पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में चल रहा जनांदोलन को अब वैश्विक समर्थन भी मिल रहा है। बिजली और आटे पर सब्सिडी जैसी बुनियादी मांगों से शुरू हुए इस संघर्ष ने पाकिस्तानी सरकार की पोल खोल कर रख दी है। बुधवार को रावलकोट में उमड़े हजारों लोगों के जनसैलाब ने जहां पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका और अब यह आंदोलन पूरी तरह से पाकिस्तानी हुकूमत के क्रूर दमन, मानवाधिकारों के हनन और क्षेत्रीय तानाशाही के खिलाफ एक बड़े जन-विद्रोह में बदल गया है।
वहीं दूसरी तरफ एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे संगठनों ने भी खुलकर इस दमन की निंदा की है। वह भी तब जब पाकिस्तानी सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट कर इस आंदोलन को दबाने की नाकाम कोशिश की।
रावलकोट में मारे गए निर्दोष नागरिकों के लिए उठी न्याय की मांग
दरअसल, बुधवार को रावलकोट की सड़कों पर आक्रोशित लोगों का जनसैलाब देखने को मिला। PoJK के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों नागरिकों ने रावलकोट में बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कई घंटों तक चला, जिसमें युवाओं, बुजुर्गों और स्थानीय नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसमें प्रदर्शनकारियों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर और तख्तियां दिखाई दीं जिन पर पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और क्षेत्र पर उसके अवैध कब्जे के खिलाफ नारे लिखे थे। यह दिखा रहा था कि स्थानीय लोग अब पाकिस्तान के इस कथित औपनिवेशिक शासन को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।
जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हाल ही में की गई अंधाधुंध गोलीबारी की तीखी आलोचना की। उन्होंने इस हिंसक कार्रवाई में मारे गए और घायल हुए मासूम नागरिकों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। कई घंटे तक चले इस प्रदर्शन में आए लोग जवाबदेही, नागरिक अधिकार और शांत विरोध प्रदर्शन पर फोर्स के इस्तेमाल का विरोध जताने को एकजुट हुए थे। JAAC के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे इस कत्लेआम का संज्ञान लें और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाएं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने लगाई पाकिस्तानी सरकार को फटकार
जैसे-जैसे PoJK में तनाव बढ़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी तेजी से हो रही है। वैश्विक मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक रिपोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तानी सरकार की चुप्पी और उसके नापाक इरादों का पर्दाफाश किया। संस्था ने आगामी क्षेत्रीय चुनावों जो आने वाली 27 जुलाई को होने वाले हैं, उससे ठीक पहले पाकिस्तान सरकार द्वारा किए जा रहे बर्बर क्रैकडाउन की कड़ी निंदा की।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए अपनी रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए। जैसे-
- पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रही पार्टी यानी जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। एमनेस्टी ने इस कदम को पूरी तरह से गैर-कानूनी, अनुचित और असंगत बताया है। संस्था का कहना है कि यह शांतिपूर्ण राजनीतिक सक्रियता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर एक सीधा और जानबूझकर किया गया हमला है।
- यह दमनकारी कार्रवाई तब और तेज हुई जब क्षेत्र की विधायिका के गठन और सीटों के बंटवारे को लेकर JKJAAC और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत पूरी तरह टूट गई।
- 5 जून 2026 को चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों ने पूरे PoJK में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया। क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और बाहरी लोगों को तुरंत इलाका छोड़ने की सख्त हिदायत दी गई। इसके बाद भारी मात्रा में फेड्रल अर्धसैनिक बलों (रेंजर्स) की तैनाती कर दी गई। एमनेस्टी के अनुसार, इन कदमों के पीछे वहां की हुकूमत का एकमात्र मकसद इस पूरे क्षेत्र को दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग करना और वहां हो रहे अत्याचारों की खबरों को बाहर आने से रोकना था।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के नेता बोले- ‘आजाद कश्मीर सिर्फ एक छलावा है’
इस आंदोलन को अब पाकिस्तान के भीतर ही अन्य दमित और सताए हुए समुदायों का खुला समर्थन मिल रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के प्रमुख डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। बलूच नेता ने पाकिस्तान के उस पाखंडी नैरेटिव को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके तहत वह इस क्षेत्र को ‘आजाद कश्मीर’ कहता है। डॉ. बलोच ने कहा कि यह क्षेत्र केवल नाम के लिए आजाद है, जबकि इसका पूरा प्रशासनिक और वित्तीय रिमोट कंट्रोल इस्लामाबाद में बैठे ब्यूरोक्रेट्स (नौकरशाहों) और रावलपिंडी के सैन्य कमांडरों के हाथ में है। कश्मीरी जनता ने जो अपने प्रतिनिधी चुने हैं उनके पास अपने फैसले लेने का कोई वास्तविक अधिकार नहीं है।
बलोच नेता ने कहा कि PoJK में बढ़ रहा जमीनी प्रतिरोध इस बात का प्रमाण है कि किसी भी संवेदनशील और जागरूक कौम को बंदूक की नोक या जबरदस्ती से लंबे समय तक गुलाम नहीं रखा जा सकता। पाकिस्तान अपनी सेना का इस्तेमाल करके बलूचिस्तान की तरह कश्मीर में भी असंतोष को दबाना चाहता है, लेकिन वह बुरी तरह विफल रहा है। डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने पाकिस्तान के संघीय ढांचे को ‘पंजाब प्रांत’ के वर्चस्व को बनाए रखने का एक औजार बताया जिसके तहत छोटे प्रांतों और क्षेत्रों का शोषण किया जाता है। उन्होंने पीओजेके के प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की इस लड़ाई को अपना समर्थन दिया। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी, बलूच, पश्तून और सिंधी समुदायों से अपील की कि वे अपने साझा अधिकारों और आजादी की इस ऐतिहासिक लड़ाई में एक-दूसरे के साझेदार बनें और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एकजुट होकर आवाज उठाएं। बलोच नेता ने कहा कि बलोच कौम भी आजादी कि इस लड़ाई में पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पार्टनर के रूप में उनके साथ खड़े हैं।
















