पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को सख़्ती से नकार दिया था। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस दावे के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध टालने के लिए मध्यस्थता की थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से पाकिस्तान की बातचीत
अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में डार ने बताया कि इस्लामाबाद ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का मुद्दा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। इस पर रूबियो ने साफ कहा कि भारत किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का समर्थन नहीं करता। डार ने ट्रम्प के उस दावे का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने 10 मई को दोनों परमाणु शक्तियों के बीच संघर्षविराम कराने का श्रेय खुद को दिया था।
भारत का रुख : वार्ता केवल द्विपक्षीय मुद्दा
डार के अनुसार, 10 मई को जब अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो के ज़रिये संघर्ष विराम का प्रस्ताव आया, तब उन्हें बताया गया था कि भारत और पाकिस्तान की वार्ता किसी तटस्थ स्थान पर होगी। लेकिन 25 जुलाई को वॉशिंगटन में रूबियो से दोबारा मुलाक़ात के दौरान उन्होंने पूछा कि उन वार्ताओं का क्या हुआ, तो रूबियो ने दोहराया कि भारत इसे सख़्ती से द्विपक्षीय मुद्दा मानता है।
ट्रम्प के दावों को चुनौती
डार का यह बयान ट्रम्प के बार-बार किए गए इस दावे को चुनौती देता है कि अमेरिका की मध्यस्थता से भारत-पाकिस्तान के बीच “संभावित परमाणु युद्ध” टला।
बता दें कि भारत ने स्पष्ट किया था कि 10 मई का संघर्षविराम दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर्स जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशन्स) के बीच सीधे सैन्य-स्तर की बातचीत से हुआ था। यह संघर्षविराम अप्रैल 22 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नौ आतंकी ठिकाने नष्ट किए गए थे।
पाकिस्तान की वार्ता पर स्थिति
इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान भारत से वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन यह वार्ता व्यापक होनी चाहिए, जिसमें आतंकवाद, व्यापार, अर्थव्यवस्था और जम्मू-कश्मीर जैसे सभी मुद्दे शामिल हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान बातचीत के लिए “भीख” नहीं मांगेगा।
डार ने कहा—“हम तैयार हैं, लेकिन भारत की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं है। बातचीत दो तरफ़ा प्रक्रिया है, जब तक भारत खुद तैयार नहीं होगा, हम किसी पर बातचीत थोप नहीं सकते।”

















