पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्हें जबरन सफाईकर्मी बनाए जाने का मामला सामने आया है। यह खुलासा एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन समुदायों को खतरनाक और बेहद कम वेतन वाली नौकरियों में धकेल दिया जाता है, और उन्हें न तो बुनियादी श्रम अधिकार मिलते हैं और न ही सम्मान।
यह रिपोर्ट “कट अस ओपन एंड सी दैट वी ब्लीड लाइक देम” (हमें चीरकर देखो, हमारा खून भी वैसा ही बहता है) शीर्षक से प्रकाशित हुई है। इसे एमनेस्टी ने पाकिस्तान की संस्था सेंटर फॉर लॉ एंड जस्टिस के साथ मिलकर तैयार किया है। इसमें लाहौर, कराची, बहावलपुर, उमेरकोट, इस्लामाबाद और पेशावर जैसे शहरों के 230 से ज्यादा सफाईकर्मियों के अनुभव शामिल हैं। इनमें से अधिकतर लोग ईसाई या “निचली जाति” के हिंदू हैं। सर्वे में 55% सफाईकर्मियों ने कहा कि उनकी भर्ती में जाति या धर्म का बड़ा रोल रहा। एक व्यक्ति ने बताया कि उसने बिजली मिस्त्री की नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन ईसाई होने के कारण उसे सिर्फ सफाई का काम दिया गया।
रिपोर्ट बताती है कि सफाईकर्मियों को कार्यस्थल और समाज में ‘चूहड़ा’, ‘भं*’ जैसे अपमानजनक शब्दों से बुलाया जाता है। उन्हें कई बार अलग बैठाया जाता है और अलग बर्तनों में खाना दिया जाता है। महिलाएं, खासकर ईसाई महिलाएं, सबसे गंदे और जोखिमभरे कामों में लगाई जाती हैं। उन्हें लिंग के आधार पर भी भेदभाव झेलना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 44% सफाईकर्मियों के पास स्थायी नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट है, जबकि 45% के पास कोई अनुबंध नहीं है। इससे उन्हें किसी भी तरह की कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती। उमेरकोट के एक सफाईकर्मी ने बताया कि वह 18 साल से दिहाड़ी पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया।
साथ ही, 55% कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करना पड़ता है, जिससे उन्हें त्वचा, सांस और संक्रमण जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इस्लामाबाद के एक सफाईकर्मी का हाथ संक्रमित सिरिंज से घायल हो गया, क्योंकि उनके पास दस्ताने नहीं थे। पाकिस्तान के संविधान में जातिगत भेदभाव पर कोई सीधी रोक नहीं है और न ही सफाईकर्मियों के लिए कोई मजबूत कानूनी सुरक्षा है। एमनेस्टी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह तुरंत भेदभाव-रोधी कानून बनाए, अल्पसंख्यकों को सिर्फ पहचान के आधार पर सफाई का काम देना बंद करे और सफाईकर्मियों को सुरक्षा और सम्मान दे।

















