ओडिशा के केन्दुझर जिले के घसिपुरा ब्लॉक के गंपुर पंचायत की जनजातीय बस्ती में रहने वाले छह परिवारों के लगभग 40 सदस्य अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। कुछ महीनों पहले, ये लोग ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर अपनी पारंपरिक संस्कृति और हिंदू धर्म को छोड़कर ईसाइयत को अपनाने के लिए प्रेरित हुए थे। अब, अपनी भूल को स्वीकार करते हुए, उन्होंने सामूहिक रूप से ‘घर वापसी’ की है। केन्दुझर जिले के धर्म जागरण समन्वय के कार्यकर्ताओं और गांव के लोगों की उपस्थिति में उनका घर वापसी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां उन्होंने अपने स्वधर्म में लौटने का संकल्प लिया। घर वापसी करने वाले परिवार मुंडा व संथाल जनजाति के हैं।
इस गांव में कन्वर्जन की सूचना मिलने के बाद से ही धर्म जागरण समन्वय विभाग के वरिष्ठ कार्यकर्ता उनसे संपर्क में थे। उन्होंने कनवर्टेड परिवारों से संवाद कर उन्हें पुनः अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का आग्रह किया, जिसके परिणामस्वरूप ये परिवार वापस हिंदू धर्म में लौट आए। घर वापसी करने वालों में केशव मुंडा, गिदा हेम्ब्रम, रवि मुंडा, लव मुंडा, कुश मुंडा, हरि मुंडा, दुर्गा हेम्ब्रम और अन्य शामिल हैं।‘घर वाप सी’ करने वाले परिवारों को भगवान जगन्नाथ और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें प्रदान की गईं। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने इस अवसर पर सामूहिक शपथ ली कि वे आने वाले दिनों में अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ हिंदू रीति-नीति और परंपराओं का पालन करेंगे।
घर वापसी करने वाले लोगों ने बताया कि ईसाई मिशनरियों ने उन्हें किस प्रकार भ्रमित किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक नहीं था और ईसाई मत के प्रचारक उनके गांव में आए थे। इन प्रचारकों ने उन्हें समझाया कि ईसा मसीह की शरण में जाने पर उनका स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा। उनके बहकावे में आकर उन्होंने अपनी मूल संस्कृति को त्याग दिया और ईसाई बन गए। ईसाई धर्म अपनाने के बाद वे अपनी संस्कृति से कट गए थे और अपने त्योहार नहीं मना पा रहे थे। इस कारण, जब धर्म जागरण समन्वय के कार्यकर्ता उनके पास आए और उन्हें समझाया कि हमें अपने मूल में लौटना चाहिए, तो वे घर वापसी के लिए राजी हो गए। अपने स्वधर्म में वापसी करने के बाद उन्हें काफी आनंद और हर्ष की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जनजातीय समाज के अन्य लोग, जो किन्हीं कारणों से कनवर्ट हो गए हैं, उन्हें भी घर वापसी कराने का प्रयास करेंगे।
घर वापसी करने वाली एक जनजातीय लड़की ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद उन्हें काफी कष्ट हो रहा था क्योंकि वे प्रकृति की पूजा नहीं कर पा रहे थे और गांव में अपने समाज के लोगों के साथ समाज के त्योहारों को एक साथ नहीं मना पा रहे थे। यह बात उनके लिए बहुत दुखदायी थी। अब यह अत्यंत खुशी की बात है कि वे अपने स्वधर्म में वापस आ गए हैं और अपने गांवों में अपने समाज के लोगों के साथ त्योहारों को अत्यंत प्रसन्नता के साथ बिना किसी रोक-टोक के मना सकेंगे। इस घर वापसी कार्यक्रम में केन्दुझर से सांसद के स्थानीय प्रतिनिधि शिवेंद्र चक्र, धर्म जागरण समन्वय के वरिष्ठ कार्यकर्ता शरत चंद्र स्वाईं, प्रशांत चक्र, प्रशांत बिश्वाल, सामाजिक कार्यकर्ता अंजन बेहेरा, हैपी पात्र, विकास चक्र, रवीन्द्र पटनायक और अन्य लोग भी उपस्थित थे।

















