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जीती आस्था, हारा सेकुलर झूठ

हिंदू विरोधी तत्व हिंदू मंदिरों और संतों को बदनाम करने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को उतारू हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि चाहे कर्नाटक के धर्मस्थल का मामला हो, अमेरिका में अक्षरधाम मंदिर पर लगे आक्षेप या फिर आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव पर लगे आरोप, ये सब फर्जी सिद्ध हो रहे हैं­

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Sep 30, 2025, 11:20 pm IST
inविश्लेषण, धर्म-संस्कृति
श्री मंजूनाथ मंदिर, धर्मस्थल, कर्नाटक

श्री मंजूनाथ मंदिर, धर्मस्थल, कर्नाटक

सनातनियों की आस्था, मंदिरों, उनके साधु-संतों और मान-बिंदुओं पर चोट करना कुछ सेकुलरों की आदत बन चुकी है। हालांकि बाद में ऐसे लोगों की पोल-पट्टी खुल ही जाती है। इसके बाद ऐसे लोग बहुत ही बेशर्मी के साथ अपना बचाव करते हैं। ताजा मामला ‘धर्मस्थल’ से जुड़ा है। यह धर्मस्थल कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिले में एक नगर है, जो पुराने और भव्य मंदिरों के लिए जाना जाता है। शायद मंदिरों की इस नगरी से विदेशी पैसे पर पलने वाले कुछ तत्व इतने चिढ़ते हैं कि उन्होंने इस स्थान को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र तक रच डाला। हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है, लेकिन अब तक जो कुछ सामने आया है, उससे षड्यंत्र की ‘बू’ आ रही है।

यह षड्यंत्र इस साल जुलाई में शुरू हुआ। यहां के प्रसिद्ध श्री मंजुनाथ मंदिर के पूर्व सफाई कर्मचारी सी.एन. चिन्नैया ने 4 जुलाई को दावा किया कि उसे इस क्षेत्र में ‘सैकड़ों शवों’ को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। चिन्नैया के अनुसार, “कुछ वर्षों में कुछ लोगों की हत्या करके उनके शवों को जमीन में दफना दिया गया।” उसने इस घटना का कालखंड 1995 से 2014 के बीच का बताया। उसके इस आरोप के बाद धार्मिक जगत के लोग सकते में आ गए, तो दूसरी ओर राजनीतिक पारा चढ़ गया। भाजपा और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दाैर शुरू हो गया।

एस.आई.टी. का गठन

कर्नाटक की वर्तमान कांग्रेस सरकार भी हिंदू विरोधी ही है। इसलिए उसे लगा कि इस बहाने एक बार फिर से हिंदुओं और उनके आस्था केन्द्रों को बदनाम किया जा सकता है। उसने तुरंत इस मामले की जांच के लिए 19 जुलाई को पुलिस महानिदेशक प्रणब मोहंती के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) का गठन कर दिया। एस.आई.टी. ने 12 एकड़ में फैले मंदिर के आसपास जंगली क्षेत्र में 17 स्थानों पर खुदाई की, लेकिन कहीं कुछ विशेष नहीं मिला। इसके बाद एस.आई.टी. ने झूठे दावे करने और फर्जी प्रमाण देने के आरोप में 23 अगस्त को चिन्नैया को गिरफ्तार कर लिया।

न्यायालय में चिन्नैया ने माना कि उसने झूठ बोला था। पर उसने जो खुलासा किया है, वह एक गंभीर षड्यंत्र की ओर संकेत करता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, “चिन्नैया ने एस.आई.टी. की जांच में खुलासा किया कि पिछले वर्ष किसी ने उससे संपर्क किया और पैसे देने का वादा किया। उसे धर्मस्थल के पास लोगों को मारने और सैकड़ों शवों के गढ़े होने का झूठ फैलाना था, ताकि मंदिर की छवि खराब हो सके।’’ उसने यह भी बताया, “मुझे बेंगलुरु में प्रशिक्षण दिया गया था। मुझे बताया गया था कि पुलिस की पूछताछ के दौरान कैसे जवाब देना है। मैं मास्टरमाइंड के निर्देशों के अनुसार काम करूंगा। मैं यहां सिर्फ एक किरदार हूं, मास्टरमाइंड कोई और है।”

हालांकि चिन्नैया ने अपने झूठ को साबित करने के लिए न्यायालय में एक मानव खोपड़ी प्रस्तुत की और दावा किया कि यह उन पीड़ितों में से एक की है, जिन्हें उसने दफनाया था। लेकिन न्यायालय में वह यह नहीं बता सका कि उसे यह खोपड़ी कहां से मिली। एस.आई.टी. ने न्यायालय को बताया कि उसके द्वारा बताए गए 18 में से 17 स्थानों से कुछ भी नहीं मिला। एक जगह हड्डियां बरामद हुईं, लेकिन आरंभिक जांच से पता चला कि वे हाल ही में हुई एक आत्महत्या के मामले की थीं। यानी चिन्नैया ने जो दावा किया, वह गलत होता दिख रहा है। यही कारण है कि कर्नाटक के संत और आम हिंदू मान रहे हैं कि यह षड्यंत्र के अलावा और कुछ नहीं है।

मंजुनाथ मंदिर के सेवा कार्य

श्री मंजुनाथ मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना है। यहां भगवान मंजुनाथेश्वर की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है। यह मंदिर अपने सामाजिक कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां रोजाना हजारों लोगों को भोजन कराया जाता है। युवाओं को शिक्षा प्रदान की जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित किए जाते हैं। इसकी सामाजिक शाखा श्री क्षेत्र धर्मस्थल ग्रामीण विकास परियोजना (एस.के.डी.आर.डी.पी.) गरीबों को सूदखोरों से बचाने के लिए उन्हें कर्ज देती है, जिससे हजारों परिवार लाभान्वित हुए हैं। मंदिर ‘जन जागृति वेदिके’ अभियान के तहत 1.3 लाख से अधिक लोगों को नशे से मुक्त कर चुका है। एस.डी.एम. मेडिकल ट्रस्ट के अस्पताल गरीबों को मुफ्त या सस्ता इलाज प्रदान करते हैं। मंदिर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित कर दहेज और जातिवाद जैसी बुराइयों का विरोध करता है। 60 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और खेती, व्यापार तथा शिक्षा के लिए कर्ज ले रही हैं। बुजुर्गों और असहायों को 110 करोड़ रु. की पेंशन और डेयरी किसानों को 37.85 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है।

आरोपों से मुक्त जग्गी वासुदेव

प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव को भी बदनाम करने का प्रयास हुआ, लेकिन आरोप लगाने वाले का तर्क न्यायालय में नहीं टिका। बता दें कि सितंबर, 2024 में कोयंबतूर के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर एस. कामराज ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि उनकी दो बेटियां— गीता (42 वर्ष) और लता (39 वर्ष) जग्गी वासुदेव की संस्था ‘ईशा फाउंडेशन’ के आश्रम में बंधक बनाकर रखी गई हैं और उन्हें बहकाया गया है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि फाउंडेशन युवा महिलाओं को संन्यासी बनने के लिए प्रेरित करता है, जबकि सद्गुरु ने अपनी बेटी की शादी कर दी। उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर, 2024 को तमिलनाडु पुलिस को ईशा फाउंडेशन से संबंधित सभी आपराधिक मामलों की जांच करने को कहा। इसके परिणामस्वरूप 1 अक्तूबर, 2024 को 150 पुलिसकर्मियों ने फाउंडेशन के आश्रम में छापेमारी की। इसके बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। गीता और लता ने सर्वोच्च न्यायालय में स्वयं कहा कि वे अपनी इच्छा से कोयंबतूर स्थित ईशा योग केंद्र में रह रही हैं। इसके बाद न्यायालय ने मामला बंद कर दिया।

आरोप निकला निराधार

अमेरिका में श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था (बी.ए.पी.एस.) को बदनाम करने के लिए जो आरोप लगे थे, उन पर विराम लग चुका है। गत दिनों अमेरिका के न्याय विभाग ने बी.ए.पी.एस. और उसके सहयोगी संगठनों के विरुद्ध चल रही जांच को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया। इस संबंध में न्यूयॉर्क स्थित बी.ए.पी.एस. ने बताया कि जांच में किसी भी संबंधित संस्था या व्यक्ति पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। इस पर बी.ए.पी.एस. ने कहा, ”यह निर्णय हमारी उस बात को और भी मजबूती देता है, जिसमें हम कहते आ रहे हैं कि स्वामिनारायण अक्षरधाम, जो शांति, सेवा और भक्ति का स्थान है, हजारों श्रद्धालुओं की निष्ठा, प्रेम और स्वेच्छा से की गई सेवा से बना है।” बता दें कि यह जांच मई, 2021 में न्यू जर्सी के रॉबिंसविल स्थित बी.ए.पी.एस. मंदिर में हुई छापेमारी के बाद शुरू हुई थी। उस समय मंदिर निर्माण में लगे कुछ लोगों ने श्रम कानूनों के उल्लंघन की बात करते हुए संस्था पर कई तरह के आरोप लगाए थे।

एन.आई.ए. जांच की मांग

इस मामले की जांच एन.आई.ए. से कराने की मांग के साथ गत 4 सितंबर को ‘सनातन संत नियोग’ के बैनर तले कर्नाटक के कुछ संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वीरशैव लिंगायत पंचमसाली पीठ के वचनानंद स्वामी और सात अन्य प्रमुख संतों ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया है कि ‘धर्मस्थल’ को भी उसी तरह निशाना बनाया जा रहा है, जैसे ‘सबरीमाला’ और ‘तिरुपति’ जैसे अन्य हिंदू तीर्थस्थलों को बनाया गया है।

संतों ने कहा कि उन्हें एस.आई.टी. की जांच पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंदिरों के शहर ‘धर्मस्थल’ के विरुद्ध षड्यंत्र का पर्दाफाश होना चाहिए, इसलिए मामले को एन.आई.ए. को सौंप दिया जाना चाहिए। संतों के इस बयान के तुरंत बाद कर्नाटक सरकार ने कहा कि एन.आई.ए. जांच की जरूरत नहीं है, एस.आई.टी. की जांच ही पर्याप्त होगी। यानी कांग्रेस सरकार इस जांच को अपने हाथ से बाहर नहीं होने देना चाहती। वह ऐसा क्यों कर रही है, इसे बताने की जरूरत नहीं है। यही कारण है कि इस मामले को कर्नाटक भाजपा ने जोर-शोर से उठाया। यही नहीं, भाजपा ने ‘चलो धर्मस्थल’ नाम से एक यात्रा निकाली, जिसमें हजारों हिंदुओं ने भाग लिया।

हालांकि इस मामले की जांच अभी चल रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जांच से पूरे मामले पर से पर्दा उठ जाएगा, लेकिन कर्नाटक सरकार के हिंदू-विरोधी कार्यों को देखते हुए कुछ लोग इस जांच पर ही सवाल उठा रहे हैं। इसलिए एस.आई.टी. को बहुत ही सतर्कता और निष्पक्षता के साथ अपनी जांच पूरी करनी चाहिए।

Topics: हिंदू विरोधी तत्वअमेरिका में अक्षरधाम मंदिरगुरु जग्गी वासुदेवसनातनियों की आस्थासेकुलर झूठएस.आई.टी. का गठनमंजुनाथ मंदिरपुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्थाहिंदू मंदिरपाञ्चजन्य विशेष
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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