक्तित्व और वैचारिक स्पष्टता हर स्वयंसेवक के लिए मार्गदर्शक रही, जिसने समाज के प्रति एकता और करुणा के मूल्यों को सशक्त किया। उन्होंने कहा कि चाहे प्रतिबंध हों, साज़िशें हों या झूठे मुकदमे—स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया, क्योंकि वे समझते हैं कि वे समाज से अलग नहीं हैं—समाज उन्हीं से बना है। जो अच्छा है वह भी उनका है और जो कम अच्छा है वह भी उनका है।

लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में आस्था

प्रधानमंत्री ने कहा कि संघ में कटुता न पनपने का एक प्रमुख कारण हर स्वयंसेवक का लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में अटूट विश्वास रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि आपातकाल के दौरान यही विश्वास स्वयंसेवकों को शक्ति और प्रतिरोध का साहस देता रहा। उन्होंने कहा कि ये दो मूल मूल्य—समाज के साथ एकत्व और संवैधानिक संस्थाओं में आस्था—ने स्वयंसेवकों को हर संकट में संतुलित और समाज की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाए रखा। समय-समय पर अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद संघ आज भी वटवृक्ष की तरह अडिग खड़ा है और राष्ट्र व समाज की सेवा कर रहा है।

राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थापना से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है। उन्होंने याद किया कि विभाजन की त्रासदी के समय जब लाखों परिवार उजड़ गए थे, तब स्वयंसेवक सीमित साधनों में भी शरणार्थियों की सेवा के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। उन्होंने कहा कि यह केवल राहत कार्य नहीं था, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को सुदृढ़ करने का कार्य था।

सेवा कार्य और आपदा प्रबंधन

प्रधानमंत्री ने 1956 में गुजरात के अंजार में आए भूकंप का उल्लेख किया और बताया कि कैसे व्यापक विनाश के बीच स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्यों में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस समय पूज्य गुरुजी ने गुजरात के तत्कालीन संघचालक वकील साहब को पत्र लिखकर कहा था कि “दूसरों के दुख को दूर करने के लिए कष्ट सहना ही महान हृदय का लक्षण है।”

सीमा सुरक्षा और संकट कालीन सेवा

प्रधानमंत्री ने कहा, “दूसरों के दुख को दूर करने के लिए कष्ट सहना हर स्वयंसेवक का लक्षण है।” उन्होंने 1962 के युद्ध की याद दिलाई, जब स्वयंसेवक सेना का मनोबल बढ़ाने और सीमावर्ती गाँवों की मदद के लिए निस्वार्थ खड़े रहे। 1971 के संकट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब पूर्वी पाकिस्तान से लाखों शरणार्थी भारत आए, तो स्वयंसेवकों ने भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाएँ जुटाईं, उनके आँसू पोंछे और उनका दर्द बाँटा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1984 के दंगों में भी स्वयंसेवकों ने अनेक सिख परिवारों को शरण दी।

राष्ट्रपतियों की मान्यता और संघ की प्रेरणा

उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम नानाजी देशमुख के चित्रकूट आश्रम में सेवा कार्य देखकर आश्चर्यचकित रह गए थे। वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी नागपुर में संघ कार्यालय के अपने दौरे के दौरान संघ की अनुशासन और सरलता से अत्यंत प्रभावित हुए थे।

हाल की आपदाओं और कोविड-19 महामारी में सेवा

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी पंजाब की बाढ़, हिमाचल और उत्तराखंड की आपदाएँ, या केरल के वायनाड की त्रासदी—इन सबमें स्वयंसेवक सबसे पहले मदद के लिए पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने संघ का साहस और सेवा भाव अपनी आँखों से देखा।

वनवासी समाज में आत्मजागरण

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है समाज के विविध वर्गों में आत्म-जागरण और गौरव की भावना जगाना। उन्होंने कहा कि संघ ने देश के सबसे दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में निरंतर काम किया है, विशेषकर हमारे लगभग दस करोड़ जनजातीय भाई-बहनों के बीच। जहाँ विभिन्न सरकारें अक्सर इन समुदायों की उपेक्षा करती रहीं, वहीं संघ ने उनकी संस्कृति, त्योहारों, भाषाओं और परंपराओं को प्राथमिकता दी। सेवा भारती, विद्या भारती और वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाएँ जनजातीय सशक्तिकरण के स्तंभ बनकर उभरी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज आदिवासी समुदायों में जो आत्मविश्वास जाग रहा है, वही उनके जीवन को बदल रहा है।

आदिवासी समाज में संघ की सेवाओं की सराहना

भारत के आदिवासी समाज के सबसे दूरस्थ इलाकों में निस्वार्थ भाव से काम कर रहे लाखों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि उनकी समर्पित सेवाओं ने राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि आदिवासी क्षेत्रों को ऐतिहासिक रूप से अनेक चुनौतियों और शोषणकारी अभियानों का सामना करना पड़ा है, और इस दौरान संघ ने दशकों तक चुपचाप और दृढ़तापूर्वक अपने त्याग और कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्र की रक्षा की है।

जातिगत भेदभाव और गांधीजी की प्रशंसा

प्रधानमंत्री ने कहा कि जातिगत भेदभाव और पिछड़ी प्रथाओं जैसी गहरी सामाजिक बीमारियाँ लंबे समय से हिंदू समाज के लिए गंभीर चुनौती रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लगातार इस मुद्दे का समाधान करने के लिए कार्य किया है। वर्धा में संघ शिविर में महात्मा गांधी की यात्रा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीजी ने खुले तौर पर संघ की समानता, करुणा और सद्भाव की भावना की प्रशंसा की थी। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार से लेकर आज तक संघ के हर प्रमुख व्यक्तित्व और सरसंघचालक ने भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ संघर्ष किया। श्री मोदी ने कहा कि पूज्य गुरुजी ने निरंतर “ना हिंदू पतितो भवेत” की भावना को आगे बढ़ाया, जिसका अर्थ है कि हर हिंदू एक ही परिवार का हिस्सा है और कोई भी नीचा या पतित नहीं है। उन्होंने पूज्य बालासाहेब देवरस को उद्धृत किया, जिन्होंने कहा था कि “यदि अस्पृश्यता पाप नहीं है, तो दुनिया में और कुछ भी पाप नहीं है।” उन्होंने जोड़ा कि पूज्य राजजू भैया और पूज्य सुदर्शन जी ने भी अपने सरसंघचालक कार्यकाल में इसी भावना को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने सामाजिक समरसता के लिए “एक कुआँ, एक मंदिर, और एक श्मशान” का स्पष्ट लक्ष्य समाज के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि संघ इस संदेश को देश के हर कोने में ले गया है, और भेदभाव, विभाजन तथा वैमनस्य से मुक्त समाज को प्रोत्साहित कर रहा है। यही समरसता की नींव है और समावेशी समाज का संकल्प है, जिसे संघ निरंतर नए उत्साह से मजबूत कर रहा है।

संघ की स्थापना और बदलती चुनौतियाँ

श्री मोदी ने कहा कि जब एक सदी पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी, तब समय की आवश्यकताएँ और संघर्ष अलग थे। भारत सदियों की राजनीतिक दासता से मुक्ति पाने और अपनी सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा था। उन्होंने कहा कि आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर है, तो चुनौतियाँ भी बदल गई हैं। आबादी का बड़ा हिस्सा गरीबी से बाहर आ रहा है, नए क्षेत्र युवाओं के लिए अवसर बना रहे हैं, और भारत वैश्विक स्तर पर—कूटनीति से लेकर जलवायु नीतियों तक—अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियों में अन्य देशों पर आर्थिक निर्भरता, राष्ट्रीय एकता को बाधित करने की साजिशें और जनसांख्यिकीय हेरफेर शामिल हैं। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने संतोष जताया कि सरकार इन मुद्दों का तेजी से समाधान कर रही है। एक स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने गर्व जताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने न केवल इन चुनौतियों की पहचान की है बल्कि उनसे निपटने के लिए ठोस रोडमैप भी तैयार किया है।

संघ के पाँच परिवर्तनकारी संकल्प

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाँच परिवर्तनकारी संकल्पों—आत्मजागृति, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण चेतना—को राष्ट्र की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वयंसेवकों के लिए शक्तिशाली प्रेरणाएँ बताते हुए श्री मोदी ने विस्तार से कहा कि आत्मजागृति का अर्थ है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी धरोहर व मातृभाषा पर गर्व करना। उन्होंने कहा कि आत्मजागृति का अर्थ स्वदेशी को अपनाना भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने समाज से आह्वान किया कि स्वदेशी को सामूहिक संकल्प बनाएं और “वोकल फॉर लोकल” अभियान को पूरी ताकत से सफल बनाएं।

सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता

प्रधानमंत्री ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी है।” उन्होंने सामाजिक समरसता को परिभाषित करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय की स्थापना है, जिसमें हाशिये पर खड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाती है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाता है। श्री मोदी ने बताया कि आज राष्ट्र को ऐसी चुनौतियों का सामना है जो सीधे उसकी एकता, संस्कृति और सुरक्षा पर हमला करती हैं—जैसे अलगाववादी विचारधाराएँ, प्रादेशिकता, जाति और भाषा के विवाद, और बाहरी ताकतों द्वारा भड़काई गई विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आत्मा हमेशा “विविधता में एकता” में रही है, और चेतावनी दी कि अगर यह सिद्धांत टूटता है, तो भारत की ताकत कमजोर हो जाएगी। इसलिए उन्होंने इस मूलभूत भावना को निरंतर मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जनसांख्यिकीय हेरफेर और आंतरिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सामाजिक समरसता को जनसांख्यिकीय हेरफेर और घुसपैठ से गंभीर चुनौती मिल रही है, जो सीधे आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की शांति को प्रभावित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी चिंता के कारण उन्होंने लाल किले से डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की थी। उन्होंने इस खतरे से निपटने के लिए सतर्कता और ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।

परिवार प्रबोधन की आवश्यकता

श्री मोदी ने आगे कहा कि परिवार प्रबोधन आज की आवश्यकता है। उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता की नींव कहकर परिभाषित किया और कहा कि यह भारतीय मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने परिवार के सिद्धांतों को बनाए रखने, बड़ों का सम्मान करने, महिलाओं को सशक्त बनाने, युवाओं में संस्कार भरने और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज दोनों स्तरों पर जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।

नागरिक अनुशासन और कर्तव्यबोध

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर युग में जो राष्ट्र आगे बढ़े, वे नागरिक अनुशासन की मजबूत नींव पर खड़े हुए। उन्होंने नागरिक अनुशासन को कर्तव्यबोध के विकास और हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने स्वच्छता को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय संपत्ति का सम्मान करने और कानून तथा नियमों का पालन करने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि यह संविधान की आत्मा है कि नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करें, और इस संवैधानिक भावना को निरंतर मजबूत करना आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि पर्यावरण की रक्षा वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों दोनों के लिए अनिवार्य है, और यह सीधे मानवता के भविष्य से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि हमें केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी पर भी ध्यान देना होगा। जल संरक्षण, ग्रीन एनर्जी और क्लीन एनर्जी जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाँच परिवर्तनकारी संकल्प

“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाँच परिवर्तनकारी संकल्प—आत्मजागृति, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण चेतना—ऐसे महत्वपूर्ण साधन हैं जो राष्ट्र की शक्ति को बढ़ाएँगे, भारत को विविध चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएँगे और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेंगे,” प्रधानमंत्री ने कहा।

2047 के भारत की परिकल्पना

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 का भारत एक गौरवशाली राष्ट्र होगा जो दर्शन और विज्ञान, सेवा और सामाजिक समरसता से गढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दृष्टि है, यही सभी स्वयंसेवकों का सामूहिक प्रयास और उनका गंभीर संकल्प है। उन्होंने देश को याद दिलाया कि संघ अटूट राष्ट्र-विश्वास पर बना है, सेवा की गहरी भावना से प्रेरित है, त्याग और तपस्या की अग्नि में तपकर निकला है, मूल्यों और अनुशासन से निखरा है और राष्ट्रीय कर्तव्य को जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य मानकर दृढ़ खड़ा है। उन्होंने जोड़ा कि संघ भारत माता की सेवा के महान स्वप्न से आंतरिक रूप से जुड़ा हुआ है।

संघ का आदर्श और लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा, “संघ का आदर्श भारतीय संस्कृति की जड़ों को और गहरा व मजबूत करना है। इसका प्रयास समाज में आत्मविश्वास और गर्व जगाना है। इसका लक्ष्य हर हृदय में लोकसेवा की ज्वाला प्रज्वलित करना है। इसकी दृष्टि भारतीय समाज को सामाजिक न्याय का प्रतीक बनाना है। इसका मिशन वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ को बुलंद करना है। इसका संकल्प राष्ट्र के लिए सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है।” इस ऐतिहासिक अवसर पर श्री मोदी ने सभी को बधाई दी।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया, जो राष्ट्र के लिए संघ के योगदान को दर्शाता है।

संघ की स्थापना और उद्देश्य

1925 में नागपुर, महाराष्ट्र में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में प्रारंभ हुआ जिसका लक्ष्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था।

संघ का ऐतिहासिक उदय

संघ एक अनोखा जनपोषित आंदोलन है, जिसका उदय सदियों की विदेशी दासता के उत्तर के रूप में हुआ। इसकी निरंतर प्रगति उस भावनात्मक जुड़ाव के कारण है जो भारत की राष्ट्रीय महिमा और धर्मनिष्ठ दृष्टि से संबंधित है।

संघ का मुख्य ज़ोर

संघ का मुख्य ज़ोर देशभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण पर है। यह मातृभूमि के प्रति भक्ति, अनुशासन, आत्मसंयम, साहस और वीरता की भावना को विकसित करना चाहता है। संघ का परम लक्ष्य “सर्वांगीण उन्नति” है, जिसके लिए हर स्वयंसेवक स्वयं को समर्पित करता है।

संघ का योगदान

पिछली सदी में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संघ के स्वयंसेवक बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इसके अलावा, संघ से संबद्ध विभिन्न संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, जनभागीदारी बढ़ाने और स्थानीय समुदायों को मजबूत करने में योगदान दिया है।

शताब्दी समारोह का महत्व

संघ के शताब्दी समारोह न केवल इसके ऐतिहासिक योगदान को सम्मानित करते हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा में इसके सतत योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी उजागर करते हैं।

Topics: नरेंद्र मोदी भाषणHedgewar RSS Founderसंघ 100 वर्षRSS शताब्दी समारोहस्मारक सिक्का RSSराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघस्मारक डाक टिकट RSSसामाजिक समरसताPM Modi RSS speechनरेंद्र मोदीModi Vijayadashami speechआरएसएससंघ के पाँच संकल्पसंघ शताब्दी वर्षस्मारक सिक्कासंघ का योगदानस्मारक डाक टिकट
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

RSS Akhil Bharatiya Sampark Pramukh Ramlal Speech Aligarh Keshav Seva Dham Northeast Children Panchjanya

“संघ ने पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने में निभाई प्रमुख भूमिका”: रामलाल जी

RSS Blood Donation Camp Haridwar Poster Release Yatindra Nagyan Gyanesh Thakral Panchjanya

डेंगू के प्रकोप के बीच हरिद्वार में RSS का बड़ा कदम: 4 अक्टूबर को विशाल रक्तदान शिविर, युवाओं से महादान की अपील!

RSS Centenary Year Gorakhpur Prant Pracharak Ramesh Speech Panchjanya

RSS Centenary Year: संघ की शताब्दी यात्रा सेवा और संस्कार का आधार, गोरखपुर में बोले प्रान्त प्रचारक रमेश

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

धर्म और राष्ट्र अलग नहीं…  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

RSS Sunil Ambekar Praises Captain Smit Machhar Flydubai Flight Saved Panchjanya

“पूरे देश को गर्व है”: कैप्टन स्मित मछार के साहस पर बोले संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर- वे वास्तव में एक सच्चे वीर हैं

संघ पर लगे आरोपों से लेकर वंदे मातरम तक, श्री वी भागैय्या ने रखी अपनी बात

Load More

ताज़ा समाचार

RSS Akhil Bharatiya Sampark Pramukh Ramlal Speech Aligarh Keshav Seva Dham Northeast Children Panchjanya

“संघ ने पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने में निभाई प्रमुख भूमिका”: रामलाल जी

मैड संधू (फाइल फोटो)

कमल कौर भाभी के बाद पंजाब में सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर मैड संधू की हत्या

विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना (बाएं) और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान।

पंजाब में सच बोलने की सजा: विधायक माइसरखाना आम आदमी पार्टी से सस्पेंड, सरकार की शिक्षा संबंधी अव्यवस्था पर उठाए थे सवाल

RSS Blood Donation Camp Haridwar Poster Release Yatindra Nagyan Gyanesh Thakral Panchjanya

डेंगू के प्रकोप के बीच हरिद्वार में RSS का बड़ा कदम: 4 अक्टूबर को विशाल रक्तदान शिविर, युवाओं से महादान की अपील!

RSS Centenary Year Gorakhpur Prant Pracharak Ramesh Speech Panchjanya

RSS Centenary Year: संघ की शताब्दी यात्रा सेवा और संस्कार का आधार, गोरखपुर में बोले प्रान्त प्रचारक रमेश

Rashtriya Seva Bharti Swavalamban Camp Varanasi Parag Abhyankar Exhibition Panchjanya

“पेट भरने के साथ व्यक्ति को स्वावलंबी बनाना उद्देश्य”: वाराणसी में राष्ट्रीय सेवा भारती वर्ग में बोले पराग अभ्यंकर

विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना (बाएं) और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान।

पंजाब में शिक्षा क्रान्ति की सचाई: फूट फूट कर रोए आप विधायक, बोले – स्कूलों में अध्यापकों की कमी, सुनवाई नहीं हो रही

काशी में पाकिस्तानेश्वर महादेव का नाम सिंधु गंगेश्वर करने को लेकर सिंधी समाज ने सौंपा ज्ञापन।

काशी में पाकिस्तानेश्वर महादेव का नाम सिंधु गंगेश्वर महादेव करने की मांग, जानिये पाकिस्तान से काशी कैसे पहुंचा शिवलिंग

प्रतीकात्मक चित्र

एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता

Madhav Srishti Naturopathy Centre Solan Inauguration Governor Vidya Bharti Panchjanya

सोलन में ‘माधव सृष्टि’ प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का शुभारंभ: राज्यपाल ने की सराहना, जानें केंद्र की बड़ी बातें!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies