भारत में आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग में एक नया और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गुजरात एटीएस (एंटी-टेरेरिस्ट स्क्वॉड) ने बेंगलुरु से एक महिला को गिरफ्तार किया है, जिस पर अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के प्रचार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप है। इस महिला का नाम शमा परवीन अंसारी है, और खबरों के मुताबिक, उसने पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर को भारत पर हमला करने के लिए उकसाया था। यह सब उस वक्त हुआ जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।
कौन है शमा परवीन अंसारी?
शमा परवीन अंसारी बेंगलुरु के आरटी नगर इलाके में रहने वाली एक 30 साल की महिला हैं। वह एक कॉमर्स ग्रेजुएट हैं और पिछले पांच सालों से अपने छोटे भाई के साथ वहां रह रही थीं। गुजरात एटीएस ने 29 जुलाई 2025 को उनके घर पर छापा मारा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी में उनके पास से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ। जांच में पता चला कि शमा फोन और ईमेल के जरिए पाकिस्तानी संगठनों के संपर्क में थीं। यह बात तब सामने आई जब एटीएस ने कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट्स की जांच की।
सोशल मीडिया के लोगों को भड़काती थी
शमा परवीन पर आरोप है कि उसने दो फेसबुक पेज और एक इंस्टाग्राम अकाउंट चलाया। उसके 10,000 से ज्यादा फॉलोअर्स थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर वह AQIS और अन्य कट्टरपंथी प्रचारकों का भड़काऊ और भारत विरोधी कंटेंट शेयर करती थी। उसके पोस्ट में न सिर्फ हिंसा को बढ़ावा दिया जाता था, बल्कि भारत के खिलाफ “जिहाद” और “गजवा-ए-हिंद” जैसे उत्तेजक नारे भी शामिल थे। खास तौर पर, 9 मई 2025 को, जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, शमा ने एक फेसबुक पोस्ट में जनरल असीम मुनीर की तस्वीर के साथ लिखा, “यह सुनहरा मौका है… प्रोजेक्ट खलिफत को अपनाएं, इस्लाम को लागू करें, मुस्लिम जमीनों को एक करें और हिंदुत्व व सायनिज्म को खत्म करने के लिए आगे बढ़ें।” यह पोस्ट भारत के खिलाफ खुलेआम युद्ध की अपील थी।
ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक बड़ी सैन्य कार्रवाई थी, जो 7 मई 2025 को शुरू हुई। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित द रेजिस्टेंस फ्रंट का हाथ था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ा जाता है। भारत ने जवाब में पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। शमा का यह कदम ठीक उसी वक्त उठा, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था।
कट्टरपंथी प्रचार और उसका असर
शमा के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर AQIS के नेता मौलाना असीम उमर और अल-कायदा के पूर्व विचारक अनवर अल-अवलाकी के भाषणों को खूब शेयर किया गया। इसके अलावा, लाहौर की लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज का एक वीडियो भी पोस्ट किया गया, जिसमें भारत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की बात थी। एक अन्य वीडियो में AQIS का एक नेता “गजवा-ए-हिंद” का जिक्र करते हुए हिंदू समुदाय और भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा भड़काने की अपील कर रहा था। शमा का यह कदम न सिर्फ भारत की सुरक्षा के लिए खतरा था, बल्कि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश भी थी।
इसे भी पढ़ें: उत्तरकाशी में जल प्रलय: धराली में राहत कार्य तेज, 185 लोगों का रेस्क्यू, 30 से अधिक लापता
जांच में और क्या सामने आया?
एटीएस की जांच में पता चला कि शमा का एक अन्य गिरफ्तार व्यक्ति, मोहम्मद फैक से संपर्क था, जो दिल्ली से पकड़ा गया था। फैक भी AQIS के प्रचार में शामिल था और शमा के अकाउंट्स से कंटेंट डाउनलोड कर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करता था। शमा समेत पांच लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह गिरफ्तारी एक बड़े आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम है।
शमा परवीन की गिरफ्तारी से यह साफ होता है कि आतंकी संगठन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहे हैं। एटीएस अब इस नेटवर्क के अन्य कड़ियों की जांच कर रही है, ताकि ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह रोका जा सके।

















