कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने विवादास्पद बयानों से घिरते जा रहे हैं। उनके विरुद्ध देश के अनेक न्यायालयों में मुकदमे चल रहे हैं। हालांकि राहुल कहते हैं कि उन पर जो भी मुकदमे हैं, वे राजनीतिक विरोधियों की साजिश हैं। इसलिए ऐसे मुकदमों से वे नहीं डरते हैं। लेकिन उनके व्यवहार और कर्म से लगने लगा है कि अब वे मुमदमों से डरने लगे हैं। यही नहीं, वे इन मुकदमों को लटकाने और भटकाने का प्रयास भी कर रहे हैं।
बता दें कि कुछ समय पहले राहुल गांधी ने लंदन में भाषण देते हुए स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के प्रति अपमानजक बातें की थीं। इसके बाद वीर सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर ने उनके विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर किया था। अभी यह मामला पुणे की सांसद/विधायक अदालत में चल रहा है। इस मामले की सुनवाई तेजी से चल रही है और उम्मीद है कि जल्दी ही इसका निपटारा हो जाएगा। शायद राहुल गांधी ऐसा नहीं चाहते हैं और इसलिए 13 अगस्त को एक नई चाल चली गई। इस दिन राहुल के वकील मिलिंद पवार ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को याचिकाकर्ता सत्यकी सावरकर से जान का खतरा है। दिन भर यह खबर चली। इससे लोगों में राहुल के प्रति एक अलग धारणा बनी होगी, इसको नकारा नहीं जा सकता है। बाद में वकील मिलिंद पवार ने यह बेतुका तर्क देते हुए याचिका वापस ले ली कि ‘हमने राहुल गांधी की जानकारी के बिना, स्वतंत्र रूप से याचिका दायर की थी।’ इस बीच सत्यकी सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर ने भी राहुल गांधी के विरुद्ध जालसाजी का मामला दायर किया।
सूत्रों के अनुसार अभी तक राहुल गांधी ने वीर सावरकर के बारे में अपनी अपमानजनक टिप्पणी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इसके बजाय वे मामले को उसके मूल विषय से भटकाने के लिए अदालत में नई-नई याचिकाएं लगाते रहते हैं। शुरुआत में उन्होंने यह दावा करते हुए एक याचिका दायर की थी कि उनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है। बाद में उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते, उन्हें संसद सत्र में भाग लेना है और इसलिए वे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर नहीं हो सकते। अंततः उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ और वे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से न्यायालय में हाजिर हुए और उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताया।
बता दें कि मुकदमे की शुरुआत से ही राहुल गांधी का व्यवहार छल वाला रहा है। कानून के जानकार मानते हैं कि उनका यह दावा कि ‘उन्हें नहीं पता था कि उनके वकील कौन सी याचिका दायर करने वाले हैं, बेईमानी का एक और उदाहरण है।’ अगर उनके वकील उनकी सहमति के बिना अदालत में गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो इसका मतलब या तो यह है कि राहुल गांधी मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं, या फिर सांसदों/विधायकों के लिए विशेष अदालत की कद्र नहीं करते, या फिर वे अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

















