क्या खिचड़ी पक रही है Harvard और Communist चीनियों के बीच! गहन जांच में जुटी US Congress की कमेटी
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क्या खिचड़ी पक रही है Harvard और Communist चीनियों के बीच! गहन जांच में जुटी US Congress की कमेटी

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हार्वर्ड पहले से ही यहूदी-विरोधी घटनाओं और डीईआई यानी 'डायवर्सिटी, इक्विटी, इंक्लूजन' की नीतियों को लेकर विवादों में है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 4, 2025, 02:56 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
हार्वर्ड और कम्युनिस्ट चीनियों के बीच पक रही है खिचड़ी

हार्वर्ड और कम्युनिस्ट चीनियों के बीच पक रही है खिचड़ी

अमेरिकी संसद ने हाल में एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने रखी है। इसमें हार्वर्ड विश्वविद्यालय और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच गहरे और संदिग्ध संबंधों का खुलासा किया है। यह मामला न केवल शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है, बल्कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव के खतरे को भी उजागर करता है, क्योंकि जिस प्रकार की चीजें सामने आई हैं उनसे साफ होता है कि कम्युनिस्ट विस्तारवादी चीन फिलहाल अपने धुर विरोधी अमेरिका में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों में अपने पैर पसारता जा रहा है। अमेरिकी संसद की जांच में पाया गया कि हार्वर्ड ने एक दशक से अधिक समय तक कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना या सीसीपी के नियंत्रण वाली संस्थाओं के साथ खुलकर साझेदारी बनाई हुई थी। हार्वर्ड कैनेडी स्कूल ने चीन की कार्यकारी नेतृत्व अकादमी पुदोंग के साथ सहयोग किया, जो सीसीपी के केंद्रीय संगठन विभाग के अधीन है। यह विभाग राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को प्रसारित करने और सीसीपी के भविष्य में उभरने वाले नेताओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करता है।

हार्वर्ड कैनेडी स्कूल ने चीन की कार्यकारी नेतृत्व अकादमी पुदोंग के साथ सहयोग किया, जो सीसीपी के केंद्रीय संगठन विभाग के अधीन है।

अमेरिकी संसदीय जांच में आए तथ्यों के आलोक में हार्वर्ड विश्वविद्यालय पर आरोप लगा है कि उसने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों को शी जिनपिंग विचारधारा से परिचित कराने में मदद की। यह विचारधारा चीन के सत्तावादी शासन को वैधता देती है और उस पर पार्टी के नियंत्रण को मजबूत करती है। सामने आई रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हार्वर्ड ने सिंक्यांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया था। यह संस्था उस प्रांत में उइगर मुसलमानों के दमन में शामिल बताई जा रही है।

सीसीपी का केंद्रीय संगठन विभाग राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को प्रसारित करने और सीसीपी के भविष्य में उभरने वाले नेताओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करता है

रिपोर्ट के सामने आने के बाद कुछ अमेरिकी सांसदों ने आशंका जताई है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय को कर-मुक्त स्थिति से बाहर हटाया जा सकता है। विश्वविद्यालय को सीसीपी से जुड़े पैसे के लेन—देन सहित सभी संबंधों की जानकारी 7 अगस्त तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हार्वर्ड पहले से ही यहूदी-विरोधी घटनाओं और डीईआई यानी ‘डायवर्सिटी, इक्विटी, इंक्लूजन’ की नीतियों को लेकर विवादों में है।

अमेरिकी में आम नागरिकों का मानना है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से यह अपेक्षा की जाती है कि वह बौद्धिक स्वतंत्रता और नैतिक मूल्यों का पालन करे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ संबंधों ने इस स्वतंत्रता पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस मामले पर विश्वविद्यालय के आलोचकों का कहना है कि हार्वर्ड ने स्वेच्छा से एक विदेशी शासन के हितों को पूरा करने की गलती की है।

यहां देख्ने वाली बात यह भी है कि क्या यह मामला केवल हार्वर्ड तक सीमित है? सवाल उठता है कि क्या कुछ अन्य अमेरिकी संस्थान भी तो कहीं चीन के प्रभाव में काम नहीं कर रहे हैं? अमेरिकी इतिहास के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सोच और नीतियों का प्रचार प्रसार और सीसीपी के अधिकारियों को प्रशिक्षण देना, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा हो सकता है। यह आवश्यक है कि शैक्षणिक संस्थान पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वतंत्रता को प्राथमिकता दें, न कि राजनीतिक लाभ या विदेशी सहयोग को।

Topics: अमेरिकाकम्‍युनिस्‍ट चीनAmericacpcstrategicXi JinpingCommunist Partyहार्वर्ड विश्वविद्यालयHarvard China linksUniversity
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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