भुवनेश्वर: भारत ने समुद्री मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सतत गहरे समुद्री मत्स्य पालन के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (LoA) व्यवस्था की राष्ट्रीय शुरुआत की। भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस ऐतिहासिक पहल का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने ‘ओडिशा डीप सी फिशरीज मिशन डॉक्यूमेंट (2026-2036)’ का भी अनावरण किया। यह दस्तावेज राज्य के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के विकास, आधुनिक तकनीक के उपयोग, सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन और ब्लू इकोनॉमी को गति देने के लिए अगले दस वर्षों की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
गहरे समुद्र में सतत मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
नई लेटर ऑफ ऑथराइजेशन व्यवस्था के तहत भारत के पात्र ध्वजांकित मछली पकड़ने वाले जहाजों को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में नियंत्रित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से मछली पकड़ने की अनुमति मिलेगी। इस व्यवस्था के माध्यम से ट्यूना जैसी उच्च मूल्य वाली समुद्री प्रजातियों के सतत दोहन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य तटीय क्षेत्रों तक सीमित पारंपरिक मत्स्य गतिविधियों को गहरे समुद्र तक विस्तार देना है, जिससे मत्स्य उत्पादन, निर्यात क्षमता और मछुआरा समुदायों की आय में वृद्धि हो सके।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिससे भारत विश्व के प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यातक देशों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्तमान में देश की अधिकांश मत्स्य गतिविधियां समुद्र तट से 40-50 समुद्री मील के दायरे में केंद्रित हैं। नई नीति के माध्यम से गहरे समुद्री क्षेत्रों की संभावनाओं का उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है।

मछुआरों और संस्थाओं को वितरित किए गए LoA
भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पात्र मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों, समुद्री सहकारी समितियों और संस्थाओं को लेटर ऑफ ऑथराइजेशन वितरित किए गए। इनमें नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड सहित कई संस्थाएं शामिल थीं। इन प्राधिकरण पत्रों के माध्यम से पात्र भारतीय जहाज अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों और सतत मत्स्य प्रबंधन मानकों के अनुसार भारत के EEZ से बाहर गहरे समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने का कार्य कर सकेंगे।
उपराष्ट्रपति ने ओडिशा की समुद्री विरासत को किया याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने भाषण की शुरुआत ओड़िया भाषा में भगवान जगन्नाथ को नमन करते हुए की। उनके इस प्रयास की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
उन्होंने ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि बाली यात्रा और बोइत बंदाण जैसे पर्व राज्य की प्राचीन समुद्री यात्रा और व्यापारिक परंपरा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा डीप सी फिशरीज मिशन आधुनिक विज्ञान, तकनीक और सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से इस गौरवशाली समुद्री विरासत को नई दिशा देगा।
तकनीक और विज्ञान से बदलेगा मत्स्य क्षेत्र
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री क्षेत्र में हुए बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि मछुआरा समुदाय अपनी मेहनत और समर्पण से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि समुद्री खाद्य पदार्थ दुनिया में प्रोटीन के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और डिजिटल प्रणालियों के उपयोग से मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है और मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था से होगा संचालन
उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा सतत गहरे समुद्री मत्स्य पालन के लिए 2025 के दिशा-निर्देशों के तहत LoA प्राप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यह प्राधिकरण केवल निर्धारित जहाजों को जारी किया जाएगा और इसे हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। इससे समुद्री संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
उन्होंने बताया कि LoA व्यवस्था को ReALCraft Fishing Vessel Registration Portal से जोड़ा गया है, जिससे ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल स्वीकृति, वास्तविक समय निगरानी और नियमों के अनुपालन को आसान बनाया जा सकेगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह तकनीक आधारित प्रणाली मछुआरों और जहाज संचालकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी तथा भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगी।
कार्यक्रम के दौरान ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गोवा, आंध्र प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सहित कई तटीय राज्यों के लाभार्थियों को LoA प्रदान किए गए। ओडिशा के पारादीप सहित विभिन्न तटीय क्षेत्रों के समुद्री सहकारी संगठनों और जहाज संचालकों के प्रतिनिधियों को भी यह प्राधिकरण पत्र प्रदान किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में भारत की जिम्मेदार उपस्थिति को मजबूत करेगी और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करेगी।
भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए नया अध्याय
उपराष्ट्रपति ने इस पहल को भारत की समुद्री विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और मछुआरा समुदायों के संयुक्त प्रयासों से मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।

उन्होंने कहा कि भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबा समुद्री तट और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है, जिसमें अपार समुद्री संपदा मौजूद है।
उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में लगभग आठ प्रतिशत योगदान देता है। यह क्षेत्र करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका का आधार है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि हाई सी फिशिंग पहल से मत्स्य उत्पादन, निर्यात और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इससे मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
राज्यपाल ने LoA कार्यक्रम को बताया मछुआरा समुदाय के लिए लाभकारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने कहा कि भारत का विशाल समुद्री तट और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) देश में मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लगभग 5 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (LoA) कार्यक्रम देशभर के मछुआरा परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि ओडिशा जैसे तटीय राज्यों को इस पहल से विशेष लाभ मिलेगा। सतत समुद्री मत्स्य पालन, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से मछुआरा समुदाय के लिए नए अवसरों का सृजन होगा।
मुख्यमंत्री ने ओडिशा से राष्ट्रीय शुरुआत को बताया गौरव का विषय
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय मंत्रियों का भगवान जगन्नाथ की पवित्र भूमि पर स्वागत करते हुए कहा कि ओडिशा से राष्ट्रीय स्तर पर LoA कार्यक्रम की शुरुआत होना राज्य के लिए गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों द्वारा समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के लिए समुद्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि राज्य के करीब 6 लाख समुद्री मछुआरों की जीवनरेखा और पहचान है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों को श्रेय देते हुए कहा कि भारत अब गहरे समुद्री मत्स्य पालन और समुद्री विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।
ओडिशा बनेगा समुद्री मत्स्य पालन का प्रमुख केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाला EEZ मछुआरों के लिए अपार संभावनाएं लेकर आया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा अपनी 575 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा के साथ देश का प्रमुख समुद्री मत्स्य केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने ओडिशा डीप सी फिशरीज मिशन को राज्य के दीर्घकालीन ब्लू इकोनॉमी विजन से जोड़ते हुए कहा कि यह मिशन ओडिशा विजन-2036 और विकसित भारत-2047 के अनुरूप तैयार किया गया है।
इस मिशन का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर आधारभूत संरचना के माध्यम से राज्य के समुद्री संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है।
आधुनिक मत्स्य अवसंरचना पर होगा जोर
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार पारादीप, धामरा, गोपालपुर, चांदीपुर और अस्तरंगा जैसे क्षेत्रों में आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, थोक मछली बाजार और एक्वा पार्क विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए ReALCraft पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार मत्स्य सहकारी समितियों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPO) को मजबूत करने, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, मूल्य श्रृंखला विकास, आधुनिक आधारभूत संरचना और बेहतर बाजार संपर्क पर विशेष ध्यान देगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले दस वर्षों में ओडिशा में 150 नए अत्याधुनिक डीप सी फिशिंग वेसल्स तैनात किए जाएंगे और मौजूदा 500 मछली पकड़ने वाले जहाजों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इससे उत्पादन, निर्यात और मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ब्लू इकोनॉमी से ओडिशा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत: धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा डीप सी फिशरीज मिशन ब्लू इकोनॉमी की संभावनाओं का उपयोग करते हुए राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और हजारों मछुआरा परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा। भुवनेश्वर में उपराष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि यह पहल न केवल मछुआरा समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायक होगी, बल्कि राज्य की मत्स्य सहकारी समितियों को भी सीधे लाभ पहुंचाएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में मत्स्य पालन क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय बाजार व्यवस्था में व्यापक सुधार हुए हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने एक वर्ष में समुद्री खाद्य निर्यात में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की है और निर्यात में 21 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। प्रधान ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र की यह प्रगति भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए LoA व्यवस्था मछुआरा समुदाय को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने ReALCraft डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया है, जिसके माध्यम से मछुआरे और जहाज मालिक बिना जटिल कागजी प्रक्रिया के ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और मामूली शुल्क देकर LoA प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अभियान का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधान ने ओडिशा के मछुआरों, सहकारी समितियों और संबंधित संस्थाओं से राज्य को देश का अग्रणी मत्स्य और समुद्री खाद्य उत्पादन केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

केंद्र सरकार ने समुद्री मत्स्य क्षेत्र में सुधारों को दी गति
केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार समुद्री मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक नीतिगत सुधार लागू कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और जिम्मेदार समुद्री संसाधन उपयोग के माध्यम से भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा दी जा रही है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, मुख्य सचिव अनु गर्ग, भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, तटीय राज्यों के प्रतिनिधि, मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य, FFPO प्रतिनिधि, समुद्री उद्यमी और बड़ी संख्या में मछुआरा समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

















