जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान जो हिंसा हुई, उसकी जांच अब मुख्य रूप से डिजिटल सबूतों के आधार पर चल रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच को मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से पता चल रहा है कि भीड़ को भड़काने और हालात को बिगाड़ने की कोशिश काफी सोची-समझी लगती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में पाकिस्तान और बांग्लादेश से चलाए जा रहे कुछ संदिग्ध डिजिटल हैंडल्स का नाम सामने आया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 10 विदेशी हैंडलर्स प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों से संपर्क में थे। वे इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लगातार निर्देश और संदेश भेज रहे थे।
जांच कैसे आगे बढ़ रही है
पुलिस ने पूरे मामले को समझने के लिए स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट को जिम्मेदारी दी है। एसीपी और इंस्पेक्टर रैंक के करीब 10 अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल से मिले ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और दूसरे डिजिटल सबूतों का बारीकी से विश्लेषण किया। टीम ने जगह का दोबारा दौरा भी किया और फुटेज को मिलाकर देखा कि हिंसा शुरू होने से पहले और दौरान कौन-कौन सक्रिय था।
जांच सिर्फ वीडियो तक नहीं रुकी। पुलिस ने डंप डेटा, मैनुअल निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने यह देखा कि घटनास्थल के वीडियो सबसे पहले किन व्हाट्सएप, टेलीग्राम या स्नैपचैट ग्रुप्स में शेयर किए गए, उन्हें किसने आगे बढ़ाया और वे कितनी तेजी से लोगों तक पहुंचे। इस ट्रेल से कई अकाउंट्स और संपर्क संदेह के घेरे में आए हैं।
चैट्स और विदेशी संपर्क
IFSO यूनिट ने अब तक करीब 400 लोगों की व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल बातचीत की जांच की है। कुछ मैसेजेस में प्रदर्शनकारियों को आक्रामक होने, पुलिस से टकराव बढ़ाने और स्थिति बिगाड़ने की बातें मिली हैं। पुलिस इन मैसेजेस की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि उन्हें अदालत में ठोस सबूत के रूप में पेश किया जा सके।
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जांचकर्ताओं के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर कुछ लोग लगातार विदेश में बैठे संदिग्ध संपर्कों से बात कर रहे थे। वे वहां की पल-पल की जानकारी शेयर कर रहे थे और मिले निर्देशों के आधार पर भीड़ को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। अगर ये बातें पुष्ट होती हैं तो यह कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की एक बड़ी कोशिश हो सकती है।
आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग
दिल्ली पुलिस ने फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का इस्तेमाल करके प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की। अब तक 216 ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है। इनमें सबसे ज्यादा 26 पश्चिमी दिल्ली, 23 उत्तर-पूर्वी दिल्ली और 22 दक्षिण दिल्ली से हैं। बाकी दूसरे जिलों से जुड़े हैं। इनकी पहचान सोशल मीडिया पोस्ट्स, सीसीटीवी और अन्य डिजिटल रिकॉर्डिंग से हुई है। पुलिस अभी सभी डिजिटल सबूतों का तकनीकी और फोरेंसिक सत्यापन कर रही है।

















