एक देश-एक चुनाव विधेयक : JPC बैठक में Justice संजीव खन्ना ने कहा- 'यह संविधान की बुनियादी संरचना का उल्लंघन नहीं करता'
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एक देश-एक चुनाव विधेयक : JPC बैठक में Justice संजीव खन्ना ने कहा- ‘यह संविधान की बुनियादी संरचना का उल्लंघन नहीं करता’

एक देश, एक चुनाव विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में पूर्व न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि यह प्रस्ताव संविधान की बुनियादी संरचना का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका, व्यावहारिक चुनौतियों और आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों पर जोर दिया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 20, 2025, 09:18 pm IST
inभारत, दिल्ली
एक देश-एक चुनाव विधेयक: JPC बैठक में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने रखी अपनी राय

एक देश-एक चुनाव विधेयक : JPC बैठक में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने रखी अपनी राय

भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित एक देश, एक चुनाव विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की हालिया बैठक खत्म हो गई है. बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने समिति के समक्ष विधेयक की संवैधानिक वैधता, व्यावहारिक पहलुओं और चुनाव आयोग की भूमिका पर अपनी राय रखी.

संवैधानिक वैधता पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का मत

प्रस्तावित विधेयक को लेकर  न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि यह विधेयक भारतीय संविधान की बुनियादी संरचना (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं करता,न ही इसका स्वरूप या उद्देश्य संविधान में प्रत्यक्ष रूप से कोई संशोधन करता है. उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव संवैधानिक रूप से अनुमेय है, बशर्ते उसमें आवश्यक सुरक्षा उपायों और संतुलन का ध्यान रखा जाए.

विधेयक के तहत भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को दी गई शक्तियों पर न्यायमूर्ति खन्ना ने विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि ECI एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है जिसे देश में चुनाव कराने की गहरी समझ है. उसे राज्यों में विधानसभा चुनाव स्थगित करने की शक्ति देना तर्कसंगत है.  हालांकि,उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की शक्तियों का दुरुपयोग रोकने के लिए भी ठोस सुरक्षा प्रावधानों को विधेयक में शामिल किए जाने चाहिए.

बिल के उद्देश्यों और संभावित चुनौतियां

जानकारी के लिए बता दें कि इस प्रस्तावित बिल का उद्देश्य ,चुनावों की आवृत्ति कम करना, संसाधनों की बचत करना और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है. जैसा की इसके नाम से स्पष्ट है. हालांकि न्यायमूर्ति खन्ना मानना है कि इस उद्देश्य को हर परिस्थिति में पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा, विशेषकर जब कोई विधानसभा समय से पूर्व भंग हो जाए और इसको लेकर उन्होंने कूछ सुझाव भी दिए हैं. न्यायमूर्ति खन्ना ने सुझाव दिया कि चुनावों को एक निर्धारित तिथि पर कराने का प्रावधान सीधे ही कानून में शामिल किया जाए, ताकि अनिश्चितता न रहे. ज्ञात हो कि वर्तमान में चुनाव की तिथि की अधिसूचना राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाती है.

क्या है एक देश-एक चुनाव.?

आसान भाषा में समझा जाए तो एक देश, एक चुनाव का अर्थ है कि भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं. ताकि बार-बार चुनाव की प्रक्रिया से बचा जा सकेगा. इसके कारण  भारी वित्तीय खर्च, प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव और राजनीतिक अस्थिरता को रोका जा सकेगा.

हालांकि अगर  प्रस्तावित विधेयक कानून बन जाता है तो पहली बार नहीं होगा जब देश में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे. भारत में 1951, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए थे. लेकिन 1968-69 में कुछ विधानसभाएं समय से पूर्व भंग हो गईं, जिससे यह प्रणाली टूट गई और तब से अब तक अलग-अलग चुनाव होते आ रहे हैं.

कब प्रस्तावित हुआ था विधेयक

दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार ने 129 वां संविधान संशोधन के तहत एक देश-एक चुनाव  विधेयक सदन में पेश किया था. जिसके बाद फिर इन विधेयकों को भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में गठित JPC (संयुक्त संसदीय समिति) को भेजा गया है. सदन में पेश हुए विधेयक को विपक्षी दल  संघवाद, राज्यीय स्वायत्तता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर खतरा मानते हैं. बता दें कि BJP ने इसे अपने 2014 और 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया था.

इस विषय पर गहराई से अध्ययन हेतु पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी. समिति ने 2024 में केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें विधेयक के संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है. JPC द्वारा प्राप्त विशेषज्ञ रायों और सुझावों के आधार पर अब इस पर अंतिम मसौदा तैयार होगा, जिसे संसद के दोनों सदनों में विचार और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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