भारत का नवोत्थान
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विभाजन – विभीषिका : भारत का नवोत्थान

आज का भारत मात्र भूगोल का विस्तार नहीं, एक जीवंत, जागृत और आत्मगौरव से ओतप्रोत राष्ट्र का परिचायक

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 12, 2025, 02:54 pm IST
in भारत, विश्लेषण

India Pakistan Partition : आज का भारत केवल विभाजन की स्मृति नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आर्थिक प्रगति व वैश्विक नेतृत्व के नए अध्याय की ओर दृढ़ता से अग्रसर है। आर्थिक-सैन्य शक्ति, वैश्विक कूटनीति, तकनीकी नवाचार व युवा आधारित विकास नीतियां मिलकर भारत को 21वीं सदी की प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं। गत एक दशक में भारत ने विकास के ऐसे प्रतिमान स्थापित किए हैं, जो न देशवासियों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि देश को विश्व में स्थापित करते हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास’ देश के विकास को समावेशी, समानतामूलक और अवसर आधारित दिशा दे रहा है। यह नीति सभी वर्गों (गरीब, महिला, किसान, युवा, दलित व वंचित) को विकास की मुख्यधारा में लाकर सामाजिक-आर्थिक विषमता दूर कर रही है।

आर्थिक शक्ति का नवोदय : एक समय था, जब भारत को ‘तीसरी दुनिया’ की अर्थव्यवस्था माना जाता था, किंतु आज यह विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह उपलब्धि इसने जापान और ब्रिटेन को पछाड़ कर हासिल की है। 2025-26 के बजट में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान इस बात का प्रमाण है कि भारत की वित्तीय रीढ़ अब पहले से कहीं अधिक मज़बूत है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों ने उद्यमिता को गांव-गांव तक पहुंचाया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की नॉमिनल जीडीपी 4.19 खरब डॉलर हो गई है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 6 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। नीति आयोग के अनुसार, यदि यही रफ्तार रही तो भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह उपलब्धि भारत की औद्योगिक वृद्धि, नीतिगत सुधारों, वैश्विक निवेश आकर्षण और आर्थिक उत्पादन क्षमता की मजबूती को दर्शाती है।

विभाजन-विभीषिका: एक ऐतिहासिक त्रासदी थी भारत विभाजन…

डिजिटल क्रांति का अगुआ : डिजिटल भुगतान में भारत अब विश्व में प्रथम स्थान पर है। इसकी डिजिटल विकास यात्रा दुनिया के लिए अध्ययन का विषय बन चुकी है। 90 करोड़ से अधिक लोगों के पास इंटरनेट, 130 करोड़ से अधिक के पास आधार कार्ड, और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से प्रतिदिन अरबों रुपये के लेन-देन, यह सब उस नवभारत की पहचान है, जो तकनीक को केवल सुविधा नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम मानता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर : ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से रक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है और देश तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रक्षा आयात पर निर्भरता घटकर लगभग 4 प्रतिशत, जबकि निर्यात बढ़कर 21,083 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने 2025 तक रक्षा निर्यात 35,000 करोड़ और 2029 तक उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपये पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। बीते एक दशक में रक्षा उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। 411 रक्षा उपकरणों को नकारात्मक आयात सूची में डालकर उन्हें स्वदेशी बनाने की पहल हुई है, जिसमें HAL, BEL, BDL और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, आईएनएस विक्रांत युद्धपोत, अग्नि मिसाइल प्रणाली, ड्रोन, साइबर व एआई आधारित हथियार प्रणालियों में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ रही है। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसी परियोजनाएं भारत को आयातक से निर्यातक की श्रेणी में ले जा चुकी हैं।

अंतरिक्ष विज्ञान में वैश्विक उपस्थिति : चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और गगनयान की तैयारी यह दर्शाती है कि भारत की वैज्ञानिक दृष्टि केवल सीमाओं तक सीमित नहीं। इसरो अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण सेवा देने वाली संस्था नहीं, बल्कि ‘न्यू स्पेस इंडिया’ के माध्यम से व्यावसायिक अंतरिक्ष सेवाओं में भी अग्रणी बन चुका है। विश्व के अनेक राष्ट्र अपने उपग्रह भारत से प्रक्षेपित करवा रहे हैं।
वैश्विक कूटनीति में निर्णायक भूमिका : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय कूटनीति ने विदेश नीति को पुनर्परिभाषित किया है। ब्रिक्स, जी-20, क्वाड और I2U2 जैसे मंचों पर भारत एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभरा है। यूक्रेन संकट हो या इस्राइल-गाजा संघर्ष, दुनिया ने भारत की संतुलित और स्पष्ट नीति को सराहा है।

तुष्टीकरण और मुस्लिम अलगाववाद : भारतीय राष्ट्रभाव के सामने कट्टरपंथी चुनौती

आज भारत न किसी से डरता है और न किसी का पिछलग्गू है। यह बल्कि वैश्विक मंच पर आत्मगौरव के साथ खड़ा एक स्वतंत्र व संप्रभु राष्ट्र है। यूक्रेन युद्ध के समय जब पूरा विश्व दो ध्रुवों में बंटा हुआ था, तब भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी विदेश नीति किसी दबाव में नहीं चलेगी। भारत ने जहां मानवीय सहायता भेजी, वहीं तेल व खाद्यान्न की आवश्यकता अनुसार रूस से व्यापारिक संबंध बनाए रखे। अमेरिका, फ्रांस, इस्राएल और खाड़ी देश—हर देश से भारत ने अपने हित और सिद्धांतों के आधार पर संबंध स्थापित किए। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के मूल मंत्र पर चलते हुए इसने जी-20 की अध्यक्षता की और वैश्विक दक्षिण की आवाज को बुलंद किया। यह स्वतंत्र नीति ही है, जिसके चलते भारत अमेरिका, रूस, ईरान और अरब—सभी से समान सामरिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखने में सफल रहा है।

कृषि से नवाचार तक की यात्रा : आज भारतीय किसान केवल परंपरागत कृषि तक सीमित नहीं। ड्रोन तकनीक, फसल बीमा, ई-नाम पोर्टल और जैविक कृषि की ओर बढ़ता कदम यह दर्शाता है कि भारत की कृषि नीति अब उत्पादन से अधिक, गुणवत्ता, निर्यात और किसान हित पर केंद्रित है। कृषि निर्यात में 2024 में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। नई शिक्षा नीति के तहत नवाचार-सक्षम, कौशल उन्मुख और भारतीय ज्ञान आधारित पाठ्यक्रम भारतीय युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए दक्ष बना रहा है। स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत व कौशल विकास योजनाएं आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण का आधार बन चुकी हैं।

पाकिस्तान और दीर्घकालिक सुरक्षा संकट : विभाजन का मोल

संस्कृति और विरासत का पुनरुत्थान : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हो या काशी विश्वनाथ, महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण, यह सब भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रमाण हैं। योग, आयुर्वेद और भारतीय परंपराओं को अब केवल भारत ही नहीं, विश्व भी आत्मसात कर रहा है। यह वह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है, जो आधुनिकता के साथ भारत की आत्मा को जोड़ता है।
नारी शक्ति का सशक्तिकरण : ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से लेकर महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन देने तक, नारी सशक्तिकरण अब भाषणों तक सीमित नहीं। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। ओलंपिक से लेकर स्टार्टअप्स तक, हर क्षेत्र में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

पर्यावरण और सतत विकास में सहभागिता : भारत ने पेरिस समझौते में अपने वचनों से कहीं अधिक कार्य कर दिखाया है। 2070 तक ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना और ‘लाइफ मिशन’ जैसे प्रयास सिद्ध करते हैं कि भारत विकास के साथ पर्यावरण की रक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है। आज विश्व भारत को पर्यावरणीय संतुलन के प्रेरक राष्ट्र के रूप में देख रहा है।
आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद पर कठोर प्रहार : अनुच्छेद-370 की समाप्ति हो या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की निर्णायक विजय, भारत अब सुरक्षा मामलों में नरमी नहीं, कठोर निर्णयों का पक्षधर है। आतंकी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी, सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया व साइबर सुरक्षा में सुदृढ़ता दर्शाते हैं कि देश किसी भी प्रकार की आंतरिक चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत की बढ़ती शक्ति और समग्र विकास यात्रा प्रमाणित करती है कि 21वीं सदी न केवल एशिया की, बल्कि भारत की सदी है। यह भारत अब केवल भूतकाल की महिमा का गौरवगान नहीं करता, भविष्य का निर्माता भी बन चुका है। वह भारत, जो वैदिक ऋ षियों की तपोभूमि था, आज विज्ञान के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। यह अभ्युदय कोई संयोग नहीं, यह उस संकल्पशक्ति का परिणाम है, जो वर्षों की साधना व राष्ट्रहित में केंद्रित नीतियों से उपजा है। आर्थिक उदारीकरण, तकनीकी नवाचार, युवाओं का उत्थान और सक्रिय कूटनीति भारत के सामर्थ्य की नई नींव हैं। आज का भारत, भविष्य के एक स्वाभिमानी, आधुनिक और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र का प्रतीक है।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषPanchjanya SpecialTrue Stories of PartitionIndia Pakistan Partition StoriesHindus atrocities in Partitionभारत पाक बंटवारे की कहानीडिजिटल इंडियातीसरी दुनिया‘मेक इन इंडिया’स्टार्टअप इंडियाविभाजन विभीषिकाVibhajan Vibhishika
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