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ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की 58,000 एकड़ जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की

ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की विशाल संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने और संरक्षित करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Mahak Singh
Sep 5, 2025, 12:35 pm IST
in ओडिशा
भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ

ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की विशाल संपत्तियों को वापस लेने और उनकी सुरक्षा के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इस कदम को राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों में फैली 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी की विरासत और संपत्तियों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने संवाददाताओं को बताया कि भगवान जगन्नाथ के नाम पर लगभग 58,000 एकड़ भूमि पंजीकृत है। इनमें से लगभग 36,000 से 37,000 एकड़ भूमि का सत्यापन और दस्तावेजीकरण पूरा हो चुका है। शेष भूमि की जांच और अभिलेखों को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार तेजी से काम कर रही है ताकि भगवान जगन्नाथ की सभी संपत्तियों का उचित तरीके से पंजीकरण, संरक्षण और पुनः प्राप्ति हो सके। प्रशासन इन संपत्तियों को अतिक्रमण और दुरुपयोग से बचाकर उनके मूल उद्देश्य को बहाल करने के लिए कृतसंकल्प है।

अधिकारियों ने बताया कि पुनः प्राप्त की गई भूमि को संरचित प्रबंधन के तहत लाया जाएगा। इन संपत्तियों का उपयोग मंदिर की सेवा, कल्याणकारी गतिविधियों और संबंधित धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इससे होने वाली आय सीधे मंदिर और श्रद्धालुओं के हित में लगाई जाएगी। कानून मंत्री ने यह भी बताया कि संपत्तियों के वास्तविक स्थान और सीमा का आकलन किया जा रहा है, जिनमें ओडिशा से बाहर स्थित ज़मीनें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “सरकार इन अमूल्य जमीनों को परंपरा और धरोहर के अनुरूप वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध है।”

यह पहल मई में आए ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू की गई है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार पाणिग्राही की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार को जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों की मज़बूत सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। अदालत ने मंदिर की भूमि के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, सही ढंग से नामांतरण (म्यूटेशन) और स्पष्ट प्रबंधन दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि भगवान जगन्नाथ की सभी संपत्तियों को भूमि अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड में सटीक रूप से दर्ज किया जाना चाहिए। अदालत ने चेतावनी दी थी कि किसी भी अवैध नामांतरण या संशोधन को तुरंत रद्द किया जाए। इसके साथ ही, श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम की धारा 16(2) की समीक्षा का आदेश भी दिया गया था, जो संपत्ति संबंधी प्रावधानों से जुड़ी है।

अदालत ने मंदिर प्रशासन (SJTA) और कानून विभाग के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें मंदिर की संपत्तियों के हस्तांतरण, पट्टे और नामांतरण से जुड़े मामलों की निगरानी और अवैध लेनदेन या प्रशासनिक अनियमितताओं की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि सरकार पहले ही इन निर्देशों को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और कानूनी सत्यापन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य सरकार की यह पहल पिछले कई दशकों में जगन्नाथ मंदिर की भूमि-संपत्तियों को सुरक्षित करने का सबसे व्यापक प्रयास माना जा रहा है। ओडिशा और राज्य के बाहर फैली हज़ारों एकड़ ज़मीन का प्रबंधन लंबे समय से प्रशासनिक चुनौती रहा है। सरकार का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर सत्यापन और प्रबंधन प्रक्रिया से न केवल मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा होगी, बल्कि इनका उपयोग श्रद्धालुओं की भलाई और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह प्रयास जितना संपत्ति की सुरक्षा का है, उतना ही धरोहर को बचाने का भी है। पुनः प्राप्त भूमि आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व की धरोहर साबित होगी।

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