कोई सिरफिरा देश किस हद तक गिर सकता है, इसका नवीनतम उदाहरण पेश किया है गिरगिट की तरह रंग बदलते पाकिस्तान ने। पाकिस्तान दुबई में पूरे एशिया कप टी-20 क्रिकेट के दौरान लगातार शेखचिली की तरह विषम स्थितियां पैदा करता रहा। पाकिस्तानी टीम ने टूर्नामेंट को बाधित करने के इरादे से कभी बहिष्कार की धमकी दी तो कभी भारतीय टीम के हाथ मिलाए जाने से इनकार करने पर आंसू बहाती दिखी। आईसीसी ने जब उसकी हरकतों को नजरअंदाज किया तो नापाक इरादे के साथ उसके खिलाड़ी मैदान पर नोकझोंक पर उतारू हो गए और आपत्तिजनक इशारे करने लग गए।
पाकिस्तानियों की बेशर्मी
कभी रायफल खुद के सीने पर दागने का इशारा करने लगे तो कभी भारतीय खुफिया ड्रोन को गिराने पर इतराते हुए बताने की कोशिश करते रहे जैसे राफेल या मिग 21 गिरा दिया हो। इतना कुछ होने के बाद जब भारत ने पाकिस्तान को एशिया कप के दौरान हुए तीन मुकाबलों में शर्मनाक ढंग से रौंद दिया तो पीसीबी का चेयरमैन मोहसिन नकवी विजेता ट्रॉफी को ही चोर की तरह लेकर मैदान से बाहर भाग गया। जेंटलमैन गेम के तौर पर माना जाने वाला खेल क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई टीम जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनती है, फिर भी उसे पुरस्कार स्वरूप विजेता ट्रॉफी नहीं दी गयी हो।
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मुंह की खाता रहा है पाकिस्तान
भारतीय क्रिकेट प्रबंधन की ओर से स्पष्ट इनकार के बावजूद मोहसिन नकवी एशियाई क्रिकेट परिषद चेयरमैन के तौर पर भारतीय टीम को विजेता ट्रॉफी देने के लिए बच्चों की तरह जिद पर अड़ा रहा। लेकिन नकवी भूल गया कि वह पाकिस्तान का इंटिरियर मिनिस्टर और पीसीबी का चेयरमैन भी है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का द्विपक्षीय रिश्ता नहीं रखना चाहता है। भारत ने कूटनीतिक ढंग से तमाम मौकों पर साबित किया है कि द्विपक्षीय मौके पर वह पाकिस्तान से मुखातिब होना तो दूर, नफरत में आंखें तरेर कर भी नहीं देखना चाहता है।
चाहे मामला ऑपरेशन सिंदूर के तहत घर में घुसकर आतंकी व उसके ठिकानों को जमींदोज करने का हो, या शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पूरी तरह नजरअंदाज करने का, या फिर पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में शहबाज शरीफ को एक बार फिर भारत के खिलाफ आग उगलने और घड़ियाली आंसू बहाने पर पर भारतीय राजनयिक पेटल गहलौत ने दुनिया के सामने नंगा करके रख दिया। पेटल गहलौत के भाषण के दौरान शहबाज की घिघ्घी बंधी हुई थी, पर शर्म के मारे जमीन में समाने के लिए उसे जगह भी मयस्सर न थी। यही नहीं, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी यूएनजीओ में अपने भाषण में स्पष्ट तौर पर कहा – पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद का केन्द्र है। आश्चर्य होता है कि विश्व स्तर पर पाकिस्तान की इस तरह कलई खुलने के बावजूद उसे शर्म क्यों नहीं आती है।
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ऑपरेशन सिंदूर का विजय “तिलक”
बहरहाल, टी-20 रैंकिंग में विश्व की नंबर एक भारतीय टीम बेखौफ अंदाज में खेलते हुए एशिया कप जीतने में सफल रही। टूर्नामेंट में एकमात्र अजेय रही भारतीय टीम ने पाकिस्तान को तीन बार (ग्रुप, सुपर-4 और फाइनल) तीन बार पटखनी दी। 7वें रैंकिंग की पाकिस्तानी टीम भारत के सामने खेल के हर विभाग में मात खाती रही। अभिषेक शर्मा एशिया कप में पाकिस्तान के लिए खौफ बने रहे। मैन ऑफ द टूर्नामेंट अभिषेक ने अभिषेक शर्मा ने 7 मैचों में 3 अर्धशतकों सहित सर्वाधिक 309 रन बनाए। दूसरी ओर, गेंदबाजी में कुलदीप यादव ने 6 मैचों में सर्वाधिक 16 विकेट झटकते हुए पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया। पाकिस्तान के लिए अबुझ पहेली बने रहे कुलदीप ने उसके खिलाफ तीन मैचों में 11 विकेट झटकते हुए भारत को नौवीं बार एशिया कप खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
पर हमें अंत में आतंकी देश की जलील हरकर भी देखने को मिली। जहां हक न चले, वहां लूट सही – पुरानी परंपरा रही है पाकिस्तान की। इस बार भी ओछी हरकत कर गया पाकिस्तान। भारतीय टीम ने जब मोहसिन नकवी से विजेता ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया तो वह ट्रॉफी लेकर मैदान से बाहर आ गया। एशिया कप 2025 में पाकिस्तान की हरकतों को खेलप्रेमी एक काला अध्याय के रूप में याद रखेंगे।
गौर करें तो भारत ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए एशिया कप खिताब जीता। अब अगर भारतीय टीम नहीं चाहती है कि खून से रंगे हाथों से वह विजेता ट्रॉफी ले तो इसमें गलत तो कुछ है नहीं। भारत ने प्रस्ताव भी रखा था कि एशियाई क्रिकेट परिषद के उपाध्यक्ष के हाथों विजेता ट्रॉफी लेने के लिए उनकी टीम तैयार है, लेकिन पाकिस्तान के दागदार हाथों से उसे किसी भी तरह का सम्मान पाना गंवारा नहीं है। हां, क्रिकेट मैदान पर भी धमाकेदार जीत दर्ज कर भारतीय टीम ऑपरेशन सिंदूर का विजय तिलक जरूर लगा आयी।

















