तमिलनाडु बीजेपी के राज्य सचिव अश्वथामन अल्लिमुथु ने 12 मार्च 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में जो पर्यावरण संकट चल रहा है, वह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं है। इसके साथ-साथ सांस्कृतिक और सभ्यतागत विविधता का नुकसान भी जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने परिषद से भारत में हो रहे अवैध धर्मान्तरण पर लगाम लगाने की अपील भी की।
प्रकृति पूजा और पर्यावरण
अश्वथामन ने कहा कि लोग आमतौर पर ग्लोबल वार्मिंग को सिर्फ वैज्ञानिक नजरिए से देखते हैं। लेकिन इसके सांस्कृतिक पहलू को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन सभ्यताएं, जिनमें प्रकृति की पूजा और अनेक देवी-देवताओं की मान्यता थी, अपने आप में विविध जीवनशैली और खपत के तरीके पैदा करती थीं। इससे पर्यावरण पर दबाव कम पड़ता था।
उन्होंने “सभ्यता” और “धर्म” के बीच साफ अंतर बताया। उनके अनुसार, आधुनिक धार्मिक ढांचे अक्सर “एक ईश्वर, एक रीति-रिवाज” की बात करते हैं। इससे सबकी जीवनशैली एक जैसी हो जाती है, जो ज्यादा खपत वाली होती है और पृथ्वी के लिए नुकसानदायक है।

इतिहास का दिया उदाहरण
अश्वथामन ने चेतावनी देते हुए कहा, “हम पहले ही मिस्र और रोमन जैसी महान सभ्यताओं को धार्मिक रूपांतरण के कारण खो चुके हैं।” उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा सभ्यताओं की रक्षा करना बहुत जरूरी है, ताकि पर्यावरण और बिगड़ने से रोका जा सके।
BJP State Secretary @asuvathaman addressed the UNHRC in Geneva.
He called for an end to forced religious conversions and said Hinduism is an ancient civilization, not just a religion.
He also linked the protection of ancient cultures with the global climate conversation. pic.twitter.com/QjDLtBKQtY
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) July 26, 2026
पीएम मोदी का दिया हवाला
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सभ्यतागत आत्म-सम्मान” वाले वैश्विक आह्वान का जिक्र किया। अपने गृहनगर पनरुति (तमिल नाडु) की गदिलम नदी का उदाहरण दिया। स्थानीय मान्यता है कि यह नदी भगवान विष्णु के लिए बनाई गई थी। अश्वथामन ने कहा कि ऐसे पवित्र कथाएं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करती हैं।
UNHRC से अपील
अपनी बात पूरी करते हुए अश्वथामन ने UNHRC से आग्रह किया कि जहां प्राचीन सभ्यताएं अभी भी जीवित हैं, वहां तेजी से हो रहे धार्मिक रूपांतरणों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने इसे सिर्फ सांस्कृतिक संरक्षण की बात नहीं, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।

















