Verdict on Malegaon Blast case : संघ ने बताया सत्य की जीत, विहिप ने की कांग्रेस से माफ़ी की मांग
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Verdict on Malegaon Blast case : संघ ने बताया सत्य की जीत, विहिप ने की कांग्रेस से माफ़ी की मांग

महाराष्ट्र के मालेगांव में वर्ष 2008 में हुए बम धमाके में छह लोगों की जान चली गई और लगभग 100 लोग घायल हुए थे। जानिए कैसे रची गई हिन्दू और भगवा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश... 

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 31, 2025, 07:44 pm IST
in भारत, दिल्ली, महाराष्ट्र
मालेगांव ब्लास्ट केस में आया कोर्ट का फैसला। साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों को बरी किया गया।

मालेगांव ब्लास्ट केस में आया कोर्ट का फैसला। साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों को बरी किया गया।

Malegaon Blast case : महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह समेत 7 आरोपियों को NIA की स्पेशल कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया है कि 29 सितंबर 2008 को किए गए बम ब्लास्ट में जिस बाइक का इस्तेमाल हुआ था, वह साध्वी प्रज्ञा की नहीं थी।

सत्य की हुई जीत : सुनील आंबेकर

अब इस मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी का बयाना सामने आया है। उन्होंने कहा- “मालेगांव विस्फोट मामले को लेकर आज के न्यायालय के निर्णय से सत्य स्पष्ट हुआ है। कुछ लोगों ने निजी हितों एवं राजनीतिक स्वार्थ के चलते सत्ता का दुरुपयोग करते हुए हिन्दू धर्म तथा समस्त हिन्दू समाज को आतंक से जोड़ने का कुत्सित प्रयास किया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया एवं तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आज अपने निर्णय से उन निराधार आरोपों को असफल किया है”

मालेगांव विस्फोट मामले को लेकर आज के न्यायालय के निर्णय से सत्य स्पष्ट हुआ है।
कुछ लोगों ने निजी हितों एवं राजनीतिक स्वार्थ के चलते सत्ता का दुरुपयोग करते हुए हिन्दू धर्म तथा समस्त हिन्दू समाज को आतंक से जोड़ने का कुत्सित प्रयास किया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया एवं तथ्यों के आधार… pic.twitter.com/swonufa2gu

— VSK BHARAT (@editorvskbharat) July 31, 2025


विश्व हिंदू परिषद का कांग्रेस पर हमला

वही विश्व हिंदू परिषद की तरफ से अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र कुमार जैन ने कहा- “जिहादी आतंकियों को बचाने के लिए कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद की जो झूठी कहानी रची थी उसका षड्यंत्र आज तार-तार हो गया है। राहुल गांधी समेत सभी कांग्रेसी नेताओं को केवल हिंदू समाज से ही नहीं अपितु सम्पूर्ण देश से माफ़ी माँगनी चाहिए”

जिहादी आतंकियों को बचाने के लिए कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद की जो झूठी कहानी रची थी उसका षड्यंत्र आज तार-तार हो गया है।

राहुल गांधी समेत सभी कांग्रेसी नेताओं को केवल हिंदू समाज से ही नहीं अपितु सम्पूर्ण देश से माफ़ी माँगनी चाहिए !

#malegaonblastcase pic.twitter.com/Ijl0sb5eXu

— Vishva Hindu Parishad -VHP (@VHPDigital) July 31, 2025


हिन्दू और भगवा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश 

बता दें कि महाराष्ट्र का मालेगांव और वर्ष 2008 का बम धमाका, जिसमें छह लोगों की जान चली गई और लगभग 100 लोग घायल हुए थे। उस समय अचानक मीडिया में शोर सुनाई दिया, भगवा आतंकवाद, हिन्‍दू आतंकवाद का। तत्कालीन राजनीतिक बयानबाजी और कुछ जांच एजेंसियों की सक्रियता ने जिस दिशा में इस केस को मोड़ा, उसने न सिर्फ एक घटना की जांच को प्रभावित किया, बल्कि पूरे एक धार्मिक समूह हिंदू धर्म को कठघरे में खड़ा कर दिया। इसके जो मुख्‍य किरदार उभरे, सुशील कुमार शिंदे, पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह। इनमें से दो तो देश के पूर्व गृह मंत्री तक रह चुके हैं।

इन्‍होंने अपने बयानों में प्रत्‍यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से “हिंदू आतंकवाद” शब्द का प्रयोग किया और इसे एक संगठित खतरे के रूप में स्‍थापित करने का प्रयास किया। लेकिन अब 31 जुलाई 2025 को विशेष राष्‍ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) कोर्ट का फैसला आया है। 17 वर्षों की लंबी सुनवाई के बाद तीन जांच एजेंसियों, चार न्यायाधीशों और तीन चार्जशीट के पश्‍चात न्यायालय इस निष्‍कर्ष पर पहुंचा कि हिन्‍दू आतंकवाद एक फेक नैरेटिव गढ़ा गया था। इसमें पकड़े गए सभी सात आरोपितों को ससम्‍मान दोष मुक्‍त किया जाता है।

ताश के पत्ते की तरह बिखर गए फर्जी सबूत 

एटीएस और एनआईए जैसी एजेंसियों की शुरुआती जांच में कई खामियां उजागर हुईं, तभी यह संदेह गहरा गया था कि उन पर भगवा आतंकवाद सिद्ध करने का गहरा राजनीतिक दबाव था। मालेगांव केस में मोटरसाइकिल का मालिकाना प्रमाण, फॉरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान जैसे साक्ष्‍य सभी बाद में कोर्ट में ताश के पत्‍तों की तरह बिखरते नजर आए। जो साक्ष्‍य कोर्ट के सामने रखे गए, वह सभी एक के बाद एक ढह गए। लेकिन इसके साथ आज कई सवाल खड़े हो गए हैं।

यह भी पढ़ें – कांग्रेस के बिगड़े बोल, अब रेणुका चौधरी ने कहा- ‘हिंदू भी आतंकवादी’

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्‍या उन्‍हें जो “हिन्दू” शब्‍द को बदनाम कर रहे थे, उन्‍हें भी कोई सजा मिलेगी?

वे नाम जिन पर लादा गया झूठ का पहाड़ 

जांच के दौरान जिन नामों को उछाला गया, उनमें कुल सात मुख्य आरोपी थे; साध्वी प्रज्ञा, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त मेजर), अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्व‍िवेदी, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी।

इन सभी पर यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

साध्वी प्रज्ञा को तो सालों जेल में बिताने पड़े। इन सभी को इतना प्रताड़‍ित किया गया कि उनके फेंफडों की झिल्ली फट गई, जिसके इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा. इसके बाद अस्पताल से छुट्टी के बाद उप पर इतना अत्याचार किया गया की उनकी रीड की हड्डी में भी चोट आई। दवाओं के प्रभाव से साध्‍वी प्रज्ञा को कैंसर तक की शिकार हो गईं।

यह भी पढ़ें – ‘फेफड़े की झिल्ली फटी, रीढ़ की हड्डी टूटी, लगातार बेल्टों से मारते रहे मुझे : साध्वी प्रज्ञा

लेकिन फिर भी जांच एजेंसियों को कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो इन सभी को मालेगांव बम ब्‍लास्‍ट से जोड़ पाता।

कोर्ट का फैसला : केवल धारणा के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता

इस संबंध में विशेष राष्‍ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) कोर्ट के न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने 31 जुलाई 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा, “अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा है कि धमाका जिस मोटरसाइकिल में हुआ, वह साध्वी प्रज्ञा की थी। बम निर्माण, योजना और निष्पादन से संबंधित कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जो अभियुक्तों को सीधे दोषी ठहरा सके।” कोर्ट ने यह भी कहा कि बाइक का चेसिस नंबर रिकवर नहीं हुआ। फिंगरप्रिंट नहीं मिले। घटनास्थल का पंचनामा ठीक से नहीं किया गया। सबूतों की चेन टूटी हुई पाई गई।

जबकि घटना के बाद उस समय सुशील कुमार शिंदे कह रहे थे कि आरएसएस और भाजपा आतंकवाद की ट्रेनिंग दे रही हैं… भगवा आतंकवाद एक सच्चाई है।”

मीडिया ट्रायल और भगवा आतंकवाद की फर्जी थ्योरी

दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेस नेताओं ने राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ को आतंकवाद से जोड़ने के लिए बार-बार बयान दिए। कई प्रमुख अंग्रेजी और हिंदी चैनलों ने बिना किसी ठोस सबूत के आरोपियों को “भगवा आतंकी” कहना शुरू कर दिया था। टीवी डिबेट्स में रास्‍वसंघ और उससे वैचारिक रूप से जुड़े संगठनों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन धमाकों से जोड़ने की कोशिश की गई। जिसमें कि कुछ पत्रकारों ने इसे “India’s Saffron Terror” जैसा फर्जी अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव बनाने की कोशिश की।

भगवा को बदनाम किया गया : साध्वी प्रज्ञा

न्‍यायालय से बाहर निकलते ही जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से इस प्रकरण के बारे में जानना चाहा, तब उनकी आंखें नम थीं, वहीं एक संतोष और चेहरे से आत्‍मिक प्रसन्‍नता भी झलग रही थी। वास्‍तव में ये उनके लिए ही नहीं इस केस में आरोपित बनाए गए सभी लोगों के लिए सुख-दुख का मिश्रित पल रहा है, जब उन्‍हें न्‍यायालय ने सभी आरोपों से मुक्‍त किया है। उन्होंने मीडिया से कहा, “मैं एक साध्वी थी, तपस्विनी थी। मुझे षड्यंत्र के तहत फंसाया गया। मेरे जीवन के बहुमूल्य वर्ष जेल में गुजरे। उन्होंने भगवा को बदनाम किया, लेकिन आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है।” उन्होंने आगे बताया कि कैसे-कैसे उन्‍हें इस पूरे मामले में जबरदस्त मानसिक, शारीरिक और सामाजिक पीड़ा दी गई।

हम निर्दोष थे, हैं और रहेंगे : मेजर रमेश चन्द्र उपाध्याय

सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय ने कहा है कि “हम पर झूठे आरोप लगाए गए। हम शुरुआत से ही निर्दोष थे। अब सत्य सामने आ गया है। यह देश की न्याय प्रणाली की जीत है और अब समय है कि साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया जाए।”

Topics: विश्व हिंदू परिषद मालेगांवसाध्वी प्रज्ञा बरीमालेगांव ब्लास्ट केससाध्वी प्रज्ञा निर्दोषभगवा आतंकवाद फर्जीहिंदू आतंकवाद कांग्रेससुनील आंबेकर बयान
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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